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डायबिटीज को लेकर स्टडी की रिपोर्ट आई सामने, 10 साल तक शुगर फ्री खाने वालों को बीमारी होने का 31% ज्यादा खतरा

Diabetes Risk: कुछ लोग डायबिटीज से बचने के लिए शुगर फ्री चीजें लेते हैं तो उन्हें यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए. एक रिसर्च बताती है कि इससे खतरा 31% बढ़ जाता है.

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मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है असर. Image Credit- Freepik

आजकल लोग शुगर जैसी बीमारी से बचने के लिए शुगर फ्री चीजों का इस्तेमाल करते हैं. कई बार वजन बढ़ने के डर से लोग मीठा ही खाना छोड़ देते हैं. इसके बजाय डाइट में शुगर फ्री चीजों का सेवन करते हैं, क्योंकि लोगों को लगता है कि इससे वजन नहीं बढ़ता. मगर ऐसा नहीं है क्योंकि इसको लेकर फ्रंटियर्स ऑफ न्यूट्रिशन जर्नल में छपी रिसर्च बताती है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर खाने वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा लगभग 31% तक बढ़ जाता है. इसलिए सिर्फ कैलोरी कम या हेल्दी ऑप्शन को समझकर आर्टिफिशियल स्वीटनर लेना ठीक नहीं. वहीं अगर आप ले रहे हैं तो एक बार डॉक्टर से बात करना जरूरी है.  

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क्या थी रिसर्च?

इस रिपोर्ट को ऑस्ट्रेलियाई स्टडी में 36000 से अधिक लोगों को करीब 14 साल तक ट्रैक किया गया था. रोजाना आर्टिफिशियल स्वीटनर वाला सॉफ्ट ड्रिंक लेने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 31 से 38 परसेंट ज्यादा पाया गया. बता दें कि यह एक तरह की ऑब्जर्वेशनल स्टडी थी.

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मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है असर 

कई लोग ब्लड शुगर या मोटापे के शिकार हो जाते हैं. इसलिए लोग चीनी छोड़कर केमिकल्स वाली शुगर फ्री चीजों का सहारा लेते हैं. अगर इन चीजों को लंबे वक्त तक लिया जाए तो परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है और इसका असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है.  

रोजाना एक डाइट ड्रिंक से कितना बढ़ सकता है खतरा?

स्टडी के मुताबिक, रोजाना एक कैन आर्टिफिशियल स्वीटनर वाला सॉफ्ट ड्रिंक पीने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा उन लोगों की तुलना में 38% ज्यादा पाया गया, जो ऐसे ड्रिंक्स का सेवन नहीं करते थे. वहीं, नॉर्मल शुगर वाली सॉफ्ट ड्रिंक के सेवन से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 28% था. 

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शरीर पर क्या असर पड़ता है?

अगर आप शुगर फ्री जैसी चीजें लेते हैं तो आपके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इसका असर सीधा पेट पर पड़ सकता है.

  • यह पेट के अंदर मौजूद बैक्टीरिया की संख्या को बिगाड़ सकते हैं. इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी कमजोर हो सकता है. इसलिए ज्यादातर लोगों को इससे परहेज करना चाहिए.
  • आंतों का संतुलन बिगड़ने से भी बॉडी पर काफी असर पड़ता है. यह धीरे-धीरे शरीर में सूजन पैदा करती है और डायबिटीज या मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी परेशानी पैदा कर सकती है.
  • दिमाग को मीठे का सिग्नल तो मिलता है लेकिन असली कैलोरी नहीं मिलती. इसलिए हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं और इंसान को बार-बार कुछ न कुछ खाने के लिए जाता है.  

इसे भी पढ़ें- क्या आपको भी रहती है कब्ज की समस्या? बाबा रामदेव से जानिए कैसे साफ होगा आपका पेट

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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