हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

क्या कैंसर छूने से फैलता है? एक्सपर्ट से जानिए बचपन में हुए कैंसर से जुड़े 5 बड़े मिथक, जिन्हें अब मानना बंद करना होगा

International Childhood Cancer Day 2026: हर साल 15 फरवरी को मनाया जाता है. इस दिन का मकसद बच्चों में होने वाले कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर पहचान और बेहतर इलाज की जरूरत पर जोर देना है. इसलिए हम आपको बचपन में हुए कैंसर से जुड़े 5 बड़े मिथकों के बारे में भी बता रहे हैं.

विज्ञापन
कैंसर होने का मतलब सिर्फ मौत है? Image Credit- News24

Cancer Myths: जब किसी बच्चे को कैंसर होने की खबर मिलती है, तो परिवार ही नहीं, आसपास के लोग भी घबरा जाते हैं और तरह-तरह की धारणाएं बना लेते हैं. ऐसा करना गलत है, क्योंकि इससे बच्चे के दिमाग पर गहरा असर पड़ सकता है. इसके लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर चिंतन व्यास (सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, हीमैटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी) का कहना है कि जब किसी बच्चे को कैंसर होता है तो सिर्फ उसका शरीर नहीं, पूरा परिवार बदल जाता है. मां-बाप की जिंदगी अस्पताल के चक्कर और रिपोर्ट में सिमट जाती है. इसके अलावा, भाई-बहन का रिश्ता भी प्रभावित होता है. बच्चे को इस बीमारी से ज्यादा तकलीफ ये तमाम बातें देती हैं. इसलिए हर साल 15 फरवरी को International Childhood Cancer Day मनाया जाता है. इसका उद्देश्य सरकारों, हेल्थ संगठनों और समाज को एक साथ लाकर बच्चों के कैंसर के इलाज और सपोर्ट सिस्टम को मजबूत बनाना है और कैंसर से जुड़े मिथक को दूर करना है. हम भी आपको 5 ऐसे मिथक बता रहे हैं, जिन पर अक्सर लोग विश्वास कर लेते हैं.  

इसे भी पढ़ें- कॉलेस्ट्रोल कम करने के बाबा रामदेव ने बताए घरेलु नुस्खे, कहा इस तरह पिघलेगी जमी हुई जिद्दी वैक्स

मिथक 1: कैंसर छूने से फैलता है

यह मिथक पूरी तरह से गलत है, क्योंकि कैंसर किसी को छूने, खेलने, खाना शेयर करने या स्कूल जाने से नहीं फैलता है. इसके बावजूद, कई लोग दूरी बना लेते हैं और बच्चों के पास जाना बंद कर देते हैं. ऐसा करना सही नहीं है, क्योंकि यह दूरी बच्चे को अंदर से तोड़ देती है, जो पहले ही इलाज से गुजर रहा होता है.

विज्ञापन

मिथक 2: इसमें माता-पिता की गलती होती है

कई मां-बाप खुद को दोष देने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चे को कैंसर उनकी वजह से हुआ है. हालांकि, सच्चाई यह है कि ज्यादातर मामलों में कैंसर शरीर की कोशिकाओं में अचानक बदलाव होने से होता है. यह किसी की परवरिश, खाने या किसी गलती की वजह से नहीं होता है.

मिथक 3: कैंसर होने का मतलब सिर्फ मौत है

अब पहले के मुकाबले कैंसर का इलाज काफी बेहतर हो गया है. अगर वक्त पर जांच और सही इलाज किया जाए तो कई बच्चे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक, ऐसे कई बच्चे हैं जो इलाज के बाद अपनी जिंदगी को अच्छी तरह से जीते हैं.

विज्ञापन

मिथक 4: इलाज बीमारी से ज्यादा खतरनाक है

कीमोथेरेपी या सर्जरी सुनकर डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन इलाज पूरी सावधानी से किया जाता है. डॉक्टर हर कदम पर बच्चे की हालत पर नजर रखते हैं. हालांकि, कैंसर का इलाज सजा नहीं है, बल्कि बीमारी से लड़ने का सबसे मजबूत तरीका है.

मिथक 5: कैंसर वाले बच्चे को सबसे अलग रखना चाहिए

कैंसर की बीमारी से बचाव जरूरी है, लेकिन पूरी तरह अकेला कर देना ठीक नहीं है. डॉक्टर की सलाह से बच्चा दोस्तों से मिल सकता है और बच्चा स्कूल भी जा सकता है. बस आपको थोड़ी सावधानी जैसे हाथ धोने और मास्क पहनने की जरूरत होती है. इस मौके पर बच्चे को प्यार और साथ की जरूरत सबसे ज्यादा होती है.

विज्ञापन

बचपन का कैंसर कोई छूने वाली बीमारी नहीं है और ना ही यह सजा है. यह एक मेडिकल स्थिति है, जिसका इलाज किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- तोंद सॉफ्ट या टाइट, कौन सा बेली फैट सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक? सच्चाई जानकर हिल जाएंगे आप

विज्ञापन

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola