यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी एक आम समस्या है, लेकिन पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं में इसका खतरा काफी ज्यादा देखा जाता है. इसमें पेशाब करते समय जलन, बार-बार यूरिन आने की इच्छा, पेशाब करते समय दर्द और कभी-कभी यूरिन में खून जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इसको लेकर अपोलो डॉक्टर का कहना है कि अगर इंफेक्शन बढ़ जाए तो बुखार, ठंड लगना, कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द और उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है. आखिर महिलाओं को UTI ज्यादा क्यों होता है? इसके पीछे सिर्फ साफ-सफाई की कमी जिम्मेदार नहीं है, बल्कि महिलाओं के शरीर की बनावट और कुछ हार्मोनल व लाइफस्टाइल से जुड़ी चीजें भी जरूरी है.
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महिलाओं को UTI ज्यादा होने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
महिलाओं की यूरेथ्रा यानी जिस नली से पेशाब शरीर से बाहर निकलता है, वह पुरुषों की तुलना में छोटी होती है. इसके अलावा, इसका मुंह योनि के काफी करीब होता है. आंतों में मौजूद जैसे बैक्टीरिया आसानी से यूरेथ्रा तक पहुंचकर ब्लैडर में जा सकते हैं और इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं.
सेक्सुअल एक्टिविटी से भी बढ़ सकता है खतरा
सेक्स के दौरान आसपास मौजूद बैक्टीरिया यूरेथ्रा तक पहुंच सकते हैं। इसी कारण कुछ महिलाओं को सेक्सुअल एक्टिविटी के बाद बार-बार यूटीआई की समस्या हो सकती है. कुछ दवा खाकर या हाइजीन का ध्यान न रखा जाए तो ऐसा इंफेक्शन हो सकता है.
प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है UTI का खतरा?
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं. बढ़ता हुआ ब्लैडर पर दबाव डाल सकता है, जिससे कुछ महिलाओं में ब्लैडर पूरी तरह खाली करना मुश्किल हो सकता है. ब्लैडर में बचा हुआ यूरिन बैक्टीरिया के बढ़ने का मौका दे सकता है. प्रेग्नेंसी के दौरान यूटीआई के लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
मेनोपॉज के बाद भी बढ़ सकता है खतरा
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से योनि और आसपास के टिश्यू में बदलाव और ड्राईनेस हो सकती है. इससे यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया जा सकते हैं और यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है.
डायबिटीज जैसी बीमारी का भी खतरा
डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में भी यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा, किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन, पेशाब का पूरी तरह बाहर न निकल पाना और यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी तरह की रुकावट जैसी चीजें भी इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है.
यूटीआई के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आपको इनमें से कोई लक्षण लगातार महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
- पेशाब करते समय जलन या दर्द होना
- बार-बार पेशाब आना
- थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पेशाब आना
- यूरिन में खून दिखाई देना
- यूरिन का रंग या बदबू आना
- पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
यूटीआई से बचने के लिए क्या करें?
अपोलो हॉस्पिटल के मुताबिक, यूटीआई का खतरा कम करने के लिए पानी पीना, पेशाब को लंबे समय तक न रोकना और इंटिमेट एरिया की साफ-सफाई का ध्यान रखना मददगार हो सकता है. सेक्सुअल एक्टिविटी के बाद पेशाब करना भी कुछ महिलाओं में इंफेक्शन के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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Source- Apollo
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