Ahmedabad Plane Crash: 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 क्रैश हो गई। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर रही थी और टेकऑफ के कुछ ही मिनट बाद मेघानी नगर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस विमान में 242 लोग सवार थे और हादसे के बाद भयंकर आग लगने की वीडियोज सामने आई हैं। इसके साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों ने भी प्लेन के क्रैश होने के बाद आग का एक बड़ा सा गुबार देखा था। आइए जानते हैं कि एक्सीडेंट के बाद प्लेन में आग क्यों लग जाती है?
क्यों लगती है विमान हादसे में आग ?
विमान हादसों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण विमान में भरा जेट ईंधन है। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 जैसे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में लंबी दूरी की उड़ानों के लिए हजारों लीटर जेट ईंधन (जेट A-1 या केरोसिन) होता है। अहमदाबाद हादसे में, विमान लंदन जा रहा था, जिसके लिए ईंधन टैंक भरे हुए थे। क्रैश के दौरान, खासकर टेकऑफ या लैंडिंग पर, ईंधन टैंक टूट सकते हैं और यह ईंधन हवा के संपर्क में आकर आसानी से आग पकड़ लेता है।
हादसे में विमान के हिस्से, जैसे इंजन या बिजली के तार आदि टकराव से चिंगारी पैदा कर सकते हैं। अहमदाबाद में प्लेन एक इमारत से टकराया था। काफी संभावना है कि इससे धातु के हिस्सों में घर्षण हुआ होगा और चिंगारी से ईंधन में आग लग गई होगी।
कुछ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह हादसा इंजन की खराबी या किसी बाहरी वस्तु जैसे पक्षी आदि से टकराव के कारण यह हादसा हो सकता है। जब भी प्लने क्रैश होता है तो भारी ईंधन और तेज टकराव के कारण आग तेजी से फैलती है, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो जाते हैं।
कितना होता है आग का तापमान ?
विमान हादसे में लगने वाली आग का तापमान बहुत ज्यादा होता है। जेट A-1 ईंधन का दहन तापमान 800 डिग्री सेल्सियस से 1,800 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसका फ्लैश पॉइंट (जिस तापमान पर यह आग पकड़ता है) लगभग 38 डिग्री सेल्सियस होता है, लेकिन खुले में जलने पर तापमान तेजी से बढ़ता है। शोध के अनुसार, विमान दुर्घटना में जेट ईंधन की आग 1,100 डिग्री सेल्सियस तक स्थिर रह सकती है, और कुछ मामलों में इससे भी ज्यादा हो सकती है। अहमदाबाद हादसे में, प्रत्यक्षदर्शियों ने घना काला धुआं और विशाल आग की लपटें देखीं, जो भारी मात्रा में ईंधन जलने के कारण हुआ होगा।
इसका तापमान कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे ईंधन की मात्रा, हवा की उपलब्धता और क्रैश की तीव्रता आदि। बोइंग 787 जैसे विमान में 1,00,000 लीटर तक ईंधन हो सकता है, जो आग को और भयंकर बनाता है। इस तापमान पर धातु पिघल सकती है, और विमान का ढांचा तेजी से नष्ट हो सकता है, जिससे यात्रियों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
विमान हादसे में कैस हो सकता है बचाव
एक्सपर्ट्स की मानें तो विमान हादसे में आग से बचना बहुत मुश्किल है, लेकिन कुछ उपाय जान बचाने में मदद कर सकते हैं। यात्रियों को उड़ान से पहले सुरक्षा निर्देशों को ध्यान से सुनना चाहिए। इसमें निकटतम आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की स्थिति जानना शामिल है। अहमदाबाद हादसे में, विमान के टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश होने से यात्रियों को निकलने का समय बहुत कम मिला होगा।
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प्लेन क्रैश के समय किए जा सकते हैं ये काम
हादसे के बाद पहले कुछ सेकंड बहुत कीमती होते हैं। यात्रियों को तुरंत सीट बेल्ट खोलकर निकटतम निकास की ओर बढ़ना चाहिए। धुएं से बचने के लिए नीचे झुककर या रेंगकर चलना चाहिए, क्योंकि जहरीला धुआं ऊपर की ओर जाता है।
विमान में लगी आग से निकलने वाला धुआं बहुत जहरीला होता है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें होती हैं। यात्रियों को मुंह और नाक को कपड़े से ढकना चाहिए। अगर कपड़ा गीला हो, तो यह ज्यादा प्रभावी होता है।
अगर आग की लपटें दिखें, तो विपरीत दिशा में भागना चाहिए। अहमदाबाद में, विमान का कुछ हिस्सा इमारत पर गिरा, जिससे बचाव और जटिल हो गया। फिर भी आग से दूर रहना जरूरी है। प्लेन चालक दल प्रशिक्षित होता है और आपात स्थिति में सही दिशा दिखा सकता है। उनके निर्देशों का पालन करना चाहिए। आपातकालीन निकास के पास की सीटें चुनने से बचने का मौका बढ़ सकता है। हालांकि, इन सीटों पर बैठने वालों को चालक दल की मदद करनी पड़ सकती है।
पिछले 5 सालों में है सबसे बड़ा हादसा
अहमदाबाद में हुआ यह हादसा भारत में पिछले पांच सालों में पहला बड़ा यात्री विमान हादसा है। विमान के केवल 625 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने और फिर तेजी से नीचे गिरने से पता चलता है कि समस्या बहुत गंभीर थी। मेडे कॉल के बाद विमान से संपर्क टूट गया, जिससे पायलटों को स्थिति संभालने का मौका नहीं मिला होगा।
आग की तीव्रता ने बचाव कार्यों को और मुश्किल बना दिया। मेघानी नगर में क्रैश स्थल पर भारी धुआं और आग की लपटें दिखीं, और विमान का एक हिस्सा बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर जा गिरा।
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