अग्निपथ स्कीम के तहत देशभर के अग्निवीरों के लिए एक नया नियम लागू होने वाला है. केंद्र सरकार एक योजना पर काम कर रही है, जिसे फाइलन करके जल्दी ही लागू कर दिया जाएगा. अग्निवीर भर्ती में सेलेक्ट होकर सेना, वायुसेना, नौसेना में सेवाएं देने वाले युवाओं को नई योजना से बड़ा फायदा होगा, लेकिन इस योजना के दायरे में वही जवान आएंगे, जो 4 साल की नौकरी के दौरान देश के लिए कुर्बान होंगे. जी हां, अग्निवीरों को भी शहीद जैसा सम्मान देने और शहादत के बाद परिवार को नौकरी या पेंशन देने का प्रावधान किया जाना है. प्रस्ताव पेश कर दिया गया है, बस केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की मंजूरी मिलने का इंतजार है.
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रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की सिफारिश
वर्तमान में अग्निपथ योजना के तहत सेना के तीनों अंगों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों को ड्यूटी के दौरान जान जाने पर सिर्फ बीमा मिलता है. 2 अलग-अलग योजनाओं के तहत करीब एक करोड़ तक का बीमा मिलता है. लेकिन हाल में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने अग्निवीरों के लिए एक सिफारिश की और केंद्रीय मंत्रालय से कहा कि जो अग्निवीर देश के लिए जान देते हैं, उनके परिजनों के लिए सरकार की ओर से कुछ किया जाना चाहिए. रेगुलर सैनिकों की तरह सम्मान मिलना चाहिए और उनकी तरह ही अग्निवीरों के परिजनों को भी राहत और सुविधाएं मिलनी चाहिए, क्योंकि अग्निवीर भी देशसेवा में कुर्बान होते हैं.
संसदीय समिति की सरकार से सिफारिश क्या?
संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि अगर अग्निवीर बॉर्डर पर दुश्मनों से लड़ते हुए या ड्यूटी पर रहते हुए किसी अन्य वजह से जान कुर्बान करते हैं तो उन्हें शहीदों जैसा सम्मान मिलना चाहिए. जैसे शहादत के बाद रेगुलर सैनिकों के परिजनों को नौकरी और पेशन दी जाती है. यह सुविधा अग्निवीरों की कुर्बानी के बाद उनके परिजनों को भी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का गुजर बसर कर सकें. सूत्रों के अनुसार, संसदीय समिति की इस सिफारिश को लेकर केंद्रीय रक्षा मंत्रालय गंभीर है, जिसके लिए मंजूरी का इंतजार है. मंजूरी के बाद भविष्य में अग्निवीरों के परिजनों को किसी एक सुविधा का लाभ दिया जा सकता है.
रिटायरमेंट बेनिफिट, शहीद का दर्जा नहीं मिलता
बता दें कि सेना के तीनों अंगों में अग्निपथ योजना के तहत 4 साल के लिए अग्निवीर भर्ती किए जाते हैं. लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें रेगुलर सैनिकों की तरह फायदे नहीं मिलते और न ही शहीद का दर्जा मिलता है. अग्निपथ योजना को शुरू हुए 4 साल होने वाले हैं और पहला बैच रिटायर होने वाला है. सेना के तीनों अंगों में वर्तमान में करीब डेढ़ लाख अग्निवीर कार्यरत हैं. अकेले थलसेना में करीब 1.25 लाख अग्निवीर हैं. हर साल 45-50 हजार अग्निवीर भर्ती होते हैं. करीब 25 अग्निवीर ड्यूटी के दौरान मारे जा चुके हैं. इनके परिजनों के सिर्फ बीमा राशि मिली है, इसके अलाव कोई बेनिफिट, राहत या दर्जा नहीं मिला है.
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