भारत के साथ तालिबान के रिश्ते परिभाषित करना थोड़ा कठिन हो सकता है. मगर अब दोनों देशों के बीच एक नए चैप्टर की शुरुआत होने वाली है. दरअसल, तालिबानी सत्ता के अफगानिस्तान में कब्जे के बाद पहली बार कोई अफगानी नेता भारत के दौरे पर आने वाला है. उनके विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकि तालिबान के टॉप कमांडर्स में से एक हैं. इन पर यूएन ने बैन लगाया हुआ है, लेकिन दिल्ली दौरे के लिए उन्होंने स्पेशल परमिशन प्राप्त की है. आइए जानते हैं उनके यहां आने के पीछे क्या वजह हो सकती है.
तालिबान के प्रमुख कमांडर हैं अमीर मुत्ताकी
साल 2021 के अगस्त में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से पलायन के बाद वहां तालिबान सरकार का कब्जा हो गया था. उस समय के राष्ट्रपति अशरफ गनी को भी देश से भागना पड़ा था. उस दौरान भी अमीर खान एक प्रमुख लीडर के रूप में थे. उनकी भूमिका अफगानिस्तान में 1990 में पनपे तालिबान के समय से अहम रही है. अमीर पहले सैन्य कमांडर थे फिर प्रशासनिक और फिर कूटनीतिक रोल में थे.
महिलाओं के अधिकार; बच्चों की शिक्षा के कट्टर विरोधी!
अमीर खान मुत्ताकी को मानवाधिकार कामों का भी कमांडर कहा जा सकता है. आतंकवादियों को समर्थन, महिलाओं के अधिकार और बच्चों की शिक्षा को लेकर कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देना उनकी पहचान रही है. इन अधिकारों के दमन के कारण संयुक्त राष्ट्र ने उन पर 25 जनवरी 2001 में प्रतिबंधित कर दिया था. उस समय तालिबान के कई मंत्रियों पर यूएन ने बैन किया था.
तालिबान के पहले शासनकाल में बच्चों और लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था और पढ़ने के लिए स्कूलों को कट्टरपंथी मदरसों में बदलने की नीतियां लागू की थी.
दिल्ली क्यों आ रहे हैं अमीर खान मुत्ताकी?
यह बड़ा सवाल है कि तालिबानी नेता भारत दौरे पर क्यों आ रहे हैं? यह इस वक्त की रणनीतिक मांग है. दरअसल, दोनों देशों के बीच मुलाकात से पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू-कश्मीर में पनप रहे आतंकवाद को खत्म करना है. इससे पहले एस जयशंकर ने अफगान दौरे पर भी मुत्ताकी से मुलाकात की थी. वहां मुत्ताकी ने पहलगाम हमले की निंदा भी की थी जिसकी सराहना की गई थी. हालांकि, सितंबर में भी अमीर मुत्ताकी भारत आने वाले थे लेकिन उस वक्त उन्हें UN से छूट नहीं मिली थी.