Voice Changing: सर्दी-जुकाम या गले में संक्रमण होने पर कुछ दिनों के लिए आवाज बैठ जाना आम बात है. ज्यादातर मामलों में यह समस्या अपने आप ठीक भी हो जाती है. लेकिन अगर आपकी आवाज लगातार 2 से 3 सप्ताह तक भारी बनी रहे या पहले जैसी न लगे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार यह वॉयस बॉक्स यानी लैरिंक्स से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. खासकर धूम्रपान (Smoke) करने वालों को इस तरह के लक्षणों पर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है. आकाश हेल्थकेयर के सीनियर कंसल्टेंट और ENT डॉ. अभिनीत कुमार ने बताया आपको कब सतर्क हो जाना चाहिए.

2 से 3 हफ्तों तक आवाज बदली हुई सुनाई देना

वॉयस बॉक्स हमारे गले का वह हिस्सा है जहां वोकल कॉर्ड्स मौजूद होते हैं. बोलते समय इन्हीं वोकल कॉर्ड्स में कंपन पैदा होता है जिससे आवाज निकलती है. सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का धुआं सीधे इन संवेदनशील ऊतकों को प्रभावित करता है. लंबे समय तक धूम्रपान करने से वोकल कॉर्ड्स में लगातार जलन और सूजन बनी रह सकती है जिससे आवाज में बदलाव आने लगता है. डॉ. अभिनीत कुमार बताते हैं कि कई लोग महीनों तक आवाज बैठने की समस्या को नजरअंदाज करते रहते हैं. उन्हें लगता है कि यह मौसम या गले की सामान्य परेशानी है. लेकिन अगर आवाज 2 सप्ताह से ज्यादा समय तक बदली हुई रहे तो इसकी जांच जरूर करानी चाहिए. विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों को इस मामले में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.

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धूम्रपान और आवाज का क्या संबंध है

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विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू का सेवन केवल आवाज को खराब नहीं करता बल्कि वॉयस बॉक्स कैंसर का जोखिम भी बढ़ाता है. धुएं में मौजूद कई रसायन गले की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. लगातार संपर्क में रहने पर ये कोशिकाएं असामान्य रूप से बदलने लगती हैं जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं.

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इन लक्षणों पर भी दें ध्यान

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आवाज बैठने के अलावा कुछ अन्य लक्षण भी हैं जिनपर ध्यान देना जरूरी है. यदि गले में लगातार दर्द बना रहे, निगलने में परेशानी हो, बोलते समय दर्द महसूस हो, लगातार खांसी आए, खांसी में खून दिखाई दे या गर्दन में गांठ महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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डॉ. कुमार बताते हैं, वॉयस बॉक्स कैंसर की एक अच्छी बात यह है कि इसके शुरुआती संकेत अपेक्षाकृत जल्दी सामने आ जाते हैं. आवाज में बदलाव अक्सर सबसे पहला लक्षण होता है. यदि मरीज समय रहते डॉक्टर के पास पहुंच जाए तो बीमारी का पता शुरुआती चरण में लग सकता है और इलाज के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.
इन लोगों को भी है खतरा

डॉक्टर यह भी बताते हैं कि सिर्फ धूम्रपान करने वाले ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है. इसके अलावा शराब का अत्यधिक सेवन करने वालों में भी जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि हर बार आवाज बैठने का मतलब कैंसर नहीं होता. कई बार वायरल संक्रमण, एलर्जी, एसिड रिफ्लक्स या आवाज का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी इसकी वजह हो सकता है. लेकिन, जब समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो जांच करवाना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है. इससे बीमारी की आशंका को कम किया जा सकता है.

इस तरह करें बचाव

अपने वॉइस बॉक्स यानी आवाज को ठीक रखने के लिए धूम्रपान करना छोड़ें, गले को आराम दें, पानी पिएं और नियमित रूप से जांच करवाएं जिससे किसी भी दिक्कत को पनपने से पहले ही दूर किया जा सके.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.