Prostate Cancer Symptoms: प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि को प्रभावित करता है. प्रोस्टेट अखरोट के आकार की ग्रंथि है जो पुरुषों के जननांग का हिस्सा है. 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है. वहीं, प्रोस्टेट कैंसर होने पर शुरुआत में स्पष्ट लक्षण (Prostate Cancer Ke Lakshan) या संकेत नजर नहीं आते हैं. ऐसे में प्रोस्टेट से जुड़ी ऐसी कुछ दिक्कतें हैं जिनके दिखते ही अगर जांच करवा ली जाए तो प्रोस्टेट कैंसर को समय रहते पहचाना जा सकता है. नेशनल हेल्थ सर्विस, यूके से जानिए प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण कैसे दिखते हैं और इसे किस तरह पहचाना जा सकता है.
प्रोस्टेट कैंसर के क्या लक्षण हैं
प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर प्रोस्टेट के बाहरी हिस्से से शुरू होता है. इसका मतलब है कि जबतक ट्यूमर बढ़ता नहीं है और ब्लैडर से यूरिन वाली ट्यूब को नहीं दबाता है तबतक इसके लक्षणों का पता नहीं चल पाता है. इस कैंसर के लक्षण कुछ ऐसे नजर आ सकते हैं –
- पेशाब शुरू करने में दिक्कत आती है
- पेशाब की धार धीमी होती है
- रुक-रुककर पेशाब आता है
- एकदम से पेशाब आना या बार-बार पेशाब आना
- पेशाब कर लेने के बाद भी ऐसा लगता है कि पेशाब करने की जरूरत है
- रात के समय बार-बार पेशाब लगना.
ये लक्षण भी दिख सकते हैं
- इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो जाना, इरेक्शन में दिक्कत आना या इरेक्शन को मेंटेन ना कर पाना
- पेशाब या सीमेन में खून नजर आना
- कमर के निचले हिस्से में दर्द होना या बिना कोशिश किए ही वजन कम होने लगना एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण हो सकते हैं.
इस बात का खास ध्यान रखें कि ये लक्षण प्रोस्टेट कैंसर का ही लक्षण हो यह जरूरी नहीं है. प्रोस्टेट की आम दिक्कतों में भी ऐसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इसीलिए डॉक्टर से जांच करवाना और पैनिक ना होना जरूरी है.
कैसे होता है प्रोस्टेट कैंसर का इलाज
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज ट्यूमर के साइज और ट्यूमर कहां-कहां तक फैला है इसपर निर्भर करता है. इलाज में सर्जरी, रेडियोथेरैपी, हार्मोन थेरैपी और कीमोथेरैपी वगैरह शामिल होते हैं. डॉक्टरों की टीम ट्रीटमेंट के दौरान मरीज को मॉनीटर करती है और रेगुलर चेकअप्स करती है.
सर्जरी – प्रोस्टेट कैंसर में सर्जरी के दौरान प्रोस्टेट को हटाया जा सकता है. इस सर्जरी से थोड़ा रिस्क भी जुड़ा है, इसमें कभी भी पेशाब आने या इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की संभावना रहती है.
रेडियोथेरैपी – रेडियोथेरैपी में हाई एनर्जी रेडिएशन से कैंसर सेल्स को मारा जाता है. अगर कैंसर ज्यादा ना फैला हो तो रेडियोथेरैपी दी जा सकती है.
हार्मोन थेरैपी – टेस्टोस्टेरोन हार्मोन से प्रोस्टेट कैंसर बढ़ सकता है. इसीलिए हार्मोन इंजेक्शंस और टैबलेट्स से टेस्टोस्टेरोन को बढ़ने से रोका जाता है या इसके प्रभाव को ब्लॉक किया जाता है. बाकी ट्रीटमेंट के साथ ही हार्मोन थेरैपी दी जा सकती है.
कीमोथेरैपी – कीमोथेरैपी ऐसी दवा है जिसमें कैंसर की सेल्स को मारा जाता है. एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर में यह एक सामान्य ट्रीटमेंट है और इसे हार्मोन थेरैपी और स्टेरॉइड्स के साथ दिया जा सकता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.