खबर की मुख्य बातें:
- पोलियो एक गंभीर संक्रामक बीमारी है जिसे पोलियोमाइलाइटिस भी कहते हैं, जो नर्वस सिस्टम पर हमला करती है और कुछ ही घंटों में शरीर को पैरालाइज कर सकती है.
- यह वायरस मुख्य रूप से मल-मुख मार्ग, दूषित पानी या भोजन के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है.
- WHO के अनुसार, 1988 के बाद से वाइल्ड पोलियो वायरस के मामलों में 99% से ज्यादा की कमी आई है, और अब यह सिर्फ दो देशों तक सीमित है.
- पोलियो का कोई इलाज नहीं है, इससे सिर्फ टीके या ड्रॉप की मदद से बचाव किया जा सकता है, जो बच्चे को जीवनभर सुरक्षा दे सकता है.
अच्छी सेहत बनाए रखने की शुरुआत बच्चे के पैदा होने से ही हो जाती है. जब बच्चा दुनिया में आता है, तो उसका इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है, ऐसे में तरह-तरह की बीमारियां उनकी अपना शिकार बना ले, ऐसा खतरा बना रहता है. यही कारण है कि अस्पतालों में बच्चे के पैदा होने से 7-8 साल तक की उम्र तक तरह-तरह की वैक्सीन (टीका) लगता है, इन्हीं टीकों में एक है पोलियो का टीका, जिसका लगना बच्चे के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इस एक टीके की कमी बच्चे को भविष्य के लिए बड़े खतरे में धकेल सकती है, जिसका अभी तक स्पष्ट इलाज भी नहीं निकल पाया है.
यानी की अगर किसी बच्चे को पोलियो की बीमारी हो जाती है, तो दवाओं आदि से उसे ठीक नहीं किया जा सकता है, इसलिए शुरुआत में ही इस बीमारी से बचने के लिए टीका लगाया जाता है. आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर पोलियो की बीमारी है क्या और क्या होगा अगर हम अपने बच्चों को इस बीमारी से बचाव की खुराक न दें? आइए जानते हैं आपके इन्हीं सब सवालों का जवाब.
यह भी पढ़ें: पोलियो होने पर कैसे लक्षण दिखते हैं? UNICEF ने बताया माता-पिता को इस बीमारी से जुड़ी कौन सी बातें जरूर होनी चाहिए पता
क्या है पोलियो की बीमारी?
WHO के अनुसार, पोलियो एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जिसे पोलियोमाइलाइटिस (Poliomyelitis) भी कहा जाता है. यह एक तरह का वायरस है, जो व्यक्ति के नर्वस सिस्टम यानी तांत्रिका तंत्र पर हमला करती है और कुछ ही घंटों में शरीर को पूरी तरह से पैरालिसिस कर सकती है. WHO के अनुसार, इस बीमारी की एक खतरनाक बात ये भी है कि यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में मुख्य रूप से मल-मुख मार्ग (fecal-oral route) से फैलता है, या दूषित पानी या भोजन आदि के जरिए भी फैल सकता है; यह आंतों में जाकर अपनी संख्या बढ़ाता है और व्यक्ति को अपना शिकार बनाता है.
कितने देशों में अभी भी है पोलियो का खतरा?
हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि जब भी किसी के घर बच्चा पैदा हो, तो बिना देरी किए उसके सभी टीका लगवा दें, खासतौर से पोलियो को जरूर लगवाएं. पहले के समय में इस बीमारी ने बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया था. WHO के अनुसार, 1988 के बाद से, वाइल्ड पोलियो वायरस के मामलों में 99% से ज्यादा की कमी आई है. उस समय 125 से ज्यादा देशों में पोलियो फैला हुआ था और अनुमानित 350,000 मामले सामने आए थे, जबकि अब यह सिर्फ दो देशों तक सीमित रह गया है, जिनमें भी काम तेजी से चल रहा है.
पोलियो की बीमारी में कैसे दिखते हैं लक्षण?
WHO के अनुसार, पोलियो मुख्य रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है. हालांकि, किसी भी उम्र का व्यक्ति, जिसने टीका नहीं लगवाया है, इस बीमारी की चपेट में आ सकता है, इसलिए अगर आपने कभी पोलियो का टीका नहीं लगवाया है या ड्रॉप नहीं पिया है, तो बेहतर रहेगा कि आप डॉक्टर से जाकर इसकी सलाह लें, ताकि अगर बीमारी का खतरा बढ़े, तो आप सुरक्षित रह सके. अब सवाल उठता है कि अगर किसी को पोलियो की बीमारी पकड़ लेती है, तो उसे कैसे लक्षण दिखाई देंगे? जब किसी बच्चे को पोलियो की बीमारी शिकार बना लेती है, तो शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न और अंगों में दर्द आदि समस्या महसूस होने लगती है. हर 200 संक्रमणों में से एक मामले में लकवा (आमतौर पर पैरों में) हो जाता है. लकवाग्रस्त लोगों में से 5-10% की मौत हो जाती है, जब उनकी सांस लेने वाली मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं.
क्या पोलियो की बीमारी ठीक हो सकती है?
पोलियो कोई मामूली बीमारी नहीं है, जो एक बार किसी को अपना शिकार बना लें, तो दवा या इलाज से ठीक हो जाए, बल्कि इसका कोई इलाज नहीं है, इससे सिर्फ बचाव किया जा सकता है. पोलियो का टीका या ड्रॉप, जो कई बार दिया जाता है, बच्चे को जीवनभर के लिए सुरक्षा दे सकता है. इसके लिए दो तरह के टीके उपलब्ध हैं: ओरल पोलियो वैक्सीन (मुंह से दी जाने वाली) और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (इंजेक्शन के जरिए दी जाने वाली). दोनों ही टीके असरदार और सुरक्षित हैं और दुनियाभर में दिए जाते हैं. भारत में पोलियो के मामले न बढ़े, उसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक देते हैं.
किन लोगों को सोच समझकर लेना चाहिए पोलियो का टीका?
पोलियो का टीका जरूरी है, लेकिन इसके साथ ये जानना भी जरूरी है कि किन लोगों को इसका टीका लेने से पहले सलाह लेनी चाहिए? CDC के अनुसार, पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए इसका टीका बहुत जरूरी है, लेकिन जिन लोगों में IPV की खुराक से गंभीर (जानलेवा) एलर्जिक रिएक्शन होने का डर है या किसी तरह की समस्या से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही खुराक लेना बेहतर है. इसके अलावा अगर आपके घर में बच्चा पैदा हुआ है, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें कि बच्चे को कब टीका लगेगा और कैसे वह लगवा सकते हैं. कई बार माता-पिता टीका लगवाना भूल जाते हैं या फिर उन्हें जानकारी ही नहीं होती है कि ये टीका लगवाने के लिए कहां जाना होगा. इस तरह की लापरवाही बच्चे के जीवन पर असर डालती है, इसलिए इस बीमारी को लेकर जागरूकता काफी जरूरी है, ताकि परिवार में ये बीमारी गलती से भी न पनपे.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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