नेफ्थलीन बॉल्स का करते हैं इस्तेमाल? कई देशों में बैन है यह कीटनाशनक दवा, जानिए सेहत पर Naphthalene Balls से होने वाले नुकसान

Naphthalene Balls Effects On Health: नेशनल पेस्टिसाइड्स इंफोर्मेशन सेंटर, यूएसए से जानिए नेफ्थलीन क्या है, कैसे बनता है, इसके संपर्क में आने पर क्या होता है और इससे कौन सी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. अगर आप भी कपड़ों के बीच में नेफ्थलीन बॉल्स रखते हैं तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.

Naphthalene balls side effects

नेफ्थलीन की गोलियां किससे बनाई जाती हैं? Image Credits - AI

Naphthalene Balls Side Effects: भारत में सर्दियों या गर्मियों के कपड़ों को स्टोर करते हुए उनके बीच में नेफ्थलीन बॉल्स रखी जाती हैं. ये कीटनाशक गोलियां हैं जो आमतौर पर सफेद रंग की छोटी-बड़ी होती हैं. इनसे कपड़ों में कीड़े नहीं लगते हैं. लेकिन, भारत में खूब इस्तेमाल होने वाली इन गोलियों को यूके, यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, चीन और न्यूजीलैंड में बैन (Naphthalene Ban) किया जा चुका है. इस बैन की वजह नेफ्थलीन बॉल्स से सेहत को होने वाला नुकसान है. नेशनल पेस्टिसाइड्स इंफोर्मेशन सेंटर, यूएसए से जानिए सेहत को किस-किस तरह से नुकसान पहुंचा सकता है नेफ्थलीन.

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कैसे बनती हैं नेफ्थलीन बॉल्स

नेफ्थलीन क्रूड ऑयल और कोल टार से बनता है. किसी चीज के जलने पर भी नेफ्थलीन गैस निकलती है, जैसे सिगरेट के धुएं और कार के धुएं में भी नेफ्थलीन होता है. इसी नेफ्थलीन को कीटनाशक (Pesticide) की तरह इस्तेमाल किया जाता है और इससे नेफ्थलीन मॉथबॉल्स या टॉक्सिक गैस तैयार की जाती है.

कैसे काम करती हैं नेफ्थलीन बॉल्स

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नेफ्थलीन में मौजूद केमिकल्स को अगर सूंघ लिया जाए तो यह शरीर की सेल्स के साथ रिएक्ट करते हैं और टिशूज को डैमेज करने लगते हैं. नेफ्थलीन छोटे कीटों को कैसे मारता है यह स्पष्ट नहीं है और माना जाता है कि इसमें से निकलने वाली दुर्गंध ही कीटों को दूर भगाती है.

नेफ्थलीन से इंसानों को कैसे पहुंचता है नुकसान

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  • ज्यादातर लोग नेफ्थलीन को सूंघने से इसके संपर्क में आते हैं. अगर नेफ्थलीन की गोलियों को सूंघा जाए तो यह कीटनाशक शरीर में जाता है. छोटे बच्चों और जानवरों तक की सेहत इन नेफ्थलीन बॉल्स से प्रभावित होती है. नेफ्थलीन के संपर्क में आने पर सिर में दर्द हो सकता है, जी मिचलाने लगता है, चक्कर आ सकते हैं या उल्टी आ सकती है.
  • अगर कोई व्यक्ति गलती से नेफ्थलीन बॉल्स को निगल ले या खा ले तो उसे हीमोलिटिक अनीमिया हो सकता है. यह तब होता है जब रेड ब्लड सेल्स टूटने लगती हैं और ऑक्सीजन को शरीर के अंगों तक नहीं पहुंचा पाती.
  • छोटे बच्चे अगर नेफ्थलीन बॉल्स को निगल लेते हैं तो उन्हें दस्त लग सकते हैं, बुखार आ सकता है, पेट में दर्द होने लगता है, पेशाब करने में दिक्कत आती है और पेशाब का रंग बदला हुआ नजर आने लगता है.

क्या नेफ्थलीन कैंसर की वजह बन सकता है

जानवरों पर हुई स्टडी से यह साबित होता है कि नेफ्थलीन से कैंसर (Cancer) हो सकता है. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नेफ्थलीन को कैंसर की वजह यानी कार्सिनोजेनिक बताया है.

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नेफ्थलीन की गोलियों के बजाय किस चीज का इस्तेमाल करें

अगर कपड़ों को स्टोर करने के लिए आप नेफ्थलीन की गोलियों का इस्तेमाल करते आए हैं तो इन गोलियों को देसी चीजों से रिप्लेस कर सकते हैं. आप कपड़ों के बीच में नीम की सूखी पत्तियों, कपूर, दालचीनी और लौंग की पोटली बनाकर रख सकते हैं. इन छोटी-छोटी पोटलियों से निकलने वाली मसालों की सुगंध कीड़ों को दूर रखती है और सेहत के लिए भी नुकसानदायक नहीं है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source -  National Pesticide Information Center

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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