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बच्चों में किडनी फेल होने पर दिखते हैं ये लक्षण, पैरेंट्स को समय रहते पहचान लेने चाहिए Kidney Failure Signs

Kidney Failure In Children: मध्य प्रदेश और राजस्थान से कफ सिरप पीने के बाद बच्चों के किडनी फेल होने की खबर आ रही है. यहां जानिए किडनी फेलियर में बच्चों के शरीर पर कौन से लक्षण नजर आने लगते हैं.

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Kidney Failure Symptoms: किडनी फेलियर में नजर आते हैं कुछ संकेत. Image Credit - Freepik

Kidney Problems In Children: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप (Cough Syrup) पीने के बाद बच्चों की मौत का मामला सामने आ रहा है. बताया जा रहा है कि बच्चों की कफ सिरप पीने के कारण किडनी डैमेज हो गई और किडनी फेलियर (Kidney Failure) के कारण मासूमों की जान चली गई. सितंबर के महीने में कुछ जिलों के बच्चों को खांसी-जुकाम हुआ जिसके बाद उन्हें कफ सिरप पिलाई गई थी. बच्चों की हालत नाजुक होने लगी तो उन्हें छिंदवाड़ा अस्पताल ले जाया गया जहां से उन्हें नागपुर भेजा गया और बच्चों ने दम दौड़ दिया. कुछ बच्चों का इलाज अबतक जारी है.

भारत सरकार ने कफ सिरप पर जारी की ए़डवाइजरी

बच्चों को कफ सिरप देने को लेकर भारत सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा गया है कि 2 साल से छोटे बच्चे को खांसी-जुकाम की दवाई नहीं दी जानी चाहिए. ये दवाइयां 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं होती हैं और इनके किसी भी तरह के इस्तेमाल में क्लीनिकल इवैलुएशन की जरूरत होती है, साथ ही सुपरविजन, सही डोज, इफेक्ट पड़ने का समय और अलग-अलग दवाइयों के एकसाथ इस्तेमाल जैसी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है.

बच्चों में किडनी फेलियर के लक्षण | Kidney Failure Symptoms In Children

बच्चों में किडनी फेलियर आम नहीं है और आमतौर पर बच्चों में किडनी की समस्या नहीं देखी जाती है. हालांकि, बच्चों के किडनी फेलियर से पहले उनमें पेशाब ना आने (Peshab Na Aana) की दिक्कत देखी जा सकती है. बच्चों का क्रिएटिनिन बढ़ना और पेशाब रुक-रुककर आना किडनी की बीमारियों की तरफ इशारा होता है.

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बच्चों में अक्यूट रेनल फेलियर (Acute Renal Failure) यानी किडनी फेलियर और क्रोनिक रेनल फेलियर यानी क्रोनिक किडनी फेलियर देखा जा सकता है. किडनी तक ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है. यूरिनल ट्रैक्ट में बाधा आने लगती है जिससे पैशाब में दिक्कत होती है. फ्लुइड से भरे सिस्ट भी किडनी में हो सकते हैं. किडनी फएलियर के कुछ लक्षण ऐसे नजर आते हैं –

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  • बच्चों को बुखार (Fever) रहने लगता है
  • शरीर पर रैशेज नजर आते हैं
  • डायरिया हो जाता है जिसमें खून नजर आता है
  • बार-बार उल्टी (Vomiting) आने लगती है
  • पेट में दर्द रहने लगता है
  • पेशाब नहीं आता या बहुत ज्यादा आ सकता है
  • त्वचा पीली पड़ जाती है
  • शरीर के टिशूज सूजने लगते हैं
  • आंखों में सूजन नजर आती है
  • खाने की इच्छा नहीं होती
  • सिर में दर्द रहता है
  • हड्डियों में दर्द हो सकता है
  • मुंह से बदबू आ सकती है
  • और इरिटेटेड फील होता है.

बच्चों में किडनी इंफेक्शन

बच्चों में किडनी इंफेक्शन (Kidney Infection) का खतरा रहता है. किडनी इंफेक्शन तब होता है जब शरीर में बैक्टीरिया या फिर कोई वायरस आ जाता है. किडनी के कई इंफेक्शंस एंटीबायोटिक्स से ठीक हो सकते हैं. हालांकि, कुछ इंफेक्शंस ऐसे हैं जो इंफ्लेमेटरी होते हैं और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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