Kidney Cancer Ke lakshan: किडनी या रेनल पेल्विस कैंसर ऐसी बीमारी है जिसमें किडनी की सेल्स आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती हैं. इसे रीलन सेल कैंसर भी कहते हैं. शरीर में 2 किडनी होती हैं जो शरीर के दोनों तरफ होती हैं. यह पेट और लिवर के पीछे होती हैं और पेशाब बनाती हैं जिसके जरिए शरीर का गंदा लिक्विड बाहर निकलता है. किडनी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल और रेड ब्लड सेल्स बनाने के लिए बोन मेरो को स्टिम्यूलेट भी करती है. ऐसे में अगर किडनी का कैंसर हो जाए तो किडनी के काम करने की क्षमता कम होने लगती है और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन, यूएस के डाटा के अनुसार किडनी का कैंसर होने पर शरीर पर कुछ लक्षण (Kidney Cancer Symptoms) नजर आ सकते हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
किडनी कैंसर होने पर कैसे लक्षण दिखते हैं
किडनी का कैंसर होने पर मरीज के शरीर में इनमें से एक या उससे ज्यादा लक्षण दिख सकते हैं. ये लक्षण किसी आम दिक्कत के चलते भी हो सकते हैं इसीलिए अटकलें लगाने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना और जांच करवाना जरूरी है.
- पेशाब में खून नजर आना
- अक्सर ही थका हुआ महसूस होना
- किडनी या पेट के आस-पास के हिस्से में सूजन और दर्द रहना
- बुखार होना जो ठीक होकर वापस आता रहता है
- कुछ खाने का मन ना करना
- बिना किसी कारण के वजन कम होना
- ऐसा महसूस होना कि कुछ आंतों में अटक रहा है
- सेहत का खराब महसूस होना.
किन लोगों में किडनी के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है
किडनी और रीनल पेल्विस कैंसर का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जो ओवरवेट होते हैं, मोटापे से परेशान होते हैं, धूम्रपान करते हैं, जिनका ब्लड प्रेशर हाई होता है या फिर हाई ब्लड प्रेशर की दवा से ऐसा होता है क्योंकि कारण स्पष्ट नहीं है, कुछ दवाओं को लंबे समय तक लेना, हेपेटाइटिस सी का लंबे समय से संक्रमण रहना और लंबे समय से पथरी की दिक्कत रहना.
किडनी के कैंसर से कैसे बचा जा सकता है
किडनी के कैंसर का खतरा कम करने के लिए हेल्दी वेट मैनेज करना जरूरी है, अच्छी डाइट और फिजिकली एक्टिव रहकर किडनी की दिक्कतों से बचा जा सकता है. इसके साथ ही, धूम्रपान ना करना जरूरी है. काम के दौरान इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स से बचकर रहने पर ध्यान देना जरूरी है.
किडनी की दूसरी बीमारियां कौन सी हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, किडनी की बीमारियों को 2 भागों में बांटा जाता है, एक अक्यूट किडनी डिजीज और दूसरा क्रोनिक किडनी डिजीज. इन किडनी की बीमारियों में अक्सर ही लक्षण बाद की स्टेज में नजर आते हैं इसीलिए रेग्यूलर टेस्टिंग जरूरी होती है. एडवांस या गंभीर किडनी डिजीज में थकान, सांस फूलना, शरीर पर खुजली होना, पैरों में सूजन आना, मसल्स में अकड़न होना, उल्टी आना या जी मिचलाना लक्षणों में शामिल होता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.