Hemorrhoids Treatment: हेमोरॉइड्स को आम भाषा में बवासीर कहा जाता है. यह गुदा में होने वाली दिक्कत है जिसमें गुदा के अंदर या बाहर मांस की गांठ बनने लगती है. इसमें व्यक्ति को असहनीय दर्द होता है और मलत्याग करने में भी दिक्कत आती है. बहुत से लोग बवासीर को सालों तक सहते रहते हैं, शर्म, झिझक या जागरूकता की कमी से इलाज नहीं कराते और बवासीर गंभीर होता चला जाता है. वहीं, अक्सर ही लोग बवासीर (Bawasir) में डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय घरेलू उपाय आजमाते हैं या यहां-वहां से सुनकर देसी इलाज आजमाने लगते हैं. इससे स्थिति बेहतर होने के बजाय बिगड़ भी सकती है. ऐसे में हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग की रिपोर्ट में बताया गया है कि बवासीर क्या है, किस कारण होता है, इसका पता कैसे चलता है और इसका सही ट्रीटमेंट क्या है. अगर आप बवासीर से दो-चार हो रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए काम की साबित हो सकती है.
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बवासीर क्या है और इसमें क्या होता है
सभी के रेक्टम यानी गुदा में नसों का गुच्छा होता है जो मलाशय और गुदा में स्थित श्लेष्म झिल्ली की परत के अंदरूनी हिस्सों में होता है. जब यह नसें सूज जाती हैं और बाहर निकलने लगती हैं तो इसे हेमोरॉइड्स या बवासीर कहा जाता है. हेमोरॉइड्स 2 तरह का होता है, एक इंटर्नल हेमोरॉइड और दूसरा एक्सटर्नल हेमोरॉइड्स. इंटर्नल हेमोरॉइड्स गुदा के अंदर स्किन पर निकलते हैं और एक्सटर्नल हेमोरॉइड्स गुदा से बाहर लटकने लगते हैं और अनकंफर्टेबल होते हैं. इनसे स्किन इरेटिटेड हो जाती है और कटने या छिलने लगती है. अगर बाहर निकले हेमोरॉइड में ब्लड क्लॉट बनने लगे तो इससे अचानक और गंभीर दर्द हो सकता है. एक्सटर्नल हेमोरॉइड में गुदा के आस-पास गांठ या लंप महसूस होती है.
इंटर्नल हेमोरॉइड्स बिना दर्द वाले हो सकते हैं. खून निकलने पर भी दर्द हो यह जरूरी नहीं है. इसमें मलत्याग के बाद खून नजर आ सकता है या टॉयलेट पेपर पर खून दिख सकता है. इंटर्नल हेमोरॉइड्स प्रोलैप्स हो सकता है या गुदा से अलग भी बढ़ सकता है. इससे दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
क्यों होता है बवासीर
ज्यादातर बवासीर क्रोनिक कब्ज (Chronic Constipation) यानी हमेशा या लगातार रहने वाली कब्ज के कारण हो सकता है. इसमें बाउल मूवमेंट्स पर दबाव पड़ता है, लंबे समय तक टॉयलेट में बैठा रहना पड़ सकता है, इससे ब्लड फ्लो पर असर पड़ता है और खून जमने लगता है जिससे नसें बढ़ने और फूलने लगती हैं. इसीलिए प्रेग्नेंसी के दौरान अक्सर महिलाओं को हेमोरॉइड्स की दिक्कत हो जाती है क्योंकि गर्भाशय नसों पर लगातार दबाव बनाता है
बवासीर का पता कैसे चलता है
बवासीर होने पर शरीर मलत्याग करते समय खून नजर आता है और दर्द होता है. अगर ये दिक्कतें होती हैं तो जनरल फिजीशियन, जनरल सर्जन, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिल्ट, प्रोक्टोलॉजिस्ट या कोलोरेक्टल सर्जन से मिला जा सकता है. डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री देखते हैं और फिजिकल एग्जामिनेशन से चेक करते हैं कि बवासीर है या नहीं. अगर देखकर पता ना चले तो डिजिटल रेक्टल एग्जाम किया जा सकता है जिससे मल में खून की जांच होती है. एनोस्कोप से एनल कनाल की जांच भी की जा सकती है. अगर गुदा से खून निकलने की दिक्कत है और बवासीर नहीं है तो दूसरे कारण का पता लगाने के लिए कोलोनस्कॉपी की जा सकती है.
बवासीर कैसे ठीक होता है
फाइबर का सेवन – बवासीर में सर्जरी और दवा के अलावा लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करना बेहद जरूरी होता है. डॉक्टर से मिलने के बाद और दवा लेने के बाद घर में कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. मरीज को फाइबर के सेवन की सलाह दी जाती है. फाइबर से भरपूर फूड्स मल को सॉफ्ट करते हैं जिससे मलत्याग करने में आसानी होती है. ऐसे में ब्रोकली, बींस, ओट ब्रान, पूर्ण अनाज और ताजे फल खाए जा सकते हैं.
मलत्याग करने में देरी ना करें – अगर आपको मलत्याग करने की इच्छा हो रही है या प्रेशर फील होता है तो बाथरूम जाने में देरी ना करें. तुरंत मलत्याग करने जाएं जिससे मलाशय और गुदा पर दबाव ना पड़े.
सिट्ज बाथ – बवासीर में डॉक्टर सिट्ज बाथ (Sitz Bath) के लिए दवा देते हैं. बड़े टब या बाथटब में गर्म पानी और डॉक्टर की दी गई दवा को डालकर बैठा जाता है और शरीर के निचले हिस्से की सिकाई की जाती है. इससे खुजली, इरिटेशन और दर्द कम होने में मदद मिलती है. बवासीर में 20 से 25 मिनट सिट्ज बाथ करने की सलाह दी जाती है.
बवासीर में कौन से प्रोसीजर किए जाते हैं
बवासीर अगर बहुत गंभीर हो और दवा या लाइफस्टाइल में बदलाव से ठीक ना हो तो डॉक्टर सर्जरी या मेडिकल प्रोसीजर की सलाह देते हैं. इसमें हेमोरॉइड्स के लिए बैंड इट टेक्नीक का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें हेमोरॉइड को बांधा जाता है जिससे वह कुछ हफ्तों में निकल जाता है. हेमेरोडेक्टमी और स्टेपल्स भी मेडिकल प्रोसीजर हैं जो बवासीर में किए जा सकते हैं.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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Source - Harvard
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