महीनों बाद भी नहीं खुली बैठी हुई आवाज? बदलते मौसम का जुकाम समझने की भूल न करें, कैंसर का हो सकता है खतरा
Cancer: आवाज बैठना एक आम समस्या है, जो किसी को भी हो सकती है. आमतौर पर ये कुछ दिनों में दवाओं या फिर घरेलू नुस्खों से ठीक हो जाती है, लेकिन लंबे समय तक इस समस्या का बना रहना कैंसर का भी कारण हो सकता है. आइए जानते हैं कौन से कैंसर के कारण आवाज बैठ सकती है?
गले और गर्दन के कैंसर में लक्षण कैसे दिखते हैं और कहां से ये शुरू होता है? (Image: AI/Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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आवाज का बैठना आमतौर पर 2-3 दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह कैंसर का संकेत हो सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर शरीर के किसी भी अंग या टिशू में शुरू हो सकता है, जिसमें कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं.
सिर और गर्दन का कैंसर गले की आवाज को प्रभावित कर सकता है, जिसमें साइनस, नाक, मुंह, ग्रसनी और वॉइस बॉक्स शामिल हैं.
शराब और तंबाकू सिर और गर्दन के कैंसर के मुख्य कारण हैं, जबकि लगभग 70% ओरोफैरिंग्स कैंसर HPV से जुड़े होते हैं.
आवाज का बैठना एक आम समस्या है, जो किसी को भी कभी भी परेशान कर सकती है. आमतौर पर तेज चिल्लाना, बहुत ठंडा खाना या पीना आदि के कारण अक्सर लोगों की आवाज बैठ जाती है, जिससे बोलने में परेशानी होने लगती है. आमतौर पर 2-3 दिनों में आवाज की समस्या ठीक हो जाती है, लेकिन जब समस्या ठीक नहीं होती है, तो बड़ी समस्या का डर सताने लगता है. लेकिन कैसा हो कि आपको बताया जाए कि कुछ मामलों में ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकता है, जो आपको बड़ी परेशानी में घेर सकता है. आइए जानते हैं किस कैंसर में आवाज बैठने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कोशिकाएं बेकाबू होकर बढ़ने लगती हैं. WHO के मुताबिक, कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर के लगभग किसी भी अंग या टिशू में शुरू हो सकती है. इसमें शरीर की कुछ असामान्य कोशिकाएं कंट्रोल से बाहर होकर अनियमित तरीके से बढ़ने लगती हैं और आसपास के स्वस्थ टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकती हैं. कई बार ये कोशिकाएं शरीर के दूसरे अंगों तक भी फैल जाती हैं, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ता सकता है. इसी में आता है सिर और गर्दन कैंसर, जो गले की आवाज को प्रभावित करता है. CDC के अनुसार, सिर और गर्दन के कैंसर में वे कैंसर शामिल हैं जो सिर और गले के कई हिस्सों में शुरू होते हैं.
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गले और गर्दन का कैंसर कैसे शुरू होता है?
अब सवाल उठता है कि आखिर ये कैंसर कहां से शुरू कैसे होता है? साइनस में (खोपड़ी के अंदर नाक के आस-पास की जगहें).
नाक के अंदर और पीछे.
मुंह में, जिसमें जीभ, मसूड़ों और मुंह की छत शामिल हैं.
मुंह के पिछले हिस्से और गले (फैरिंग्स) में, जिसके तीन हिस्से होते हैं: नेसोफैरिंग्स, ओरोफैरिंग्स और हाइपोफैरिंग्स.
लैरिंक्स (वॉइस बॉक्स) में.
होंठों पर, हालांकि होंठों का कैंसर एक तरह का स्किन कैंसर होता है.
मुंह के लिए लार बनाने वाली ग्रंथियों में, लेकिन ये मामले काफी कम होते हैं.
सिर्फ आवाज से नहीं और भी लक्षण देते हैं कैंसर का संकेत?
मुंह में कैंसर होने पर ये लक्षण दिख सकते हैं:
मसूड़ों, जीभ या मुंह के अंदर की परत पर सफेद या लाल घाव जो ठीक न हो रहा हो.
जबड़े में सूजन.
मुंह से असामान्य रूप से खून आना या दर्द होना.
गांठ या त्वचा का मोटा होना.
डेंटर (नकली दांतों) से जुड़ी समस्याएं.
मुंह के पिछले हिस्से (ग्रसनी या फैरिंग्स) में कैंसर होने पर ये लक्षण दिख सकते हैं:
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सांस लेने या बोलने में परेशानी.
गांठ या त्वचा का मोटा होना.
खाना चबाने या निगलने में परेशानी.
गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना.
गले में ऐसा दर्द जो ठीक न हो रहा हो.
कान में दर्द, कान बजना या सुनने में परेशानी.
वॉइस बॉक्स (लैरिंक्स) में कैंसर होने पर ये लक्षण दिख सकते हैं:
कुछ निगलते समय दर्द.
कान में दर्द.
साइनस और नाक के अंदरूनी हिस्से (नेजल कैविटी) में कैंसर होने पर ये लक्षण दिख सकते हैं:
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साइनस का बंद होना जो ठीक न हो रहा हो.
साइनस का ऐसा इन्फेक्शन जो एंटीबायोटिक इलाज से ठीक न हो रहा हो.
नाक से खून आना.
सिरदर्द.
आंखों के आस-पास दर्द और सूजन.
ऊपरी दांतों में दर्द.
डेंटर (नकली दांतों) से जुड़ी समस्याएं.
किस कारण पैदा हो सकता है ये खतरनाक कैंसर?
CDC के अनुसार, सिर और गर्दन के कैंसर के लिए शराब और तंबाकू मुख्य कारण होते हैं, जो इसका खतरा बढ़ात हैं. सिगरेट, सिगार, पाइप और बिना धुएं वाले तंबाकू (जैसे चबाने वाला तंबाकू, सूंघने वाला तंबाकू या पान-मसाला) आदि सिर और गर्दन के कैंसर से जुड़े हैं. इसके अलावा, किसी भी तरह की शराब, जैसे बीयर, वाइन या हार्ड लिकर पीने से भी मुंह, गले और वॉइस बॉक्स (voice box) का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.
ओरोफैरिंग्स (जिसमें टॉन्सिल, नरम तालु और जीभ का निचला हिस्सा शामिल है) में होने वाले लगभग 70% कैंसर HPV से जुड़े होते हैं, जो यौन संपर्क से फैलने वाला एक आम वायरस है. इतना ही नहीं. सूरज, टैनिंग बेड या सन-लैंप से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के ज्यादा देर तक संपर्क में रहने से भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. अगर आपको किसी तरह की समस्या हो रही है, जो लंबे वक्त से बनी हुई है और ठीक ही नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें और तुरंत इलाज कराएं.
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कैसे कम कर सकते हैं कैंसर का खतरा
कैंसर की सबसे खतरनाक बात ये होती है कि यह शरीर में कब पनपता है और अपनी जड़ों को मजबूत करता रहती है, इसकी खबर अक्सर मरीजों को होती ही नहीं है. ऐसे में किसी भी तरह के लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. इसके अलावा अगर कुछ आदतों और सलाह का नियमित रूप से पालन किया जाए, तो कैंसर के खतरे को पहले ही कम किया जा सकता है. खतरे को कम करने के लिए धूम्रपान न करना, तंबाकू के इस्तेमाल से खुद को दूर रखना, शराब का सेवन न बंद करना आदि कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं. इसके अलावा, ओरल सैक्स से बचें या फिर सुरक्षित रूप से कंडोम का इस्तेमाल करें, क्योंकि ओरल सेक्स के दौरान HPV फैलने या होने का खतरा ज्यादा रहता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.