पेशाब करने के बाद भी लगता है पूरा खाली नहीं हुआ? इस आम समस्या को नजरअंदाज न करें
क्या आपको भी एक बार पेशाब करने के बाद ऐसा महसूस होता है कि ब्लैडर अभी भी भरा हुआ है या फिर पेशाब रुक-रुक कर कभी भी होने लगता है? आइए NIDDK से जानें इस समस्या के पीछे कौन है जिम्मेदार.
पूरी तरह से नहीं हो पाता पेशाब? जानिए क्या है इस समस्या की वजह (Image: AI/Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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यूरिनरी रिटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने मूत्राशय (ब्लैडर) को पूरी तरह खाली नहीं कर पाता है.
यह समस्या पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानियों के कारण और महिलाओं में सिस्टोसील के कारण हो सकती है.
यूरिनरी रिटेंशन दो प्रकार का होता है: एक्यूट (अचानक पेशाब रुकना) और क्रॉनिक (धीरे-धीरे ब्लैडर खाली न होना).
NIDDK के अनुसार, 70 साल से ज्यादा उम्र के लगभग हर 10 में से 1 पुरुष को पांच साल के भीतर अचानक पेशाब रुकने की समस्या हो सकती है.
पेशाब करना एक सामान्य बात है और बार-बार पेशाब करने के पीछे बीमारी कारण हो सकती है या फिर ज्यादा पानी व लिक्विड का पीना कारण हो सकता है. लेकिन समस्या तब ज्यादा गंभीर हो जाती है, जब पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस हो कि अभी पेशाब पूरी तरह हुआ नहीं है यानी ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है. इस समस्या के कारण लोग कई मिनटों तक टॉयलेट में बैठे रह जाते हैं या फिर उन्हें बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है. इस समस्या के कारण कई लोग बातें बनाने लगते हैं या फिर बातों-बातों में मजाक उड़ाते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ब्लैडर का ठीक से खाली न होना किस बीमारी का संकेत हो सकता है. आइए जानते हैं इस बीमारी के बार में और कैसे इसे ठीक किया जा सकता है.
ब्लैडर का खाली न होना किस बीमारी का संकेत हो सकता है?
NIDDK के अनुसार, इस तरह की स्थिति के पीछे यूरिनरी रिटेंशन (Urinary Retention) कारण हो सकता है, जोकि एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपने मूत्राशय यानी ब्लैडर को पूरी तरह खाली नहीं कर पाता है. यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में होने वाली एक समस्या है, जिसका संबंध कई स्वास्थ्य समस्याओं से हो सकता है. जानकारी के अनुसार, पुरुषों में यह समस्या प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानियों के कारण हो सकती है, जबकि महिलाओं में सिस्टोसील (Cystocele) इसकी एक वजह हो सकती है. बता दें कि यूरिनरी रिटेंशन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. पहला एक्यूट यूरिनरी रिटेंशन (Acute urinary retention), जिसमें व्यक्ति अचानक पेशाब बिल्कुल नहीं कर पाता. दूसरा क्रॉनिक यूरिनरी रिटेंशन (Chronic urinary retention), जिसमें धीरे-धीरे ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने में परेशानी होने लगती है.
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यूरिनरी रिटेंशन के दोनों प्रकार में क्या है मुख्य अंतर?
NIDDK के अनुसार, दोनों प्रकार का असर तो एक होता है, लेकिन स्थिति में फर्क रहता है.
एक्यूट यूरिनरी रिटेंशन (Acute Urinary Retention): एक्यूट यूरिनरी रिटेंशन की समस्या अचानक होती है और आमतौर पर कम समय तक रहती है. इस स्थिति में ब्लैडर पेशाब से भरा होने के बावजूद व्यक्ति पेशाब नहीं कर पाता है. इसके कारण पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हो सकता है और यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. अगर किसी व्यक्ति को अचानक पेशाब आना बंद हो जाए और वह बिल्कुल पेशाब न कर पाए, तो उसे तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है.
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क्रॉनिक यूरिनरी रिटेंशन (Chronic Urinary Retention): क्रॉनिक यूरिनरी रिटेंशन की समस्या धीरे-धीरे समय के साथ विकसित होती है. इसमें व्यक्ति पेशाब तो कर पाता है, लेकिन उसका ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता. इस स्थिति में ब्लैडर के अंदर कुछ पेशाब बचा रह सकता है. कई लोगों को क्रॉनिक यूरिनरी रिटेंशन होने के बावजूद इसका पता नहीं चलता, क्योंकि उन्हें शुरुआत में किसी तरह के स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होता है.
क्या ये समस्या दुर्लभ है?
यूरिनरी रिटेंशन (Urinary Retention) कोई दुर्लभ बीमारी या समस्या नहीं है, ये बढ़ी उम्र में अक्सर लोगों को हो सकता है. बड़े उम्र के लोगों में ये बीमारी अक्सर पाई जाती है, जिस कारण उन्हें अचानक तेज पेशाब या किसी भी वक्त पेशाब की समस्या का सामना करना पड़ सकता है. NIDDK के अनुसार, 70 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों में पेशाब रुकने (Urinary Retention) की समस्या का खतरा ज्यादा रहता है. शोध के अनुसार, 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के लगभग हर 10 में से 1 पुरुष और 80 वर्ष की उम्र में लगभग हर 3 में से 1 पुरुष को पांच साल के अंदर अचानक पेशाब रुकने की समस्या हो सकती है. महिलाओं में यह समस्या काफी कम होती है, जहां हर साल लगभग 1 लाख में से 3 महिलाओं को एक्यूट यूरिनरी रिटेंशन होता है. बच्चों में यह समस्या बहुत दुर्लभ है.
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यूरिनरी रिटेंशन की स्थिति का लंबे समय तक बना रहना कैसा है?
पेशाब रुकने (Urinary Retention) की समस्या का समय पर इलाज न कराने से कई गंभीर परेशानियां हो सकती हैं:
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI): जब ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं होता, तो पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया बढ़कर संक्रमण पैदा कर सकते हैं. संक्रमण किडनी तक फैलने पर गंभीर समस्या हो सकती है.
ब्लैडर को नुकसान (Bladder Damage): लंबे समय तक पेशाब जमा रहने से ब्लैडर पर दबाव बढ़ता है, जिससे उसकी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और वह ठीक से काम करना बंद कर सकता है.
किडनी को नुकसान (Kidney Damage): पेशाब बाहर न निकलने पर वह वापस किडनी की ओर जा सकता है. इससे किडनी में सूजन आ सकती है और गंभीर मामलों में क्रॉनिक किडनी डिजीज या किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है.
पेशाब का रिसाव (Urinary Incontinence): ब्लैडर में पेशाब जमा रहने के कारण कभी-कभी पेशाब अपने आप टपकने लगता है. इसे ओवरफ्लो इनकॉन्टिनेंस कहा जाता है.
बेहतर रहेगा कि, पेशाब रुकने की समस्या के लक्षण दिखाई देने पर समय पर डॉक्टर से जांच और इलाज कराना जरूरी है, ताकि ब्लैडर, किडनी और पूरे यूरिनरी सिस्टम को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.