प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीने हैं सबसे ज्यादा जरूरी, AIIMS की डॉक्टर ने बताया इस दौरान कैसे रखें मां और बच्चे का ख्याल

AIIMS, नई दिल्ली के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. के. अपर्णा शर्मा बता रही हैं कि प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीने यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर क्यों जरूरी होता है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

Pregnancy First Trimester

पहले ट्राइमेस्टर में कौन से टेस्ट करवाने जरूरी होते हैं. Image Credits - AI

Pregnancy First Trimester: प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीनों को फर्स्ट ट्राइमेस्टर कहा जाता है जिसे डॉक्टर प्रेग्नेंसी की गोल्डन विंडो (Pregnancy Golden Window) भी कहते हैं. यह वह समय है जब प्रेग्नेंट मां और बच्चे का खासतौर से ख्याल रखना जरूरी होता है. इसी बारे में बता रही हैं AIIMS, नई दिल्ली के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. के. अपर्णा शर्मा. स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के साथ ही डॉ. शर्मा फीटल मेडिसिन स्पेशलिस्ट भी हैं जिसका मतलब है कि वे प्रेग्नेंसी के दौरान मां और बच्चे दोनों की देखभाल करती हैं. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी की देखभाल बाद में जरूरी है, लेकिन सच यह है कि प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीने सबसे ज्यादा जरूरी हैं क्योंकि इस दौरान जो भी कदम उठाए जाते हैं उनसे ना केवल कॉम्पलिकेशन को समय रहते पहचाना जा सकता है बल्कि उन्हें होने से भी रोका जा सकता है. ऐसे में चलिए जानते हैं प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीनों में क्या करें और इसपर डॉ. के. अपर्णा शर्मा की क्या सलाह है.

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पहला ट्राइमेस्टर क्यों महत्वपूर्ण है

पहला ट्राइमेस्टर वो वक्त है जिसमें बच्चे के शरीर के अंग बन रहे होते हैं, प्लेसेंटा यानि कि आंवल नाल डेवलप हो रही होती है और प्रेग्नेंसी की नींव रखी जाती है. यही वह समय है जब प्रेग्नेंसी की मुश्किलों को पहचानकर उपाय भी कर सकते हैं. इसे एक गोल्डन विंडो की तरह समझना चाहिए, अगर यह मौका निकल गया तो वापस नहीं आता है.

पहले ट्राइमेस्टर में बच्चे के लिए कौन सी जांच होती है

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  • प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीनों में डॉक्टर मां और बच्चे दोनों की कुछ जांचें कर सकते हैं –
  • बच्चे के लिए सबसे पहले एक डेटिंग स्कैन जरूरी है जोकि यह कन्फर्म करता है कि ट्राइमेस्टर कितने हफ्ते की है
  • दूसरा है NT Scan जो 11 से 13+6 हफ्ते के बीच में होता है. यह क्रोमोसोमल कंडीशंस की स्क्रीनिंग के लिए किया जाता है.
  • इसके अलावा शारीरिक समस्याओं की पहचान भी हो सकती है.

मां के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं

पहले ट्राइमेस्टर में हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लेम्पसिया) के लिए जांचें हो सकती हैं, डायबिटीज और थायराइड की जांच हो सकती है. इसके अलावा थैलीसीमिया के लिए भी जांच की जा सकती है जोकि अनीमिया का एक बड़ा कारण है.

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इस समय पर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और हेल्थ हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टर कॉम्प्लिकेशंस होने से पहले ही उनका अंदाजा लगा सकते हैं.

फीटल मेडिसिन इन महीनों में दिखाती है असर

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डॉ. शर्मा बताती हैं कि पहले ट्राइमेस्टर में फीटल मेडिसिन फर्क ला सकती है. जिन मां में रिस्क अधिक होता है उन्हें शुरुआत में ही प्रिवेंटिव दवाइयां दी जा सकती हैं. शुरुआत से ही एक क्लियर मॉनिटरिंग प्लान तैयार किया जाता है, जरूरत होने पर जेनेटिक काउंसलिंग और टेस्टिंग के विकल्प दिए जा सकते हैं. इससे डिलीवरी प्लानिंग ज्यादा सुरक्षित और पर्सनलाइज्ड हो जाती है. ऐसे में शुरुआती स्क्रीनिंग सिर्फ जानकारी नहीं देती है बल्कि यह सीधेतौर पर बेहतर परिणाम लाने में मदद करती है.

आपको क्या करना चाहिए

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प्रेग्नेंसी को जल्दी रजिस्टर कराना जरूरी है, शुरू के 2 महीने के अंदर 11 से 13 हफ्ते तक NT स्कैन जरूर कराएं, डॉक्टर से जरूरी टेस्ट जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डाउन सिंड्रोम और थैलेसीमिया स्क्रीनिंग करवाना जरूरी है. इसके अलावा डॉक्टर के बताए गए सप्लीमेंट्स लेना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source - AIIMS

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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