बच्चे क्यों हो जाते हैं कैंसर का शिकार? जानिए इसके संभावित कारण, लक्षण और देखभाल के जरूरी टिप्स
Childhood Cancer: आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि बच्चों में भी कैंसर का खतरा बना रहता है. इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि ये बीमारी कितनी खतरनाक है, इसका ट्रीटमेंट क्या-क्या है और बच्चों में कैंसर के लक्षण कैसे दिखते हैं?
बच्चों में इन कैंसरों का रहता है सबसे ज्यादा खतरा.(Image: AI/Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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WHO के अनुसार, कैंसर दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, जिससे 2018 में अनुमानित 96 लाख मौतें हुईं.
WHO के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल 0 से 19 साल की उम्र के लगभग 4,00,000 बच्चों और किशोरों को कैंसर होता है.
बच्चों में कैंसर के सबसे आम प्रकार ल्यूकेमिया, ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के ट्यूमर, और लिम्फोमा हैं.
कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है. इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसके शुरुआती लक्षण लोगों को दिखाई नहीं देते हैं, जिस कारण लोगों को मालूम ही नहीं, चलता है कि उनके शरीर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पनप रही है. अगर आप सोचते हैं कि कैंसर सिर्फ बड़े बुजुर्गों तो हो सकता है, तो आप गलत है, क्योंकि अब स्थिति इतनी गंभीर बन गई है कि बच्चे भी इस जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं. इस स स्टोरी में हम बच्चों में कैंसर के बारे में बताएंगे कि कैसे ये पैदा होती है, क्या कारण हो सकते हैं और कैंसर का पता लगने पर बच्चों की कैसे केयर करें?
बच्चों में कैंसर के बारे में जानने से पहले ये जानने भी जरूरी है कि आखिर कैंसर शरीर में आता कहां से है? WHO के मुताबिक, कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर के लगभग किसी भी अंग या टिशू में शुरू हो सकती है. इसमें शरीर की कुछ असामान्य कोशिकाएं कंट्रोल से बाहर होकर अनियमित तरीके से बढ़ने लगती हैं और आसपास के स्वस्थ टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकती हैं. कई बार ये कोशिकाएं शरीर के दूसरे अंगों तक भी फैल जाती हैं, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ता सकता है. WHO के आंकड़ों के अनुसार, कैंसर दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है; साल 2018 में इससे अनुमानित 96 लाख मौतें हुईं, यानी हर 6 में से 1 मौत कैंसर की वजह से हुई.
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बच्चों में भी कैंसर का खतरा
कैंसर को लेकर अक्सर कहा जाता है कि ये सिर्फ बड़े-बुजुर्गों को शिकार करता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है. WHO के मुताबिक, बच्चों और युवाओं में कैंसर मौत की प्रमुख वजहों में से एक है. इस बीमारी से ठीक होने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि बच्चा किस देश में रहता है. यानी की ज्यादा आय वाले देशों में कैंसर से पीड़ित 80 फीसदी से ज्यादा बच्चे इलाज के बाद ठीक हो जाते हैं, जबकि कई कम और मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा 30 फीसदी से भी कम है. बच्चों में कैंसर को आमतौर पर रोका या स्क्रीनिंग से पहचाना नहीं जा सकता, लेकिन ज्यादातर मामलों में दवाओं, सर्जरी और रेडियोथेरेपी से इलाज संभव है. WHO के अनुसार, हर साल, 0 से 19 साल की उम्र के लगभग 4,00,000 बच्चों और किशोरों को कैंसर हो जाता है, जिससे आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं ये बीमारी बच्चों को भी अपना शिकार बना सकती है.
किन कारणों से बच्चों के बीच पनपता है कैंसर?
WHO के अनुसार, बच्चों में कैंसर का खतरे के पीछे कई कारण हो सकते हैं, इसमें;
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बच्चों में कैंसर के कारण: वयस्कों के मुकाबले बच्चों में होने वाले ज्यादातर कैंसर के स्पष्ट कारण अब तक पता नहीं हैं. शोध के अनुसार, बच्चों में कैंसर के बहुत कम मामले पर्यावरण या लाइफस्टाइल से जुड़े कारण होते हैं.
कुछ संक्रमण भी हैं जोखिम की वजह: HIV, एपस्टीन-बार वायरस (Epstein-Barr virus) और मलेरिया जैसे कुछ पुराने संक्रमण बच्चों में कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं.
जेनेटिक भी वजह: WHO के आंकड़ों के अनुसार, कैंसर से पीड़ित लगभग 10% बच्चों में आनुवंशिक यानी जेनेटिक कारणों से इस बीमारी का खतरा ज्यादा हो सकता है.
अभी और शोध की जरूरत: बच्चों में कैंसर क्यों होता है, इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं.
बच्चों में कौन से कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है
NIH के अनुसार, 0 से 14 साल की उम्र के बच्चों में सबसे आम तरह के कैंसर ल्यूकेमिया, ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) के अन्य ट्यूमर और लिम्फोमा हैं. वक्त रहते कैंसर की पहचान, बच्चे की जिंदगी बचा सकती है, वहीं इसमें जरा सी लापरवाही बड़ी खतरे में उसे डाल सकती है.
बच्चों में कैसे दिखते हैं कैंसर के लक्षण?
बच्चों में कैंसर के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. Cancer Research UK के मुताबिक, नीचे दिए गए लक्षण आमतौर पर कैंसर की वजह से नहीं होते, लेकिन अगर बच्चे में इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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बच्चा पेशाब न कर पा रहा हो या पेशाब में खून आ रहा हो.
शरीर के किसी भी हिस्से में बिना किसी स्पष्ट वजह के गांठ, सूजन या कठोर पन महसूस होना.
पेट में लगातार दर्द रहना या सूजन कम न होना.
दर्द लंबे समय तक बना रहना या रात में दर्द के कारण नींद खुलना.
बिना किसी स्पष्ट वजह के दौरे आना या बच्चे के व्यवहार और मूड में बदलाव होना.
सिरदर्द का लंबे समय तक बने रहना.
त्वचा का असामान्य रूप से पीला या फीका दिखना.
बच्चा हर समय थका हुआ या कमजोर महसूस करे.
बार-बार इन्फेक्शन होना या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देना.
बिना किसी स्पष्ट वजह के बार-बार उल्टी आना.
बिना कारण तेज बुखार आना या बहुत ज्यादा पसीना आना.
बच्चे को सांस फूलने या सांस लेने में तकलीफ होना.
बिना किसी स्पष्ट वजह के बच्चे का वजन कम होना.
त्वचा पर छोटे-छोटे लाल या बैंगनी धब्बे दिखना.
क्या बच्चों में कैंसर इलाज हो सकता है?
NIH के अनुसार, कैंसर के इलाज के कई तरीके हैं, कुछ कैंसर मरीजों का इलाज सिर्फ एक ही तरीके से होता है, लेकिन ज्यादातर लोगों का इलाज कई तरीकों को मिलाकर किया जाता है, जैसे सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी शामिल है. आपका इलाज किस तरह से होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह का कैंसर है और वह कितना बढ़ चुका है.
कितने प्रकार के होते हैं कैंसर ट्रीटमेंट
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कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
कीमोथेरेपी कैंसर और तेजी से बढ़ने वाली दूसरी कोशिकाओं को मारकर या उनकी बढ़त को रोकने का काम करती है, ताकि कैंसर का खतरा कम हो.
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हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy)
हार्मोन थेरेपी एक ऐसा इलाज है जो ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की बढ़त को धीमा या बंद कर देता है, जब कैंसर कोशिकाएं बढ़ने के लिए हार्मोन पर निर्भर होती हैं.
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हाइपरथर्मिया (Hyperthermia)
इस तरीके में शरीर के टिशू को गर्म किया जाता है, ताकि कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाया जा सके और उन्हें नष्ट करने में मदद मिले.
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इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)
इस इलाज में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद दी जाती है.
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फोटोडायनेमिक थेरेपी (Photodynamic Therapy)
इसमें एक खास दवा का इस्तेमाल किया जाता है, जो रोशनी के संपर्क में आने पर एक्टिव होकर कैंसर और दूसरी असामान्य कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है.
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रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)
इस इलाज में रेडिएशन को बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है और ट्यूमर का आकार घटाने में मदद मिलती है.
कीमोथेरेपी या रेडिएशन की ज्यादा खुराक से खून बनाने वाली स्टेम कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने के बाद, इस प्रक्रिया से उन्हें दोबारा बहाल करने में मदद मिलती है.
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सर्जरी (Cancer Surgery)
इस तरीके में सर्जन ऑपरेशन करके शरीर से कैंसर वाले हिस्से या ट्यूमर को निकालते हैं.
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टारगेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)
इस इलाज में कैंसर कोशिकाओं के उन खास बदलावों को निशाना बनाया जाता है, जो उन्हें बढ़ने, विभाजित होने और शरीर में फैलने में मदद करते हैं.
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बच्चे की कैसे रखें ख्याल?
WHO के मुताबिक, कैंसर से पीड़ित बच्चों की देखभाल में पैलिएटिव केयर (Palliative Care) की अहम भूमिका होती है. इसका मकसद बीमारी के लक्षणों और दर्द को कम करना और बच्चे के साथ-साथ उसके परिवार की जिंदगी को बेहतर बनाना है. हर बच्चे का कैंसर ठीक हो पाना संभव नहीं होता, लेकिन उसकी तकलीफ को कम करने में मदद की जा सकती है. यह देखभाल बीमारी का पता चलने के साथ ही शुरू की जा सकती है और इलाज के दौरान भी जारी रहती है. इसमें घर पर देखभाल, मानसिक और भावनात्मक सहारा देने के साथ जरूरत के अनुसार दर्द कम करने वाली दवाएं भी शामिल होती हैं.