International Stuttering Awareness Day 2026: बोलते समय बार-बार अटकने को या रुक-रुककर बोलने को हकलाना कहते हैं. बहुत से लोग इस दिक्कत दो-चार होते हैं. ऐसे में हकलाने को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल 22 अक्टूबर के दिन इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे मनाया जाता है. इसे इंटरनेशनल स्टैमरिंग (Stammering) अवेयरनेस डे भी कहते हैं. हकलाने की क्या वजह होती है और इसके जीवन पर असर के बारे में बता रहे हैं एम्स, नई दिल्ली के ENT डिपार्टमेंट के हेड और प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार. आइए प्रोफेसर से ही जानते हैं हकलाने से जुड़ी कुछ जरूरी बातें.
क्या है हकलाने की दिक्कत
डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि हकलाना एक तरह की बोलने की समस्या है जिसमें जब हम बोलते हैं तो बोलने की रिदम प्रभावित होता है. इसके 3 पार्ट हो सकते हैं, किसी शब्द को बार-बार दोहराना, किसी शब्द को खींचना या फिर बोलते हुए शब्द को छोड़ देना. ये हकलाने के 3 फैक्टर्स हो सकते हैं.
हकलाने का क्या कारण होता है
हकलाने का कोई स्पष्ट कारण (Stuttering Causes) नहीं है लेकिन देखा गया है कि यह परिवार में चलती आ रही समस्या होती है, जैसे अगर घर में किसी को हकलाने की दिक्कत है तो यह संभावना रहती है कि बच्चे को भी हकलाने की दिक्कत हो सकती है. इसके अलावा, पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले यह दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है.
बच्चा जब 2 से 5 साल का होता है तब उसका मस्तिष्क डेवलप कर रहा होता है. इस दौरान बच्चे का स्पीच सेंटर भी डेवलप हो रहे होते हैं. इस दौरान हल्का-फुल्का हकलाना या बोलने में दिक्कत होना नॉर्मल है.
प्रोफेसर बताते हैं कि इन दिक्कतों में हकलाना देखा जा सकता है, इसके अलावा हकलाने वाले व्यक्ति की जांच में नाक, कान और गला नॉर्मल ही पाए जाते हैं.
हकलाना व्यक्ति के जीवन को कैसे करता है प्रभावित
किसी दूसरे व्यक्ति तक अपनी बात और ख्याल पहुंचाने के लिए बोलना जरूरी होता है. ऐसे में अगर व्यक्ति हकलाता है तो सबसे पहले उसके दिमाग में यह आता है कि अगर वह कहीं अटका तो लोग उसके बारे में क्या सोचेंगे. उसे लगता है कि लोग सोचेंगे कि वह हकला रहा है. यहीं से दिक्कत शुरू होती है. जब व्यक्ति के दिमाग में यह बात आ जाती है कि वह हकला रहा है तो जहां उसे बोलना होता है वहां भी वह बोलने से बचने लगता है. व्यक्ति कोशिश करता है कि अगर वह नई जगह जा रहा है तो लोग उससे ना मिलें, या वह बाहर ना जाए और घर पर ही रहे. इससे व्यक्ति की सोशल लाइफ प्रभावित होती है.
हकलाने से बचने के लिए व्यक्ति जब बात नहीं करता है तो उसके दोस्त भी नहीं बनते हैं. इससे करियर भी प्रभावित होता है क्योंकि कम्यूनिकेट ना करने पर लोगों को पता नहीं चलता है कि आप क्या कर रहे हैं और इससे आपके काम पर असर पड़ता है. इससे व्यक्ति के कोंफिडेंस पर भी असर पड़ता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.