भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार 25 फरवरी को इजरायल के दो दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए हैं. पीएम मोदी इजरायल में बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरेंगे, जहां बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी पीएम मोदी का स्वागत करेंगे. अपनी इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ वार्ता करेंगे, इजराइल की संसद (नेसेट) को संबोधित करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ बातचीत करेंगे.
वहीं, पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान अमेरिका ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है. मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक F-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों को इजरायल में तैनात किया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब क्षेत्र में ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है.
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रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के नेगेव रेगिस्तान स्थित ओवदा एयरबेस पर अमेरिका के 11 F-22 रैप्टर जेट उतारे गए हैं. इसे ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, विशेषज्ञों की मानें तो यह तैनाती संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी का संकेत भी हो सकती है.
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क्या है F-22 की खासियत?
बताया जा रहा है कि इतिहास में पहली बार अमेरिका ने बिना किसी संयुक्त अभ्यास या प्रशिक्षण कार्यक्रम के सीधे परिचालन या संभावित war-oriented missions के मकसद से इजरायली धरती पर अपने लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. यह कदम अमेरिका और इजरायल के बीच गहरे होते सामरिक सहयोग को भी दर्शाता है.
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बता दें कि F-22 रैप्टर पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे दुनिया के सबसे घातक और एडवांस फाइटर जेट में गिना जाता है. इसकी खासियत इसकी अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता और एडवांस वेपन सिस्टन है, जो दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक हमले करने में सक्षम है.
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मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने इस विमान को न तो इजरायल और न ही किसी अन्य देश को निर्यात किया है, जिसके कारण इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है.
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चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी भारत की ताकत
इस दौरे के दौरान, भारतीय सशस्त्र बल, विशेष रूप से थल सेना और वायु सेना, इजरायल से अत्याधुनिक हेरॉन (Heron) सिरीज के ड्रोन के उन्नत वेरिएंट्स का सौदा तय हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पहले से मौजूद हेरॉन-1 के बाद अब हेरॉन मार्क-2 (Heron Mk2) के सशस्त्र संस्करण की और अधिक खरीद पर चर्चा चल रही है, जो दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम होंगे.
आर्मी और एयर फोर्स पहले से ही हेरॉन Mk II ड्रोन चला रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर में इसके इस्तेमाल की बात सामने आई थी. तब इसे पाकिस्तान की जासूसी की लिए इस्तेमाल किया गया था. बीते दिनों मीडिया में सूत्रों के मुताबिक छपी खबरों के अनुसार अपनी ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सेना सैटेलाइट से जुड़े हेरॉन Mk II UAV की और अधिक खरीद चाहती है. लिहाजा इसके और ऑर्डर दिए गए हैं जबकि इंडियन नेवी पहली बार इन्हें ले रही है. नेवी लंबे समय से सर्विलांस के लिए इजरायल में ही बने सर्चर UAVs पर निर्भर रही है.
इजरायल की संसद को संबोधित करेंगे पीएम मोदी
अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ चर्चा करेंगे. इजरायल की संसद (नेसेट) को संबोधिक करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ बातचीत करेंगे. इजरायल यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत और इजरायल एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, जिसमें वृद्धि हुई है.