Varicose Veins का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है? वेरिकोज वेन्स स्पेशलिस्ट ने बताया ये 3 नौकरियों वाले हो सकते हैं शिकार

Varicose Veins Disease: वेरिकोज वेन्स की दिक्कत में पैरों पर गहरी नीली और बैंगनी धारियां नजर आने लगती हैं. इससे चलने-फिरने में भी दिक्कत होने लगती है. ऐसे में वेरिकोज वेन्स स्पेशलिस्ट डॉ. सुमित कपाड़िया बता रहे हैं किन लोगों को वेरिकोज वेन्स का खतरा ज्यादा होता है.

Varicose Veins

किस नौकरी के व्यकित को वेरिकोज वेन्स का खतरा ज्यादा होता है. Image Credit - Instagram

Who Is Most At Risk For Varicose Veins: वेरिकोज वेन्स ऐसी कंडीशन है जिसमें पैरों पर नसें बाहर उभरी हुई नजर आने लगती हैं. ये नसें नीली और बैंगनी धारियों की तरह दिखती हैं, सूज जाती हैं और इन्हें हाथ लगाने पर दर्द होने लगता है. वेरिकोज वेन्स (Varicose Veins) की दिक्कत ब्लड फ्लो कम होने के कारण होती है. इसमें पैरों की धमनियां डैमेज हो जाती हैं और मुड़ने लगती हैं. वैस्कुलर सर्जन और वेरिकोज वेन्स स्पेशलिस्ट डॉ. सुमित कपाड़िया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट शेयर कर यह बताया है कि वो कौनसे लोग हैं जिन्हें वेरिकोज वेन्स की दिक्कत ज्यादा होती है. डॉक्टर ने ऐसी 3 नौकरियों का जिक्र किया है जिनमें लोगों को वेरिकोज वेन्स होने का खतरा ज्यादा होता है. डॉ. सुमित का कहना है कि सिर्फ उम्र ही नहीं बल्कि इन नौकरियों को करने वाले लोगों को 20 या 30 साल की उम्र में भी वेरिकोज वेन्स की दिक्कत हो सकती है.

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किन लोगों को हो सकती हैं वेरिकोज वेन्स | Who Are At Risk Of Varicose Veins

टीचर – डॉ. सुमित कपाड़िया बताते हैं कि टीचर क्लास में लंबे समय तक खड़े रहते हैं जिससे ब्लड फ्लो कम हो सकता है. इससे पैरों से वापस दिल तक खून तेजी से नहीं पहुंच पाता जिससे वेरिकोज वेन्स की दिक्कत हो सकती है.

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सैलून और हेल्थकेयर स्टाफ – हेयरड्रेसर, नर्स और क्लिनिक असिस्टेंट दिनभर खड़े रहते हैं. इससे रक्त धमनियों पर प्रेशर पड़ता है जिससे वेरिकोज वेन्स होने की संभावना बढ़ जाती है.

कोर्पोरेट डेस्क प्रोफेशनल्स – जो लोग लंबे समय तक बैठने वाली नौकरियां (Jobs) करते हैं उनका ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है. इससे धमनियां डैमेज होने लगती हैं जिससे वेरिकोज वैन्स हो सकती हैं.

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डॉक्टर ने बताया कि लंबे समय तक बैठे या खड़े रहने वाली नौकिरयों में पैरों की नसों (Arteries) पर दबाव पड़ता है. इससे नसों पर हैवीनेस फील होती है, सूजन आ सकती है और ब्लड फ्लो कम होने से वेरिकोज वैन्स हो जाती हैं.

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किस तरह वेरिकोज वेन्स से बच सकते हैं

  • वेरिकोज वेन्स ना हों इसके लिए हर 45 मिनट में थोड़ा चलें-फिरें.
  • अपने पैरों को हर 10 मिनट में सामने की तरफ फैलाएं.
  • पैरों को मोड़कर बैठने से परहेज करें.
  • खुद को हाइड्रेटेड रखें.
  • अगर वेरिकोज वेन्स के लक्षण (Varicose Veins Symptoms) नजर आने लगे हैं तो कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पहनना शुरु करें.

वेरिकोज वेन्स को समय रहते पहचान लिया जाए तो इस दिक्कत को कम किया जा सकता है. इसीलिए डॉक्टर से वक्त रहते संपर्क करें.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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