भारतीय वायुसेना में 22 साल की सर्विस के बाद अभिनंदन वर्धमान ने प्री-मेच्योर रिटायरमेंट ले ली है और प्राइवेट एयरलाइन Fly91 जॉइन कर ली है. अभिनंदन ने 2004 में एयरफोर्स जॉइन की थी और 2026 में रिटायरमेंट ले ली. इस बीच 27 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के साथ LoC के ऊपर हवाई जंग के दौरान अभिनंदन ने अपने MiG-21 Bison लड़ाकू विमान से पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को ढेर किया था. इस दौरान अभिनंदन के विमान पर मिसाइल अटैक हुआ और उन्हें पैराशूट से इजेक्ट होना पड़ा. लैंडिंग के दौरान अभिनंदन को पाक सेना ने पकड़ लिया और वे करीब 60 घंटे तक दुश्मन सेना की हिरासत में रहे.
मेडिकल-मेंटल फिटनेस के बाद री-जॉइनिंग मिली
भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक चर्चा हुई, जिसके बाद 1 मार्च 2019 को अभिनंदन को रिहा करके वापस भारत भेज दिया गया. इसके बाद अभिनंदन के मेडिकल टेस्ट हुए और इंटेलिजेंस काउंसिलिग हुई, जिसमें उन्हें फिटनेस क्लीयरेंस मिल गया और उन्हें री-जॉइनिंग मिल गई. अभिनंदन को उनकी बहादुरी के लिए केंद्र सरकार ने वीर चक्र से सम्मानित किया. दिसंबर 2021 में अभिनंदन को विंग कमांडर के पद से प्रमोट करके ग्रुप कैप्टन बना दिया गया. अब 2026 में अभिनंदन ने रिटायरमेंट ले ली है तो आइए जानते है कि दुश्मन देश की कैद से लौटने के बाद सैनिकों के साथ क्या-क्या होता है? उनकी सैलरी और री-जॉइनिंग को लेकर क्या नियम हैं?
दुश्मन की कैद से छूटकर लौटने के बाद क्या होता?
सेना-वायुसेना-नौसेना तीनों के जवानों को युद्ध के दौरान अगर दुश्मन देश पकड़े ले और उसे छुड़ा लिया जाए तो जिनेवा कन्वेंशन के नियमों के तहत उसकी वापसी संभव होती है. वहीं वतन लौटने के बाद उसे सेना और सरकार के द्वारा निर्धारित एक सख्त प्रक्रिया से गुजरना होता है. इस प्रक्रिया को डीब्रीफिंग और रिपैट्रिएशन कहा जाता है. इसे तहत सैनिक के मेडिकल और साइकोलॉजिकल टेस्ट होते हैं. उसे मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाकर फिजिकल टेस्ट किए जाते हैं, ताकि पता चले कि उसे फिजिकली टॉर्चर किया गया है या किसी तरह के वायरस का इंजेक्शन लगाया गया है, ताकि समय रहते उसे हुई या होने वाली बीमारी के बारे में पता चल जाए.
मनोवैज्ञानिक उसकी काउंसिलिंग करते हैं, ताकि पता चले कि दुश्मन ने कैद के दौरान उसे मेंटली टॉर्चर तो नहीं किया? उसे पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) तो नहीं हुआ है. मेंटल और मेडिकल टेस्ट के अलावा सेना और खुफिया एजेंसियां उससे पूछताछ भी करती हैं, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना होता कि दुश्मन ने उससे कोई राज तो नहीं उगलवा लिया? दुश्मन के कैंप की लोकेशन, उनका पूछताछ करने का तरीका, उनका व्यवहार और उनकी रणनीति आदि के बारे में जानकारी जुटाई जाती है. पूछताछ का मकसद यह जानना भी होता है कि दुश्मन सेना ने उसका ब्रेनवॉश तो नहीं किया या उसे जासूसी करने के लिए तो वापस नहीं भेजा?
दुश्मन की कैद से छूटने के बाद री-जॉइनिंग मिलती है?
दुश्मन देश की कैद से छूटकर लौटने के बाद सैनिक को री-जॉइनिंग मिल सकती है, लेकिन उसे मेडिकल और मेंटल फिटनेस की क्लीयरेंस लेनी होगी. वहीं उसकी इच्छा पर भी उसकी री-जॉइनिंग निर्भर करेगी. अगर सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ घोषित किया जाएगा तो उसे री-जॉइनिंग मिलेगी. इसके अलावा इंटेलिजेंसी एजेंसियों की क्लीयरेंस रिपोर्ट भी उसकी री-जॉइनिंग का आधार बनेगी. लेकिन क्योंकि सैनिक दुश्मन की कैद में रहकर आया है, इसलिए वह शक के दायरे में रहता है, ऐसे में सरकार और आर्मी अथॉरिटी पर निर्भर करेगा की उसे फील्ड में एक्टिव ड्यूटी देनी है या डेस्क जॉब पर री-जॉइनिंग करानी है.
अगर सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से 100% फिट घोषित होगा तो उसे उसकी पुरानी रेजिमेंट में वापस भेजा जा सकता है. जैसे अभिनंदन वर्धमान फिट घोषित हुए थे और उन्हें फिर से मिग-21 लड़ाकू विमान उड़ाने की परमिशन मिल गई थी. इसके अलावा अगर दुश्मन की कैद के दौरान सैनिक को चोट लग जाती है या वह शारीरिक रूप से फिट घोषित नहीं किया जाता हहै तो उसे प्रशासनिक विभाग या ट्रेनिंग सेंटर में डेस्क जॉब दी जा सकती है, ताकि उसकी नौकरी बनी रहे. सैनिक जब तक दुश्मन देश की कैद में रहता है, तब तक उसकी सैलरी और भत्ते मिलते रहते हैं, जो उसके परिवार को दिए जाते हैं या उसके बैंक खाते में जमा कराए जाते हैं.
इसके अलावा अगर कोई सैनिक मेडिकल बेस पर नौकरी जारी रखने में असमर्थ होता हो तो उसे पेंशन, मेडिकल फैसिलिटी और रिटायरमेंट के सभी बेनिफिट मिलते हैं. वहीं अगर यह साबित हो जाए कि सैनिक ने दुश्मन देश के आगे सरेंडर किया या देशद्रोह किया तो उसका कोर्ट मार्शल करके उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है. यह पता लगाने के लिए एक कमेटी गठित की जाती है, जिसक रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला लिया जाता है. आमतौर पर भारतीय जवान मौत को गले लगा लेंगे, लेकिन दुश्मन के आगे घुटने नहीं टेकेंगे. ऐसे सैनिक जब दुश्मन की कैद से छूटकर वापस लौटते हैं तो भारतीय उन्हें गले लगा लेते हैं और सम्मानित करते हैं.
दुश्मन की कैद से छूटे अभिनंदन को क्या-क्या मिला?
पाकिस्तानी सेना की कैद में 60 घंटे रहने के बाद जब अभिनंदन वापस लौटा तो मेडिकल, साइकोलॉजिकल टेस्ट और डीब्रीफिंग के बाद उसे फिटनेस सर्टिफिकेट मिला. 6 महीने बाद अगस्त 2019 में भारतीय वायुसेना के बेंगलुरु स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन ने उन्हें दोबारा लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए ‘फिट’ घोषित किया. मेडिकल क्लीयरेंस मिलने के तुरंत बाद अभिनंदन ड्यूटी पर लौटे और राजस्थान के एयरबेस पर पोस्टिंग मिली. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से ग्रेजुएशन के बाद 19 जून 2004 को अभिनंदन वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम (लड़ाकू शाखा) में बतौर फ्लाइंग ऑफिसर कमीशन हुए थे. जून 2006 में वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट बने. जुलाई 2010 में स्क्वाड्रन लीडर बने.जून 2017 में वे विंग कमांडर बने. दिसंबर 2021 में उन्हें ग्रुप कैप्टन बनाया गया. 2026 में उन्होंने समय से पहले (प्री-मैच्योर) रिटायरमेंट ले ली.
संबंधित खबरें
यूपी-बिहार से लेकर केरल तक बारिश का अलर्ट, इन राज्यों में आंधी की चेतावनी
2 hrs ago'भारत में स्वागत है एलन!' स्टारलिंक लाइसेंस विवाद पर राहुल गांधी का तंज
4 hrs ago'सतर्क रहें', सऊदी अरब में रहने वाले भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी
4 hrs agoहूती हमलों का सऊदी की उड़ानों पर असर, IndiGo और Air India की फ्लाइटें रद्द
5 hrs agoहवाई सफर होगा महंगा, एयर इंडिया और AI एक्सप्रेस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज
5 hrs agoब्रेकअप और शादी से इनकार आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
6 hrs agoकभी राजनीति में क्यों नहीं उतरे नाना पाटेकर? बने किसानों की आवाज
6 hrs ago'हमले के केंद्र में EC', 42 पूर्व जजों ने चुनाव प्रक्रिया का किया बचाव
8 hrs agoकैंसर की दवाएं 70 फीसदी तक होंगी सस्ती, मोदी सरकार का बड़ा फैसला
8 hrs ago300 सांसद शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं पर पुलिस कर रही ज्यादती: राहुल
9 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines