चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन… AIIMS के डॉक्टर ने बताए स्ट्रोक के लक्षण, कहा समय रहते बचाई जा सकती है जान

Stroke Symptoms: एम्स, नई दिल्ली के न्यूरोसाइंस सेंटर के प्रमुख डॉ. शैलेश बी. गायकवाड़ बता रहे हैं स्ट्रोक आने पर कैसे लक्षण दिखते हैं और किस तरह समय रहते सावधानी बरतने पर स्ट्रोक से बचा जा सकता है. डॉक्टर ने यह भी बताया है कि लक्षण दिखने पर मरीज को क्या करना चाहिए.

Stroke Symptoms AIIMS

ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण क्या हैं? Image Credits - AI

Stroke Early Signs: स्ट्रोक को ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) या मस्तिष्काघात कहते हैं. यह एक इमरजैंसी की स्थिति है जिसमें तुरंत इलाज ना मिलने पर व्यक्ति उम्रभर के लिए दिव्यांग हो सकता है या उसकी तुरंत जान भी जा सकती है. ऐसे में स्ट्रोक के बारे में जानकारी होना और समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना जरूरी होता है. इसी बारे में बताते हुए AIIMS के ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट शेयर किया गया है जिसमें AIIMS, नई दिल्ली के न्यूरोसाइंस सेंटर के प्रमुख डॉ. शैलेश बी. गायकवाड़ ने बताया है कि स्ट्रोक के लक्षण किस तरह पहचाने जा सकते हैं. डॉ. गायकवाड़ का कहना है कि स्ट्रोक को सही समय पर पहचान लिया जाए और मरीज को अस्पताल ले जाया जाए तो मस्तिष्क को होने वाले स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है.

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स्ट्रोक के लक्षण कैसे पहचानें

स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए F.A.S.T नियम को याद रखना जरूरी है –

F (Face) – स्ट्रोक आने पर चेहरा टेढ़ा होने लगता है

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A (Arm) – हाथ-पैरों में अचानक कमजोरी या सुन्नपन्न होने लगता है

S (Speech) – बोली लड़खड़ाने लगती है या समझने में परेशानी होती है

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T (Time) – बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है.

अगर शरीर में स्ट्रोक के ये लक्षण (Stroke Symptoms) नजर आते हैं, चेहरा एक तरफ झुकने लगता है, एक हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन महसूस होता है या कमजोरी होती है और बोलने में दिक्कत होती है तो बिना देरी किए एंबुलेंस बुलाना या अस्पताल पहुंचना जरूरी है. अचानक नजर कमजोर होना, तेज सिरदर्द होना और संतुलन बिगड़ना भी स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है. इस बात का ध्यान रखें कि मरीज खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल ना जाए. बिना डॉक्टर की सलाह के मरीज को किसी तरह की दवा भी नहीं दी जानी चाहिए.

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कब आता है स्ट्रोक

डॉक्टर के अनुसार, जब मस्तिष्क तक खून पहुंचाने वाली नस में खून का थक्का जमने लगता है और रक्त प्रवाह रुक जाता है तो नस फटने से स्ट्रोक आ सकता है.

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किन लोगों को आ सकता है स्ट्रोक

जिन लोगों का हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) कंट्रोल ना किया जाए उनमें स्ट्रोक आने का जोखिम रहता है. इसके अलावा, डायबिटीज, हाई कॉलेस्ट्रोल, दिल की धड़कन का अनियमित होना, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, मोटापा, शारीरिक एक्टिविटी का कम होना और खानपान का अंसुलित होना स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाता है.

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क्या स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को आता है

नहीं, स्ट्रोक केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है बल्कि किसी भी उम्र में स्ट्रोक आ सकता है. खासकर जिन लोगों में स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर्स नजर आने लगते हैं उन्हें डॉक्टर से नियमित जांच करवानी चाहिए.

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कैसे होता है स्ट्रोक का इलाज

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर या स्ट्रोक आने पर मरीज को अस्पताल लेकर जाया जाता है तो अस्पताल में सीटी/एमआरआई और रक्त वाहिका की जांच से स्ट्रोक आने की वजह की जांच की जाती है. देखा जाता है कि स्ट्रोक खून का थक्का (Blood Clot) जमने से आया है या फिर रक्तस्त्राव की वजह से. कुछ चुनिंदा इस्केमिक स्ट्रोक मरीजों को साढ़े चार घंटे की समय-सीमा में नस के जरिए थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है.

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मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी – अगर बड़ी रक्तवाहिका में थक्का जमा हो तो मरीज की मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की जाती है. मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी में कैथेटर के जरिए रक्त वाहिका तक पहुंचकर थक्के को निकाला जाता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source - AIIMS

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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