कैंसर एक खतरनाक बीमारी है, जिसका इलाज सिर्फ कुछ मामलों में किया जा सकता है. अगर ध्यान न दिया जाए तो कैंसर दोबारा वापस आ सकता है और इंसान को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है. सर्वाइकल कैंसर भी महिलाओं को होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षणों को नॉर्मल समझकर नजरअंदाज किया जाता है. हालांकि, शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते और महिलाओं को इसका पता काफी देर से चलता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर के केस लगभग ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के लगातार बने रहने की वजह से सामने आते हैं. बता दें कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस को एचपीवी इंफेक्शन के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान स्किन और बॉडी में कई तरह के बदलाव नजर आते हैं.
क्या है सर्वाइकल कैंसर?
सर्वाइकल कैंसर बच्चेदानी के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होने वाला कैंसर है. सर्विक्स बच्चेदानी को योनि से जोड़ता है. इस कैंसर का कारण हाई-रिस्क एचपीवी इंफेक्शन है. ज्यादातर एचपीवी इंफेक्शन अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार इंफेक्शन लंबे समय तक बना रहता है और कई तरह के बदलाव पैदा कर देता है. इससे सर्वाइकल कैंसर बनकर महिलाओं को परेशान करने लगता है.
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण
WHO और अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिसर्च के मुताबिक, शुरुआती दौर में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण नजर नहीं भी आ सकते हैं. हालांकि, कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना- अगर आपको दो पीरियड्स के बीच अचानक ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होने लगे तो इसे नॉर्मल समझकर नजरअंदाज न करें. यह समस्या हार्मोनल बदलाव होने की वजह से भी हो सकता है, लेकिन बार-बार ऐसा होने पर डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए.
शारीरिक संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग होना- ऐसा होना नॉर्मल नहीं हो सकता है. अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है और योनि से खून आ रहा है तो सर्वाइकल कैंसर होने का संकेत हो सकता है. इसके पीछे दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जिसके बारे में पता डॉक्टर से बात करते ही चलेगा.
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होना- मेनोपॉज यानी पीरियड्स पूरी तरह बंद होने के बाद अगर योनि से खून आता है तो इसे नॉर्मल न समझें. ऐसा कई कारणों से हो सकता है, लेकिन पहला कारण सर्वाइकल कैंसर होता है.
इन लक्षणों को महिलाएं क्यों कर देती हैं इग्नोर?
कई बार महिलाएं ब्लीडिंग को हार्मोनल चेंजेस या पीरियड्स की गड़बड़ी समझ लेती हैं. वहीं, डिस्चार्ज को नॉर्मल इंफेक्शन मानकर खुद से दवा लेने लगती हैं. कुछ महिलाएं शर्म, झिझक या समय की कमी के कारण भी डॉक्टर के पास नहीं जाती हैं. यही वजह है कि शरीर में होने वाले बदलावों को समझना और वक्त पर इलाज करना भी जरूरी है.