Sexually Transmitted Disease Symptoms: एसटीडी (STDs) यानी सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज या सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन आम समस्या है जिससे बहुत से लोग प्रभावित होते हैं. ये यौन संचारित रोग बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स के कारण हो सकते हैं और सेक्शुअल कोन्टेक्ट से फैल सकते हैं. महिलाओं में यह लक्षण कम से ज्यादा हो सकते हैं. ज्यादातर STDs ट्रीटमेंट से ठीक हो सकते हैं लेकिन यह बेहद जरूरी है कि इन्हें समय रहते पहचानकर इलाज शुरू कर दिया जाए. ऐसे में यहां जानिए महिलाओं में सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के लक्षण (STD Symptoms In Women) कैसे दिखते हैं और किस तरह पहचाने जा सकते हैं.
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महिलाओं में STD के लक्षण कैसे दिखते हैं
असमान्य तरह से वैजाइनल डिस्चार्ज होने लगता है. इसका रंग, कंसिस्टेंसी, मात्रा और महक नॉर्मल दिनों जैसी नहीं होती है.
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- जननांगों में जलन और दर्द महसूस होता है. खासकर पेशाब करते समय ऐसा महसूस होता है.
- जननांगों के आस-पास दाने (Bumps On Private Parts) निकल जाते हैं, खुजली हो सकती है और त्वचा लाल नजर आ सकती है. फोड़े-फुंसियां भी हो सकते हैं.
- पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है.
- एब्नॉर्मल वैजाइनल ब्लीडिंग होने लगती है. पीरियड्स के बीच में ऐसा होता है और सेक्स के बाद भी ब्लीडिंग हो सकती है.
- बुखार रहता है और बीमार महसूस होने लगता है.
ये आम दिक्कतों का लक्षण भी हो सकता है. ऐसे में डॉक्टर से मिलकर जांच कराना जरूरी है जिससे एसटीडी को कंफर्म किया जा सके.
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STD होने का क्या कारण है
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- एसटीडी जैसे क्लाइमीडिया, सिफलिस और गोनोरिया बैक्टीरियल इंफेक्शंस हैं जो बैक्टीरिया के संपर्क में आने से हो सकते हैं. इन्हें एंटीबायोटिक्स से ठीक किया जा सकता है.
- वायरल के संपर्क में आने से एसटीडी हो सकता है. HIV, हर्पीज, HPV और हेपेटाइटिस बी ऐसे ही कुछ वायरल इंफेक्शन हैं.
- पैरासाइट्स के संपर्क में आने से ट्राइकोमोनिएसिस जैसी सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज हो सकती है.
किन लोगों को STDs का खतरा ज्यादा रहता है
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- अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने वालों में
- जिनके एक से ज्यादा सेक्शुअल पार्टनर हैं
- जिन्हें पहले एसटीडी हुआ हो
- कम उम्र में सेक्शुअली एक्टिव होने पर
- एनल सेक्स करने पर क्योंकि इसमें टिशू डैमेज और संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है
- सूंई शेयर करने पर
- प्रेग्नेंसी के दौरान.
STD का क्या इलाज होता है
बैक्टीरियल एसटीडी के इलाज (STD Treatment) के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. इनका फुल कोर्स होता है जिसे पूरा करना जरूरी है. वायरल एसटीडी जैसे हर्पीज, एचपीवी, एचआईवी या हैपेटाइटिस बी को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन इसके लक्षणों को मैनेज किया जाता है
महिलाओं में STDs का इलाज ना हो तो क्या होता है?
महिलाओं में अगर STDs का इलाज ना किया जाए तो इससे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज हो सकती है, सर्वाइकल कैंसर, वैजाइनल या वल्वर कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है, HIV का रिस्क बढ़ सकता है और अगर हेपेटाइटिस बी हुआ है तो लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.