क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी, जिसके एक इंजेक्शन की कीमत है करोड़ों रुपये; बच्चों में SMA ऐसे दिखते हैं शुरुआती लक्षण

क्या आप जानते हैं स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी हेल्थ समस्या के बारे में, जिसके कारण मरीज की मांसपेशियां इतनी ज्यादा कमजोर हो जाती है कि छोटे-मोटे काम करना भी मुश्किल हो जाता है. आइए जानते हैं ये बीमारी कितनी गंभीर है.

Spinal Muscular Atrophy

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी? (Image: AI)

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खबर की मुख्य बातें:

  • स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है जो मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी आती है.
  • SMA के कारण बैठने, चलने, निगलने और सांस लेने जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं, और इसकी गंभीरता व्यक्ति और प्रकार के आधार पर निर्भर होती है.
  • यह बीमारी आमतौर पर SMN1 नामक जीन में बदलाव के कारण होती है, जो माता-पिता से बच्चे में आ सकता है, भले ही माता-पिता स्वयं प्रभावित न हों.
  • SMA के इलाज के लिए उपयोग किए जाने वाले एक इंजेक्शन की कीमत भारत में लगभग ₹16 करोड़ से ₹17.5 करोड़ के बीच है.

Spinal Muscular Atrophy: बीमारियों के बारे में जब भी सोचा जाता है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले डायबिटीज, हाई बीपी, कैंसर, किडनी से जुड़ी बीमारियां और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का नाम आता है. लेकिन कई ऐसी दुर्लभ बीमारियां दुनिया में पनप रही हैं, जिसका इलाज इतना महंगा है कि हर कोई उसे करवा नहीं पाता और जिंदगीभर उस बीमारी के साथ जीने लगता है. हम जिस बीमारी के बारे में बात कर रहे हैं, इसका नाम स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी है. इस बीमारी का इलाज इतना ज्यादा महंगा है कि एक इंजेक्शन की कीमत करोड़ों में है. आइए जानते हैं क्या है ये बीमारी और कैसे दिखते हैं लक्षण?

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क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी?

NHS के अनुसार, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक दुर्लभ आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है, जो शरीर की मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करती है. इसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है और समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है. SMA में बैठने, चलने, निगलने और सांस लेने जैसी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं. इसकी गंभीरता हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है. इसके लक्षण कितने गंभीर होंगे ये इसके टाइप पर निर्भर करते हैं.

प्रकारकब शुरू होता है
टाइप 16 महीने से कम उम्र के शिशुओं में
टाइप 26 से 17 महीने की उम्र के शिशुओं और छोटे बच्चों में
टाइप 318 महीने से 17 साल तक के बच्चों और किशोरों में
टाइप 418 साल और उससे ज्यादा उम्र के एडल्ट में

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जीवन को कैसे असर डालती है

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) का असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है. इसके कुछ प्रकार गंभीर होते हैं, जो व्यक्ति का जीवन बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं. आमतौर पर जिन मामलों में इसके लक्षण बहुत कम उम्र में दिखाई देने लगते हैं, उनमें बीमारी का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है.

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स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) के कारण

ज्यादातर मामलों में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) SMN1 नामक जीन में बदलाव के कारण होती है. यह बदला हुआ जीन माता-पिता से बच्चे में आ सकता है. अक्सर माता-पिता स्वयं SMA से प्रभावित नहीं होते, बल्कि वे इस बदले हुए जीन के वाहक होते हैं. NHS के अनुसार,

  • 4 में से 1 (25%) संभावना है कि बच्चे को SMA होगा
  • 4 में से 2 (50%) संभावना है कि बच्चा उस बदले हुए जीन का वाहक होगा, लेकिन उसे SMA नहीं होगा
  • 4 में से 1 (25%) संभावना है कि बच्चे में न तो वह बदला हुआ जीन होगा और न ही उसे SMA होगा
  • SMA के कुछ दुर्लभ प्रकारों में बच्चे को यह बीमारी विरासत में मिलने की संभावना अलग हो सकती है. कुछ दुर्लभ प्रकार तो बिल्कुल भी आगे नहीं फैलते हैं.

कितने में आता है इसका इंजेक्शन?

कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी का एक इंजेक्शन आता है, जिसका काम शरीर में SMN1 जीन की कमी या खराबी को ठीक करने के काम आता है. इस इंजेक्शन को लेकर सबसे हैरानी की बात ये है कि इसकी कीमत भारत में लगभग ₹16 करोड़ से ₹17.5 करोड़ के बीच है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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SOURCE: NHS

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लेखक के बारे में

Azhar Naim

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अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.
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