UPI के 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और कांग्रेस आमने-सामने हैं. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने इसे ‘UPI टैक्स’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है.
वहीं, अब राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी और सरकार की ओर से कांग्रेस पर पलटवार किया गया है. सरकारी सूत्रों और बीजेपी ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए हैं.
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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध तरीके से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने और इससे जुड़े आय के लिए एक व्यवस्था तैयार करने की बात कही थी. समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि इस व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए. बीजेपी अब इसी सिफारिश का हवाला देकर कांग्रेस के मौजूदा विरोध पर सवाल उठा रही है.
समिति में शामिल थे 5 कांग्रेस सांसद
बता दें कि समिति में शामिल पांच कांग्रेस सांसदों ने रिपोर्ट को लेकर कोई असहमति दर्ज नहीं कराई थी. इन पांच सांसदों में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल हैं. रिपोर्ट 12 अगस्त को समिति की बैठक के बाद अपनाई गई थी. बीजेपी सूत्रों ने इसी आधार पर राहुल गांधी के मौजूदा विरोध पर सवाल उठाया है.
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समिति ने MDR को लेकर क्या कहा था?
सूत्रों के अनुसार, वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में UPI के लिए लंबे समय तक चलने वाली कमाई की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया था. समिति का कहना था कि बड़े मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन के लिए अलग-अलग दरों वाला MDR सिस्टम लागू करने के कानूनी प्रावधान मौजूद हैं. इसलिए इस व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू करना चाहिए.
रिपोर्ट में UPI के जीरो-MDR मॉडल को जारी रखने के लिए सरकार की ओर से दी जा रही आर्थिक सहायता पर भी चिंता जताई गई. समिति के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जबकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित परिचालन लागत लगभग 20,700 करोड़ रुपये है. समिति ने कहा कि इस बड़े अंतर के चलते पेमेंट कंपनियों की सरकारी सहायता पर निर्भरता बढ़ सकती है.
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UPI के लिए आर्थिक मजबूती जरूरी
समिति ने यह आशंका भी जताई कि अगर पेमेंट व्यवस्था के लिए पर्याप्त और स्थायी आय का स्रोत नहीं बनाया गया तो साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन फ्रॉड रोकने और पेमेंट नेटवर्क के तकनीकी ढांचे को मजबूत करने जैसे जरूरी क्षेत्रों में निवेश प्रभावित हो सकता है.
हालांकि, समिति ने छोटे दुकानदारों और कम रकम वाले UPI पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रोत्साहन जारी रखने पर जोर दिया. खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए भी इसे जरूरी बताया गया. इसी के साथ समिति ने वित्तीय सेवा विभाग से ऐसा स्तरीय आय मॉडल तैयार करने पर विचार करने को कहा था, जिससे UPI सिस्टम भविष्य में लगातार सरकारी बजट पर निर्भर न रहे. समिति ने साफ तौर पर UPI के लिए आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर व्यवस्था को जरूरी बताया था.
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सरकार का नया UPI फी स्ट्रक्चर
सरकार की नई व्यवस्था के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ कारोबारी UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा. यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि संबंधित व्यापारी से लिया जाएगा. इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है, यानी 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर भी MDR 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा. वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं किया जाएगा.
छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी इस व्यवस्था में राहत दी गई है. जो छोटे व्यापारी UPI QR के जरिए एक महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करते हैं, उन्हें MDR से बाहर रखा गया है.
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इसके अलावा कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR दरें तय की गई हैं. सरकार का कहना है कि नए शुल्क का सीधा असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा. सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और UPI नेटवर्क के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए जरूरी निवेश जारी रखा जा सके.
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राहुल गांधी ने नए UPI शुल्क पर क्या कहा?
नए UPI शुल्क को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इस व्यवस्था को ‘UPI टैक्स’ करार देते हुए कहा कि इसका लाभ अमेरिका को पहुंच सकता है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर यह फैसला ले रहे हैं.
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से नई शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि UPI देश में डिजिटल भुगतान का एक अहम माध्यम बन चुका है और इस पर अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था का असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है.
वहीं, सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि प्रस्तावित MDR सीधे ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि यह पात्र कारोबारी लेनदेन से जुड़ा शुल्क है. सरकार के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद UPI सिस्टम के लिए ऐसा वित्तीय मॉडल तैयार करना है, जो भविष्य में लंबे समय तक टिकाऊ रह सके और डिजिटल भुगतान से जुड़े बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में निवेश जारी रखा जा सके.