केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में सात बड़े फैसले लिए गए हैं. बैठक में सेमीकॉन 2.0 मिशन को मंजूरी मिली है. साथ ही वाराणसी में दो एलिवेडेट कॉरिडोर बनाने का भी फैसला लिया गया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा, 'आज, अगले स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए दो बड़ी मंजूरियां दी गई हैं.'

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उन्होंने बताया, पहली है वरुण नदी के किनारे बनने वाला पूरा छह-लेन और चार-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर - वरुण एक्सप्रेसवे. 43 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. इसमें 10,998 करोड़ रुपये का निवेश होगा, इसे हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा और इसके करीब चार साल में पूरा होने की उम्मीद है.'

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दूसरे कॉरिडोर के बारे में उन्होंने बताया कि काशी में गंगा के साथ-साथ एक पूरा छह-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा. जो यहां से शुरू होकर नदी के किनारे-किनारे, IIT-BHU के पास से गुजरते हुए और लंका चौक व रामनगर की ओर जाते हुए - एक 'सिग्नेचर ब्रिज' बनाया जाएगा. गंगा के किनारे बनने वाला एलिवेटेड कॉरिडोर 46 किलोमीटर लंबा होगा और इसे 14,448 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा.

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साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के डवलपमेंट के लिए मिशन 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी है. इसका कुल बजट 1,27,500 करोड़ रुपये है.

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इस मिशन के बारे में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, हम सभी जानते हैं कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री बहुत अहम है. सेमीकंडक्टर चिप्स लगभग सभी आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी हैं, चाहे वह मोबाइल फोन हो या कैमरा, फ्रिज, टीवी और AC जैसे घरेलू उपकरण हों, स्कूटर, कार और ट्रेन जैसी गाड़ियां हों, या फिर मिसाइलें ही क्यों न हों. इलेक्ट्रॉनिक्स अपने आप में एक बड़ा सेक्टर बनकर उभरा है, और यह पहल अब पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को कवर करती है.

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चार अन्य बड़े फैसले

  • मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम - 62,500 करोड़ रुपये
  • यूरिया-2026 के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी
  • पारादीप-हरिदासपुर रेल लाइन को डबल करने का फैसला - 2,542 करोड़ रुपये
  • डांगोपोसी-राजखरसावां के बीच चौथी रेल लाइन - 1,365 करोड़ रुपये