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एक ही महीने में 2 बार पीरियड्स क्यों होते हैं, किसी बीमारी का लक्षण तो नहीं, गायनेकोलॉजिस्ट ने बताई असल वजह

Periods Twice A Month: अपोलो क्रैडल की ऑब्स्टेट्रिशियन/गायनेकोलॉजिस्ट और लैप्रोस्कॉपिक सर्जन डॉक्टर मीता वर्मा बता रही हैं कि महीने में 2 बार पीरियड्स होने की क्या वजह हो सकती है. जानिए यह कब नॉर्मल है और कब नहीं.

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महीने में 2 बार पीरियड्स हो तो क्या करना चाहिए, जानिए यहां. Image Credits - AI

Period Problems: महिलाएं पीरियड्स को महीने के साइकल के आधार पर देखती हैं और एक ही महीने में 2 बार पीरियड्स हो जाएं तो चिंता में पड़ जाती हैं. ऐसा क्यों होता है यह बता रही हैं अपोलो क्रैडल की ऑब्स्टेट्रिशियन/गायनेकोलॉजिस्ट और लैप्रोस्कॉपिक सर्जन डॉक्टर मीता वर्मा. डॉक्टर बताती हैं कि महीने में 2 बार पीरियड्स होना नॉर्मल है, लेकिन यह अलार्मिंग है या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि पीरियड्स का पैटर्न क्या है. इसे पॉलीमेनोरिया भी कहते हैं. अगर यह लगातार हो और ब्लीडिंग 20 दिनों से कम हो तो इसे इंटरमेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं, इसमें दूसरी बार ब्लीडिंग साइकल शॉर्ट होती है और स्पॉटिंग होती है. स्पॉटिंग यानी थोड़ी सी ब्लीडिंग जिसे पीरियड्स नहीं कहा जा सकता है.

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कब परेशान नहीं होना चाहिए

डॉक्टर बताती हैं कि अगर आप स्ट्रेस में हैं, स्लीप पैटर्न बदल जाए, लंबे ट्रेवल के बाद जेटलेग हो, वजन में एकदम से बदलाव हो या बहुत एक्सरसाइज की हो तो वो भी आपके ओवेरियन हार्मोन्स को प्रभावित करता है.

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21 दिन में 1 हफ्ता पहले और बाद में पीरियड्स होना नॉर्मल होता है, लेकिन अगर किसी की 21 या 24 दिनों की साइकिल हो और महीना 31 दिन का हो तो महीने में 2 बार पीरियड्स आएंगे ही.

महीने में 2-3 बार स्पॉटिंग क्यों होती है

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महीने में 2-3 बार स्पॉटिंग तब होती है जब किसी ने इमरजैंसी कोंट्रासेप्टिव पिल या कोई हार्मोन पिल लिया हो. यह एक सामान्य कारण है. महीने के मध्य में भी अंडा गिरता है तो तब भी स्पॉटिंग हो जाती है.

डॉक्टर बताती हैं कि बुखार होना, हार्मोन का एकदम से बदल जाना, थायराइड हार्मोन का एकदम से बदल जाने से भी इंटरमेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग होती है. इसीलिए इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है.

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महीने में 2 बार ब्लीडिंग होने को कम नहीं करना चाहिए इग्नोर

  • अगर आपको महीने में 2 बार ब्लीडिंग हो और थायराइड या प्रोलैक्टिन हार्मोन में गड़बड़ी हो, ये हार्मोन नॉर्मल ना हों तो डॉक्टर से मिलना चाहिए.
  • अगर 40-45 साल की उम्र के आस-पास पीरियड्स गड़बड़ हों तो उसे पेरिमेनोपॉजल कारण कहते हैं. PMOS या अंडा ना गिरने वाली साइकिल एनोव्यूलेटरी साइकिल तो उसमें भी इर्रेग्यूलर ब्लीडिंग (Irregular Bleeding) हो सकती है.
  • कभी-कभी बच्चेदाने की रसौली, पॉलिप्स या एडिनोमायोसिस में भी इर्रेग्यूलर तरह से शेडिंग होती है तो इससे भी रह-रहकर ब्लीडिंग होती है.
  • अर्ली मिस्कैरेज में भी ब्लीडिंग हो जाती है लेकिन महिलाओं को लगता है कि यह दूसरा पीरियड है.

2 बार पीरियड्स में कब सतर्क हो जाना चाहिए

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  • अगर पीरियड बहुत हैवी हो, हर 2 घंटे में 2 पैड्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा हो या खून का थक्का निकल रहा हो जिसका साइज 1 इंच से ज्यादा बड़ा हो या फिर ब्लीडिंग 7 दिनों से ज्यादा हो रही हो
  • अगर 3 महीने लगातार आपको महीने में 2 बार ब्लीडिंग हो
  • अगर बदबू के साथ ब्लीडिंग हो, दर्द हो, कुछ डिस्चार्ज हो रहा हो या फिर शारीरिक संबंध के बाद ब्लीडिंग हो
  • अगर घर में प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजीटिव हो और फिर ब्लीडिंग हो तब भी डॉक्टर से जरूर मिलें.

डॉक्टर कहती हैं कि अगर महीने में दूसरी बार ब्लीडिंग थोड़ी बहुत हो और उसमें दर्द ना हो तो वो अलार्मिंग नहीं है, आप इसे 2-3 साइकिल में ऑब्जर्व करें. अगर ब्लीडिंग पीरियड्स की तरह बहुत ज्यादा हो और 21 दिन से पहले दोबारा पीरियड हो रहा हो और यह बार-बार हो रहा हो तो डॉक्टर से मिलने में देरी ना करें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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