Peshaab Mein Khoon Aana: अगर कभी पेशाब करते समय खून दिखाई दे, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. कई लोग शर्म या डर के कारण इस समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर की ओर से मिलने वाला, किसी बीमारी को लेकर अहम संकेत हो सकता है. मेडिकल भाषा में पेशाब में खून आने की स्थिति को हेमट्यूरिया (Hematuria) कहा जाता है. कई बार इसमें दर्द होता है और कई बार बिना किसी दर्द के भी खून दिख सकता है. दोनों ही हालात में इस समस्या में जांच करवाना जरूरी है, क्योंकि इसके पीछे छोटी परेशानी से लेकर गंभीर बीमारी तक कारण हो सकते हैं. आइए इस स्टोरी में हम सरल भाषा में इस समस्या के बारे में समझते हैं और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं इसके बारे में भी जानते हैं.

यह भी पढ़ें: पेशाब के अपने आप निकलने का क्या कारण है? महिलाएं इन 5 संकेतों को बिल्कुल ना करें नजरअंदाज

---विज्ञापन---

पेशाब में खून आने के क्या हो सकते हैं कारण

एक्सपर्ट्स के अनुसार, पेशाब में खून आने का सबसे आम कारण यूरिन इन्फेक्शन (Urine Infection) होता है. इसके अलावा किडनी या पेशाब की थैली में पथरी होने पर भी ऐसी स्थिति बन सकती है. पथरी जब मूत्र मार्ग को खरोंचती है, तो इससे खून आने लगता है. लंबे समय से चल रहा इन्फेक्शन, मूत्र मार्ग में चोट, या सूजन भी इसकी वजह बन सकती है. कुछ मामलों में यह समस्या किडनी कैंसर (Kidney Cancer), ब्लैडर कैंसर (Bladder Cancer) या यूरोथेलियल लाइनिंग के कैंसर (Urothelial Carcinoma) से भी जुड़ी हो सकती है, खासकर जब बीमारी काफी बढ़ चुकी हो.

---विज्ञापन---

किन लक्षणों पर तुरंत सतर्क हो जाएं

अब सवाल उठता है कि किन संकेतों में सतर्क होने की जरूरत है? बता दें कि, अगर पेशाब का रंग गुलाबी (Pink Urine), लाल (Redness in Urine) या भूरे रंग का दिखे, बार-बार पेशाब आए, जलन महसूस हो, पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द हो, तो तुरंत सतर्क हो जाना बेहतर है. कई बार खून आंखों से दिखता नहीं, लेकिन जांच में सामने आता है. इसलिए अगर लंबे समय तक कोई परेशानी बनी रहे, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. अक्सर लोग मेडिकल स्टोर से बिना पर्ची के दवा ले लेते हैं, जिसका परिणाम गंभीर बीमारी की तरफ गिर जाना होता है.

पेशाब में खून आए तो क्या करें

इस स्थिति में सबसे पहले यूरोलॉजिस्ट (Urologist) से संपर्क करना चाहिए. डॉक्टर जांच के बाद, जो समस्या सामने आएगी उसके अनुसार इलाज शुरू करते हैं. जरूरी नहीं कि हर मामले में यह कैंसर ही हो, कई मरीज सही समय पर इलाज कराने से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. घबराने के बजाय समय पर जांच, सही दवाइयां और डॉक्टर की सलाह ही सबसे सुरक्षित रास्ता है. याद रखें, समय पर लिया गया इलाज बड़ी परेशानी से बचा सकता है.

यह भी पढ़ें: छोटे बच्चों में डिप्रेशन या मानसिक पीड़ा को कैसे पहचानें? फोर्टिस अस्पताल की साइकाइट्रिस्ट ने बताया माता-पिता इन संकेतों को ना करें इग्नोर