खबर की मुख्य बातें:
- हाथ-पैर कांपने को मेडिकल भाषा में ‘ट्रेमर’ कहते हैं, जो एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें शरीर के एक या ज्यादा हिस्सों में कंपन होने लगती है.
- ट्रेमर दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है: रेस्ट ट्रेमर (आराम करते समय कंपन) और एक्शन ट्रेमर (मांसपेशियों को हिलाते समय कंपन).
- ट्रेमर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह बुजुर्गों में ज्यादा आम है और पुरुषों व महिलाओं दोनों को समान रूप से प्रभावित करता है.
- ट्रेमर के कारणों में कुछ दवाएं, जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन, थायरॉइड की समस्या, लिवर या किडनी फेलियर, डायबिटीज, तनाव और थकान शामिल हो सकते हैं.
Sudden Hand Shaking Causes: अच्छी सेहत के लिए हर कोई मेहनत करता है और फिक्रमंद भी रहता है, लेकिन शरीर में अजीब बदलाव दिखते ही दिमाग और दिल दोनों पर असर पड़ने लगता है. यानी कि जब कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो तनाव और डर दोनों ही परेशान करने लगता है और किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा जाता रहता है. इस स्टोरी में हम ऐसे ही असामान्य बदलाव के बारे में बात करेंगे, जोकि है हाथ-पैर का अचानक कांपना. ये समस्या आमतौर ज्यादा उम्र के लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन जवानी की उम्र में इस तरह के बदलाव बहुत ज्यादा परेशान कर देते हैं. अगर आप या परिवार में किसी को इस तरह की समस्या हो रही है, तो हम आपको बताएंगे कि क्या है ये स्थिति और किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है और क्या इस तरह की स्थिति ठीक हो सकती है? आइए आपके सभी सवालों का जवाब जानते हैं इस स्टोरी में.
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हाथ-पैर का यूं कांपना क्या कहलाता है?
NIH के अनुसार, हाथ-पैर कांपने को मेडिकल भाषा में ‘ट्रेमर’ (Tremor) कहते हैं. ये एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें शरीर के एक या ज्यादा हिस्सों में अनियंत्रित रूप से कंपन या झटके महसूस होने लगते हैं. यह समस्या सबसे ज्यादा हाथों को प्रभावित करती है, लेकिन इसके लक्षण बांहों, पैरों, सिर, आवाज निकालने वाली वोकल कॉर्ड्स समेत अन्य हिस्सों में भी दिखाई दे सकते हैं. कुछ लोगों में यह कंपन लगातार बना रहता है, जबकि कुछ में कभी-कभी ये महसूस होता है. NIH के अनुसार, ट्रेमर अपने आप भी हो सकता है या किसी अन्य बीमारी से जुड़ा हो सकता है. अक्सर लोग इस स्थिति को दौरा समझ लेते हैं और अपने बीच फैले घरेलू नुस्खों से ठीक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इसका सही और सीधा इलाज डॉक्टर के पास जाकर ही होगा. बेहतर रहेगा कि आप बिना देरी किए, डॉक्टर से जांच कराएं और मरीज का इलाज कराएं, ताकि स्थिति खराब न हो जाए.
ट्रेमर की स्थिति में कैसे दिख सकते हैं लक्षण?
ट्रेमर की स्थिति में लक्षण कई तरह के दिख सकते हैं, जिसे किसी दूसरी बीमारी से जोड़कर नजरअंदाज करना सही नहीं है. बेहतर रहेगा कि आप इस समस्या के लक्षणों के बारे में जानें, ताकि पता लगा सकें कि ये आखिर क्यों हो रही है. NIH ट्रेमर की स्थिति में जो कुछ कॉमन लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें;
- हाथों, बांहों, सिर, पैरों या धड़ का कांपना
- आवाज का कांपना
- लिखने परेशानी होना
- बर्तनों, औजारों या अन्य चीजों को पकड़ने में समस्या
- आदि लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
कितने तरह के होते हैं ट्रेमर
NIH के अनुसार, ट्रेमर (Tremor) को कंपन होने की स्थिति और उसके प्रकार को दो श्रेणियों में बांटा जाता है, रेस्ट ट्रेमर (Rest Tremor) और एक्शन ट्रेमर (Action Tremor). रेस्ट ट्रेमर तब होता है, जब व्यक्ति आराम की स्थिति में होता है और मांसपेशियां कोई काम नहीं कर रही होती हैं. इस तरह का कंपन अक्सर पार्किंसन डिजीज (Parkinson’s Disease) से पीड़ित लोगों में देखने को मिलता है. वहीं, एक्शन ट्रेमर तब होता है, जब व्यक्ति अपनी मांसपेशियों को इच्छानुसार हिलाता है या किसी एक्टिविटी को करता है.
इतना ही नहीं, एक्शन ट्रेमर के भी कई प्रकार होते हैं. पोश्चरल ट्रेमर (Postural Tremor), इसमें गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी के खिलाफ किसी स्थिति में हाथों को फैलाकर रखने पर कंपन होता है. काइनेटिक ट्रेमर (Kinetic Tremor) में कलाई को ऊपर-नीचे करने के दौरान कंपन हो सकती है. वहीं, इंटेंशन ट्रेमर (Intention Tremor) किसी लक्ष्य की ओर हाथ बढ़ाने पर शुरू होता है, जैसे नाक को छूने के लिए उंगली ले जाना. टास्क-स्पेसिफिक ट्रेमर (Task-Specific Tremor) लिखने या बोलने जैसे खास काम करते समय होता है, जबकि आइसोमेट्रिक ट्रेमर (Isometric Tremor) तब होता है, जब मांसपेशियां बिना किसी हलचल के सिकुड़ती हैं, जैसे एक ही स्थिति में भारी किताब पकड़ कर रखना.
किन लोगों को परेशान कर सकती है ये समस्या?
NIH के अनुसार, ट्रेमर (Tremor) की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह बुजुर्गों में ज्यादा आम है. यह समस्या पुरुषों और महिलाओं, दोनों में लगभग समान रूप से देखी जाती है, इसलिए इसे सिर्फ लिंग के हिसाब से देखना सही नहीं है. इतना ही नहीं, ट्रेमर की समस्या आमतौर पर दिमाग के उन हिस्सों में गड़बड़ी के कारण होता है, जो शरीर की गतिविधियों को कंट्रोल करते हैं. इसके ज्यादातर प्रकारों का कोई स्पष्ट जेनेटिक कारण पता नहीं लग सका है, हालांकि कुछ प्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवारों में भी देखे जा सकते हैं. ट्रेमर अपने आप हो सकता है या पार्किंसन रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और स्ट्रोक जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का लक्षण भी हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि इसके लक्षणों को देखते ही डॉक्टर से जांच करवाना शुरू कर दें.
ट्रेमर होने के अन्य संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
- दवाएं: अस्थमा की कुछ दवाएं, कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, कीमोथेरेपी और कुछ मानसिक या न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की दवाएं कंपन पैदा कर सकती हैं.
- हानिकारक रसायन
- ज्यादा कैफीन: ज्यादा चाय, कॉफी या कैफीन लेने से अस्थायी कंपन हो सकता है या पहले से मौजूद समस्या बढ़ सकती है.
- थायरॉइड की समस्या: थायरॉइड ग्रंथि के ज्यादा सक्रिय होने से कंपन हो सकता है.
- लिवर या किडनी फेलियर: इन अंगों के गंभीर रूप से प्रभावित होने पर दिमाग के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है.
- डायबिटीज: ब्लड शुगर का बहुत बढ़ना या कम होना कंपन का कारण बन सकती है.
- तनाव और थकान: चिंता, तनाव और थकावट भी ट्रेमर का कारण बन सकते हैं.
ट्रेमर की समस्या का ट्रीटमेंट कैसे होता है?
NIH के अनुसार, ट्रेमर का इलाज इसके प्रकार, लक्षणों की गंभीरता और इसके पीछे मौजूद कारणों पर निर्भर करता है. इसके ज्यादातर प्रकारों का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन दवाओं, सर्जरी और लाइफस्टाइल में बदलाव की मदद से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है. अगर कंपन हल्का है और रोजमर्रा के कामों में परेशानी नहीं होती, तो हर बार इलाज की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं, अगर ट्रेमर किसी अन्य बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के कारण हो रहा है, तो उस बीमारी का इलाज करने से कंपन कम हो सकता है या कभी-कभी पूरी तरह ठीक भी हो सकता है. सही इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि लक्षणों और उनके कारणों के अनुसार इलाज किया जा सके.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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SOURCE: NIH
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