अगर 3 हफ्ते से ज्यादा दिखें ये 2 लक्षण तो तुरंत कराएं जांच, कैंसर स्पेशलिस्ट ने बताया गले के कैंसर का हो सकता है साइन

Throat Cancer Symptoms: गले में कैंसर होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं और समय रहते इन लक्षणों की पहचान कैसे की जाती है, जानिए यहां. ओनकोसर्जन डॉ. अमित चक्रबर्ती ने बताया अगर 3 हफ्ते से ज्यादा ये 3 लक्षण नजर आते हैं तो गले के कैंसर की जांच करवाना जरूरी है.

Gale Ke Cancer Ke Lakshan

आपको गले के कैंसर का संदेह कब करना चाहिए?

Gale Ke Cancer Ke Lakshan: हर समय आवाज का भारी होना या गले में दर्द होना गले के कैंसर का लक्षण नहीं होता है. लेकिन, जो लक्षण लगातार बने रहते हैं वो गले के कैंसर (Throat Cancer) का संकेत हो सकते हैं. अगर आपको गले की तकलीफ कई दिनों से बनी हुई है तो डॉक्टर से तुरंत जांच करवाना जरूरी है. जानिए कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. अमित चक्रबर्ती के अनुसार कौन से 2 लक्षण 3 हफ्तों से ज्यादा दिखने का मतलब यह हो सकता है कि आपको गले का कैंसर हो गया है. डॉक्टर की सलाह है कि लक्षण लेकर बैठे रहने के बजाय तुरंत जांच कराएं और समस्या की जड़ तक पहुंचें.

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गले के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं | Throat Cancer Early Symptoms

ओनकोलॉजिस्ट डॉ. अमित चक्रबर्ती ने अपने यूट्यूब चैनल से वीडियो शेयर करके बताया है कि गले के कैंसर के सबसे बड़े 2 लक्षण कौन से हैं. डॉक्टर ने बताया कि अगर आपकी आवाज में बदलाव आ गया है और आपको खाना खाने में दिक्कत होने लगी है और 3 हफ्तों से आपको ये 2 दिक्कतें हो रही हैं तो यह गले के कैंसर का लक्षण हो सकता है. ऐसे में तुरंत ENT या कैंसर स्पेशलिस्ट (Cancer Specialist) से मिलें. वे स्कैन और एंडोस्कॉपी करेंगे जिससे पता चलेगा कि गले का कैंसर है या नहीं.

इसके अलावा कुछ और भी लक्षण हैं जो गले के कैंसर का संकेत हो सकते हैं –

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  • कान में दर्द
  • गला खराब होना
  • गले में गांठ महसूस होना
  • कुछ भी निगलने में तकलीफ होना
  • आवाज बदल जाना या कुछ बोलने में दिक्कत आना
  • बिना किसी वजह के वजन कम होने लगना
  • खांसी आना
  • खांसी के साथ खून आना
  • सांस फूलना
  • गले में सूजन होना
  • ऐसा महसूस होना जैसे गले में कुछ अटका हुआ है

किन लोगों को हो सकता है गले का कैंसर

तंबाकु खाने वालों को या धुम्रपान करने वालों में गले के कैंसर का रिस्क ज्यादा होता है. जो लोग जरूरत से ज्यादा शराब पीते हैं उन्हें यह कैंसर हो सकता है. वायरल इंफेक्शंस जैसे HPV या एप्सटीन बार वायरस इस कैंसर की वजह बन सकता है. जिन लोगों की डाइट अच्छी नहीं होती, जिन्हें गैस्ट्रोफीगल रिफ्लक्स डिजीज (Gerd) या पेट की समस्याएं रहती हैं और जो लोग काम की जगह पर टॉक्सिक सब्सटेंस की चपेट में आते हैं वे गले के कैंसर का शिकार हो सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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