Testicular Cancer Ke Lakshan: हर पुरुष के शरीर में 2 टेस्टिकल्स होते हैं. ये टेस्टिकल्स पुरुषों के जननांग का हिस्सा हैं. इन टेस्टिकल्स में कैंसर की ग्रोथ होने लगती है तो इसे टेस्टिकुलर कैंसर कहते हैं. टेस्टिकल्स में होने वाला सबसे कॉमन कैंसर जर्मसेल कैंसर है. जर्मसेल कैंसर सबसे ज्यादा इलाज योग्य कैंसर भी है. इसके अलावा, कार्सिनोमा और लिम्फोमा कैंसर भी टेस्टिकल्स में हो सकते हैं लेकिन जर्मसेल कैंसर सबसे कॉमन है. ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सचिन गुप्ता ने यूट्यूब चैनल से पोस्ट हुए वीडियो में बताया है कि टेस्टिकुलर कैंसर क्या है, इसके लक्षण (Testicular Cancer Symptoms) कैसे दिखते हैं और किस तरह इसका ट्रीटमेंट होता है.

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टेस्टिकुलर कैंसर के क्या लक्षण होते हैं

  • एक या दोनों अंडकोष में सूजन होना और टेस्टिकल्स का आकार बढ़ जान टेस्टिकुलर कैंसर का लक्षण हो सकता है. सूजन होने पर भी अंडकोष में ज्यादातर दर्द महसूस नहीं होता है, दिक्कत बढ़ते जाने पर दर्द शुरू होने लगता है.
  • ग्रॉइन्स में एक अजीब सी ड्रैगिंग सनसेशन और भारीपन महसूस होता है.
  • अगर कैंसर शरीर के बाकी हिस्सों में फैलने लगा है तो इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. अगर पेट तक कैंसर पहुंच गया है तो पेट में दर्द होने लगता है या कब्ज हो सकती है.
  • अगर कैंसर फेफड़ों तक फैल गया है तो इससे खांसी और सांस फूलने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं.

टेस्टिकुलर कैंसर का पता कैसे चलता है

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टेस्टिकुलर कैंसर हुआ है या नहीं यह पता लगाने के लिए कैंसर स्पेशलिस्ट, सर्जन या एक्सपर्ट जांच कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले मरीज की जांच की जाती है, टेस्टिकुलर सूजन को देखा जाता है और उसके बाद जरूरी ब्लड टेस्ट और स्कैन किए जाते हैं. ट्यूमर मार्कर टेस्ट जैसे अल्फा फीटोप्रोटीन या BETA-HCG LDH किया जा सकता है. अगर मार्कर हाई हों तो टेस्टिकुलर कैंसर की पुष्टि होती है. इसके बाद अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन या PET Scan किया जा सकता है जिससे पता चलता है कि कैंसर टेस्टिकल्स से निकलकर शरीर के किन-किन हिस्सों तक पहुंच चुका है.

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टेस्टिकुलर कैंसर का इलाज कैसे होता है

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टेस्टिकुलर कैंसर का इलाज (Testicular Cancer Treatment) इसकी स्टेज पर निर्भर करता है. अगर टेस्टिकल्स पर सूजन है तो सबसे पहले मरीज की हाई इंजुइनल ऑर्किटोमी सर्जरी होती है. इससे कैंसर वाले टेस्टिकल्स और कोर्ड को निकाला जाता है और सैंपल को टेस्ट के लिए भेजा जाता है. लैब में पता किया जाता है कि कैंसर किस स्टेज पर है.

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कैंसर की स्टेज का पता चलने के बाद निर्णय लिया जाता है कि आगे इलाज का क्या तरीका अपनाना है. कीमोथेरेपी करनी है या रेडिएशन यह तरह किया जाता है. अगर कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक या लिम्फ नोड्स तक फैल चुका होता है तो 2 से 4 महीनों तक कीमोथेरेपी चलती है. ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद कुछ महीनों तक मरीजों का टेस्ट किया जाता है. डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर मरीज टेस्टिकुलर कैंसर के इलाज (Cancer Ka Ilaj) से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं.

जिंदगी पर क्या पड़ता है प्रभाव

डॉक्टर बताते हैं कि कैंसर की सर्जरी और थेरेपी के बाद मरीज पहले जैसी जिंदगी ही जी सकते हैं. क्वालिटी ऑफ लाइफ पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है. मरीजों की शादीशुदा जिंदगी भी अच्छी रहती है. इस कैंसर ट्रीटमेंट के बाद आमतौर पर कुछ खास साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं और अगर होते भी हैं तो उन्हें मैनेज किया जा सकता है. डॉक्टर का कहना है कि जितनी जल्दी टेस्टिकुलर कैंसर का पता लगा लिया जाए उतना अच्छा है. इसीलिए अगर अंडकोष पर सूजन हो जाती है या किसी तरह की गांठ बनती है तो इसे इग्नोर ना करें और डॉक्टर से जांच जरूर कराएं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.