धड़ एक, सिर दो… ओडिशा में पैदा हुआ ऐसा बच्चा; रिसर्च ने बताया- कब होता है ऐसा
Dicephalic parapagus: ओडिशा राज्य के कंधमाल जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने ऐसे बच्चे को जन्म दिया, जिसका धड़ तो एक है, लेकिन उसके पास सिर दो है. आइए जानते हैं क्या है ये दुर्लभ स्थिति और कैसे बच्चे जुड़े हुए पैदा हो जाते हैं?
जब एक शरीर के साथ जन्म लेते हैं दो सिर, क्या है यह दुर्लभ मेडिकल कंडीशन? (Image: Social Media/AI)
खबर की मुख्य बातें:
ओडिशा के कंधमाल जिले में एक बच्चा दो सिर के साथ पैदा हुआ है, जिसे ‘डाइसेफेलिस पैरापैगस’ कहा जाता है.
यह दुर्लभ स्थिति 3 लाख बच्चों में से 1 में होती है, जिसमें एक शरीर पर दो सिर होते हैं.
शिशु को ब्रह्मपुर के महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जन्म के बाद एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है.
जुड़े हुए जुड़वा बच्चों का पता गर्भावस्था के 8वें हफ्ते में हाई-रिजॉल्यूशन अल्ट्रासोनोग्राफी से लगाया जा सकता है.
ओडिशा राज्य के कंधमाल जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ऐसा दुर्लभ बच्चा पैदा हुआ है, जिसके एक नहीं बल्कि दो सिर हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रह्मपुर स्थित महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पैदा हुआ ये बच्चा जिंदा है और सांस ले रहा है, इस बच्चे की खबर सामने आने पर हर कोई हैरान है. आपको जानकार हैरानी होगी कि ऐसे मामले इतने दुर्लभ होते हैं कि, 3 लाख बच्चे में 1 मामला ऐसा पेश आता है. फिलहाल शिशु को एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है, जहां एक स्पेशल टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है. मेडिकल साइंस में इस दुर्लभ स्थिति को ‘डाइसेफेलिस पैरापैगस’ (Dicephalic parapagus) कहा जाता है. आइए जानते हैं क्या है ये स्थिति और कैसे एक शरीर में दो सिर जुड़ जाते हैं?
डाइसेफेलिस पैरापैगस एक ऐसी स्थिति है, जिससे पैदा हुए बच्चे का धड़ एक ही होता है, लेकिन उसे सिर 2 होते हैं, यानी की जुड़ा बच्चे आपस में जुड़े होते हैं. NIH के अनुसार, यह बेहद ही दुर्लभ स्थिति होती है, जो मोनोजाइगोटिक, मोनोएमनियोटिक ट्विनिंग में होने वाली असामान्यताओं के कारण बनते हैं. इस स्थिति को समझने के लिए आपको इसके दो सिद्धांतों को समझना होगा, जो इस प्रकार है;
फिशन थ्योरी (Fission Theory)- इस सिद्धांत के अनुसार, फर्टिलाइजेशन के 13-15 दिनों के बीच इनर सेल मास का अधूरा विभाजन होता और फ्यूजन थ्योरी (Fusion Theory) जिसके अनुसार भ्रूण शुरू में अलग-अलग विकसित होते हैं लेकिन बाद में शुरुआती भ्रूण अवस्था के दौरान आपस में जुड़ जाते हैं. इस थ्योरी को इस बात से समर्थन मिलती है कि जुड़े हुए भ्रूण आमतौर पर उन जगहों पर जुड़े होते हैं जहां सतह का एक्टोडर्म (surface ectoderm) नहीं होता है या जहां फ्यूजन (Disruption) होने के लिए पहले से प्रोग्रामिंग होती है. NIH के अनुसार, कुछ शोधकर्ताओं का तर्क है कि पैरापैगस (Parapagus) प्रकार को छोड़कर, सभी जुड़े हुए जुड़वां बच्चे फ्यूजन प्रक्रिया के माध्यम से बनते हैं.
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क्या जन्म से पहले पता लगाया जा सकता है?
NIH के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान जुड़े हुए जुड़वा (Conjoined Twins) का पता लगाने और उनसे जुड़ी असामान्यताओं की पहचान करने के लिए रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड सबसे भरोसेमंद तरीका रहा है. हाई-रिजॉल्यूशन अल्ट्रासोनोग्राफी से प्रेग्नेंसी के 8वें हफ्ते में ही जुड़े हुए जुड़वां बच्चों का पता लगाया जा सकता है, जिससे शुरुआती काउंसलिंग और भविष्य की योजना बना सकते हैं. हालांकि, एक बार इस स्थिति का पता चलने के बाद तीसरे महीने की शुरुआत में काउंसलिंग परिवारों को भविष्य की स्थिति (Prognosis) समझने और प्रेग्नेंसी खत्म करने (Termination) पर विचार करने में मदद करती है. यह खासकर उन मामलों में जरूरी है जहां बचने की संभावना कम होती है, जैसे कि डाइसेफालस पैरापैगस (Dicephalus Parapagus) जुड़वां बच्चे; ये अक्सर मृत पैदा होते हैं या जटिल कार्डियोपल्मोनरी असामान्यताओं के कारण जन्म के तुरंत बाद मर जाते हैं.
कानून के दायरे में रहकर हो सकता है गर्भपात
प्रेग्नेंसी खत्म करने को लेकर भारत में MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी / गर्भ का चिकित्सकीय समापन) कानून बना हुआ है, जिसके तहत कुछ हफ्तों के अंदर प्रेग्नेंसी खत्म की जा सकता है.
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नियमों के अनुसार, 20 हफ्ते तक: किसी भी महिला को गर्भावस्था के 20 सप्ताह तक गर्भपात कराने के लिए सिर्फ एक रजिस्टर्ड डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती है.
24 हफ्ते तक: विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए (जैसे बलात्कार या यौन उत्पीड़न की पीड़िता, नाबालिग, दिव्यांग महिलाएं, या गर्भावस्था के दौरान जिनकी वैवाहिक स्थिति बदल गई हो) यह सीमा 24 सप्ताह है, जिसके लिए दो डॉक्टरों की सलाह जरूरी होती है.
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24 हफ्ते बीत चुके हैं: तो यदि भ्रूण में कोई गंभीर और असाध्य शारीरिक या मानसिक विकलांगता (फेटल एनॉमली) पाई जाती है, तो राज्य स्तर पर गठित मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के बाद 24 सप्ताह के बाद भी गर्भपात (Abortion) कराया जा सकता है. कुल मिलाकर कानून के दायरे में रहकर ही गर्भपात (Abortion) जा सकता है.
बच्चों में जुड़ाव किस हद तक हो सकता है?
इस तरह के दुर्लभ मामले असल में बनते क्यों है क्या रिस्क फैक्टर्स हैं, इसको लेकर अभी भी रिसर्च चल रही है, लेकिन डाइसेफेलिस पैरापैगस की स्थिति में बच्चों में जुड़ाव अलग भी हो सकता है, जिसमें एक शरीर में दो सिर का होना, सिर का चिपका रहना, दो बच्चों के सीने आपस में जुड़े होना, पेट एक ही होना, जुड़वां बच्चे रीढ़ की हड्डी की लंबाई के साथ पीठ-से-पीठ जुड़े हों, आदि कई दुर्लभ स्थिति सामने आ सकती हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि बच्चे को अलग किया जा सकता है, तो यह अभी तक संभव नहीं हो सका है.