नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारियों को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में एक नई शिकायत सामने आई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि DGCA, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के कुछ अधिकारियों ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के साथ मिलीभगत की और उसके खिलाफ सामने आए गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई नहीं की. आरटीआई कार्यकर्ता तेजप्रताप सिंह ने 18 जुलाई को CVC में शिकायत दर्ज कराई थी.
CVC ने 3 अगस्त को शिकायत को कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी के पास आगे की जांच के लिए भेज दिया. शिकायत में नियामक स्तर पर लापरवाही, सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग और जानबूझकर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
मामला DFI के 2023 में किए गए नाम परिवर्तन के आवेदन से जुड़ा है. DFI ने अपना पंजीकृत नाम ‘ड्रोन फेडरेशन इंडिया’ से बदलकर ‘ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ करने की अनुमति मांगी थी. इस दौरान कंपनी रजिस्ट्रार की ओर से आपत्ति जताई गई. इसके बाद DFI की ओर से DGCA का एक NOC पेश किया गया. इस दस्तावेज पर तत्कालीन DGCA महानिदेशक अरुण कुमार के हस्ताक्षर बताए गए थे.
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CBI पहले ही कर चुकी है दो गिरफ्तारियां
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब DGCA पहले से ही कथित भ्रष्टाचार के एक अलग मामले में CBI की जांच के घेरे में है. FIR के मुताबिक, लंबित फाइलों को मंजूरी देने के बदले प्रति आवेदन 5 लाख रुपये मांगने का आरोप है. जांच के दौरान करीब 37 लाख रुपये नकद के साथ सोना, चांदी के सिक्के और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए जाने की बात भी सामने आई थी.
अधिकारियों की भूमिका पर अब जांच की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता तेजप्रताप सिंह ने इससे पहले भी 2025 में अलग-अलग अधिकारियों के सामने शिकायतें दी थीं. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका दाखिल कर मामले की CBI जांच की मांग भी की थी. नई शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जब MCA की जांच में कथित तौर पर जाली NOC का मामला सामने आ चुका था और इसके आधार पर अभियोजन की सिफारिश भी की गई थी, तो संबंधित अधिकारियों की ओर से गंभीर आरोपों पर आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
अब CVC के पास पहुंची शिकायत में इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की सतर्कता जांच की मांग की गई है. जांच का मुख्य सवाल यही है कि क्या अधिकारियों ने निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बावजूद कार्रवाई नहीं की.
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