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एयर इंडिया में कैसे बन सकते हैं कमांडर? जल्द लागू होने वाला है नया सिस्टम, AI एक्सप्रेस का अनुभव होगा अनिवार्य

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एअर इंडिया के विमानों में कमांडर बनने की तैयारी कर रहे योग्य पायलटों और सीनियर फर्स्ट ऑफिसर्स को अब एअर इंडिया एक्सप्रेस में सेवा देनी होगी. कंपनी पायलटों के लिए कॉमन सीनियरिटी पूल पर आधारित नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है. हालांकि, एअर इंडिया की ओर से अभी तक इस नए फ्रेमवर्क को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है.

सूत्रों के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत नैरो-बॉडी बोइंग 737 विमानों के लिए एअर इंडिया एक्सप्रेस में जाने वाले सीनियर फर्स्ट ऑफिसर्स को एकमुश्त 10 लाख रुपये का बोनस भी दिया जाएगा. माना जा रहा है कि इस कदम से पायलटों को एअर इंडिया समूह के भीतर करियर आगे बढ़ाने का एक तय रास्ता मिलेगा.

तीन साल में 21 लाख का भुगतान

एअर इंडिया एक्सप्रेस के मौजूदा कमांडरों के लिए भी इस नई व्यवस्था में आर्थिक लाभ रखा गया है. उन्हें तीन साल के दौरान कुल 21 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा. नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कमांडरों को कंपनी की ओर से तय बेस पर कम से कम दो साल तक तैनात रहना होगा. जरूरत पड़ने पर यह तैनाती छह महीने और बढ़ाई जा सकती है. तय अवधि पूरी करने के बाद पायलट अपनी योग्यता के मुताबिक पसंद का ऑपरेटिंग बेस चुन सकेंगे.

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एअर इंडिया समूह से जुड़े दो वरिष्ठ पायलटों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे अनुभवी पायलटों को बनाए रखने की बड़ी वजह है. मौजूदा समय में एयरलाइनों के बीच अनुभवी सीनियर पायलटों को अपने साथ जोड़ने की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. ऐसे में नई व्यवस्था के जरिए पायलटों की कमी से निपटने और उन्हें समूह के भीतर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

एअर इंडिया के पास नहीं है 737 बोइंग

एअर इंडिया में इस समय 3,500 से ज्यादा पायलट हैं, जबकि एअर इंडिया एक्सप्रेस में 2,000 से अधिक पायलट काम कर रहे हैं. दोनों एयरलाइनों के पास मिलाकर करीब 300 विमान हैं. खास बात यह है कि एअर इंडिया के मौजूदा बेड़े में बोइंग 737 शामिल नहीं है.

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सूत्र के मुताबिक, सीनियर फर्स्ट ऑफिसर्स को एअर इंडिया एक्सप्रेस में भेजने की योजना के पीछे बोइंग 737 के लिए कमांडरों की संख्या बढ़ाना मुख्य कारण है. एयरलाइन के बेड़े में अगले साल कई और बोइंग 737 विमान शामिल होने की उम्मीद है. ऐसे में नए विमानों के संचालन के लिए पहले से पर्याप्त संख्या में कमांडर तैयार रखना जरूरी होगा.

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कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल करने के बाद भी किसी पायलट को सीधे फर्स्ट ऑफिसर की जिम्मेदारी नहीं मिलती. शुरुआती ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उसे अगले दो से तीन साल के दौरान जरूरी परीक्षाएं और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं.

फर्स्ट ऑफिसर के तौर पर काम करने के करीब सात से आठ साल बाद पायलट को सीनियर फर्स्ट ऑफिसर बनाया जाता है. इसके बाद अनुभव और योग्यता के आधार पर उसे कमांडर के पद पर प्रमोशन मिलता है. वहीं, कमांडर के रूप में चार से पांच साल का अनुभव पूरा करने के बाद पायलट को सीनियर कमांडर की जिम्मेदारी दी जाती है.

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