अक्सर हम अपनी डेली रूटीन में यह देखते हैं कि ठीक से खाना खाने के बावजूद पेट भारी रहता है, गैस बनती है या बार-बार एसिडिटी परेशान करती है. कई लोग सोचते हैं कि शायद खाना सही नहीं था, लेकिन असल वजह खाने का गलत कॉम्बिनेशन होता है. आयुर्वेद मानता है कि सिर्फ पौष्टिक भोजन ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे सही चीजों के साथ और सही समय पर खाना भी जरूरी है, वरना ये आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है.
हर इंसान का पाचन तंत्र अलग होता है और अगर बार-बार कोई फूड कॉम्बिनेशन आपको नुकसान पहुंचा रहा है, तो उसे नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है. इस स्टोरी में हम कुछ ऐसे ही आम फूड कॉम्बिनेशन के बारे में बताएंगे, जिसे अक्सर लोग डेली खाते है जिसके बाद उन्हें पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
केला आमतौर पर हेल्दी फल माना जाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह भारी होता है और पोहा हल्का और जल्दी पचने वाला अनाज है. जब दोनों को एक साथ खाया जाता है, तो उनकी अलग-अलग पाचन गति पेट की पाचन अग्नि को भ्रमित कर देती है. इसका नतीजा यह होता है कि पेट में गैस, सुस्ती, भारीपन और कभी-कभी कब्ज जैसी परेशानी शुरू हो जाती है. बेहतर यही है कि केला अकेले खाएं.
राजमा पहले से ही एक भारी दाल मानी जाती है, जिसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. वहीं दही एक फर्मेंटेड फूड है, जिसकी तासीर अलग होती है. जब दही और राजमा को एक साथ खाया जाता है, तो पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और शरीर में आम यानी विषैले तत्व बनने लगते हैं. इससे गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और अपच की समस्या हो सकती है. अगर राजमा खा रहे हैं, तो उसमें जीरा, हींग और अदरक जैसे पाचक मसालों का इस्तेमाल करें और दही को अलग समय पर लें.
बहुत से लोग वजन घटाने या डिटॉक्स के नाम पर सुबह गर्म नींबू पानी में शहद मिलाकर पीते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसे गलत मानता है. शहद को गर्म करने से उसकी प्राकृतिक गुणवत्ता बदल जाती है और यह पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकता है. गर्म नींबू पानी में शहद मिलाने से जलन, गैस और एसिडिटी हो सकती है. बेहतर विकल्प यह है कि शहद को गुनगुने पानी के साथ लें या फिर सिर्फ नींबू पानी पिएं, लेकिन दोनों को साथ मिलाने से बचें.