मिर्गी का दौरा आने पर तुरंत क्या करना चाहिए? AIIMS की प्रोफेसर ने बताया मुंह में उंगली डालना नहीं बल्कि यह तरीका आएगा काम

Mirgi Ka Ilaj: मिर्गी का दौरा पड़ने पर लोग अक्सर ही व्यक्ति के मुंह में उंगली या पानी डालने लगते हैं या फिर उसे जूता सुंघाने की कोशिश करते हैं. लेकिन, इस स्थिति को समझदारी से और सही तरह से हैंडल करना जरूरी है.

Mirgi Ka Daura

मिर्गी के दौरे के लक्षण क्या हैं?

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Mirgi Ka Daura Padna: मिर्गी का दौरा पड़ना एक ऐसी दिक्कत है जिससे अनेक लोग दोचार होते हैं लेकिन इसे लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं और खुलकर बात करने के बजाय गलतफहमियों पर विश्वास कर लेते हैं. मिर्गी यानी एपिलेप्सी (Epilepsy) क्या है, इसमें क्या होता है, किसी को मिर्गी का दौरा पड़े तो क्या करना चाहिए, मिर्गी का दौरा पड़ने के दौरान क्या नहीं करना चाहिए और मिर्गी के मरीज किस तरह अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं यह बता रही हैं एम्स, दिल्ली के न्यूरोलॉजिकल विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी. इस वीडियो को एम्स के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल से पोस्ट किया गया है और जानकारी साझा की गई है. यहां जानिए मिर्गी से जुड़ी वो कौन सी बातें हैं जो सभी को पता होनी चाहिए.

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मिर्गी का दौरा पड़ने का क्या मतलब है

डॉक्टर बताती हैं कि मिर्गी एक दिमागी बीमारी है. इसमें दौरा तब पड़ता है जब दिमाग में अचानक से कुछ गड़बड़ी हो जाती है. इसे एक तरह का शॉर्ट सर्किट कहा जा सकता है. यह दिमाग के जिस हिस्से से होती है उसके हिसाब से दौरे अलग-अलग तरह के दिख सकते हैं. कुछ लोग गिरकर कांपने लगते हैं, वहीं कुछ लोग बस एकटक देखने लगते हैं या उनके शरीर में हल्की सी फड़कन होती है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर दौरा मिर्गी नहीं होता है और हर दौरा एक जैसा नहीं होता है.

मिर्गी का दौरा क्यों पड़ता है

सिर में चोट लगना, स्ट्रोक, दिमागी बुखार, दिमाग में ट्यूमर या फिर यह दिक्कत आनुवांशिक भी हो सकती है. डॉक्टर बताती हैं कि मिर्गी के आधे मामलों में यह पता ही नहीं होता है कि मिर्गी हो क्यों रही है. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि बीमारी कम गंभीर हो. मिर्गी बच्चे, युवाओं या बुजुर्गों किसी को भी हो सकती है. लेकिन, सही इलाज से ज्यादातर लोग पूरी और अच्छी जिंदगी जी सकते हैं.

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कुछ गलतफहमियों को दूर करना है जरूरी

डॉ. मंजरी त्रिपाठी कहती हैं कि लोगों को अक्सर यह कंफ्यूजन होती है कि मिर्गी एक मानसिक बीमारी है जबकि मिर्गी एक दिमागी बीमारी है और इसका दिमाग से संबंध है मन से नहीं.

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दौरे के दौरान मरीज के मुंह में अक्सर ही लोग कुछ डाल देते हैं, जैसे पानी, दवा या उंगली. इससे मरीज को खतरा हो सकता है या फिर आपको चोट लग सकती है. इस स्थिति में मरीज को बस एकतरफ करवट देकर लिटा दें और उसके पास अगर कोई खतरनाक चीज हो तो हटा दें.

एक गलतफहमी यह भी है कि मिर्गी वाले लोग काम, पढ़ाई या शादी वगैरह नहीं कर सकते हैं. लेकिन सच यह है कि 70 प्रतिशत लोगों में मिर्गी दवाओं से कंट्रोल में रहती है और सामान्य जिंदगी जी जा सकती है.

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अगर किसी को दौरा पड़े तो क्या करें

  • सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि आपको शांत रहना है
  • जिसे मिर्गी का दौरा पड़ा है उसे करवट दिलाकर लेटा दें
  • सिर के नीचे कुछ नरम रखें और आस-पास से नुकीली चीजें हटा दें
  • दौरे का समय नोट करें
  • अगर डॉक्टर ने नाक से देने वाली दवाई दी है और आपको उसे इस्तेमाल करना आता है तो दे दें
  • कोई अगर आस-पास हो तो उसे दौरे का वीडियो बनाने के लिए कहें, इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि दौरा दिमाग के किस हिस्से से आ रहा है या यह दौरा है भी या नहीं
  • अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चल रहा है या एक के बाद एक झटके आ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर को बुलाएं या मरीज को अस्पताल लेकर जाएं.

मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या ना करें

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  • मरीज को जबरदस्ती जकड़ें नहीं, रोके नहीं
  • मरीज के मुंह में कुछ ना डालें.

मिर्गी का क्या इलाज है

कुछ आसान टेस्ट से मिर्गी का पता लगयाा जा सकता है. लोगों को एक या 2 दवाओं से दौरे पड़ने बंद हो जाते हैं. जिन्हें दो या दो से ज्यादा दवाओं से आराम नहीं मिलता है उन्हें आगे और जांच कराना जरूरी है. जिन लोगों के दौरे दवाओं से बंद नहीं होते हैं उनकी सर्जरी कराई जा सकती है. कभी-कभी दवाओं के साथ लोगों को स्पेशल डाइट भी दी जाती है.

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मिर्गी के मरीज को क्या करना चाहिए

डॉक्टर की सलाह है कि दौरे के मरीज को दवाएं बीच में छोड़ना नहीं है और डॉक्टर की सलाह के बिना बंद भी नहीं करना है. मिर्गी वाले लोग लगभग सभी काम कर सकते हैं लेकिन उन्हें उंचाई पर, खतरनाक खेलों में, भारी मशीनरी के पास, आग के पास या पानी के अंदर अकेले नहीं जाना है और इन चीजों से दूर भी रहना है. मिर्गी के मरीजों को 8 घंटे की अच्छी नींद लेनी चाहिए, तनाव से बचना चाहिए, मोबाइल और टीवी का कम इस्तेमाल करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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