Fatty Liver Treatment: लिवर में एक्सेस फैट जमने पर फैटी लिवर डिजीज (Fatty Liver Disease) हो जाती है. अक्सर ही फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं और ये लक्षण आम दिक्कतों जैसे ही लगते हैं, जैसे हर समय शरीर में थकान रहना, पेट की दाईं ओर दर्द होना और त्वचा पर खुजली वगैरह. ऐसे में समय रहते फैटी लिवर को पहचानकर ठीक करना जरूरी होता है. लोगों को लगता है कि फैटी लिवर की दिक्कत एक बार हो जाए तो ठीक नहीं होती है और उम्रभर व्यक्ति को दवाएं खानी पड़ती है. लेकिन, एक मरीज का उदाहरण देते हुए रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष व्यास बताते हैं कि दवाओं से नहीं बल्कि लाइफस्टाइल के सिर्फ 2 बदलावों से ही फैटी लिवर ठीक हो जाता है. आइए जानते हैं डॉक्टर किन लाइफस्टाइल चेंजेस की बात कर रहे हैं.

कैसे ठीक होगा फैटी लिवर

डॉक्टर ने बताया कि एक मरीज ग्रेड 2 फैटी लिवर (Grade 2 Fatty Liver) के साथ उनके पास आया था और सिर्फ 6 महीने बाद ही उसका फैटी लिवर लगभग नॉर्मल हो गया. मरीज को इसके लिए कोई दवा नहीं लेनी पड़ी, महंगे सप्लीमेंट्स नहीं लेने पड़े बल्कि लाइफस्टाइल में किए गए 2 बदलाव ही असर दिखाने में कामयाब रहे.

---खबर नीचे जारी है---

पहला बदलाव - मरीज की डाइट को पहले जैसा ही रखा गया और उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया. सिर्फ बेसल मेटाबॉलिक रेट जितना था उतनी ही कैलोरी मरीज को लेने के लिए कही गई और उसे बैलेंस्ड डाइट लेने के लिए कहा गया. लेकिन, मरीज ने हफ्ते में एक बार कम से कम 24 से 36 घंटों का फास्ट यानी उपवास रखना शुरू किया. इसमें मरीज को वॉटर फास्ट रखने के लिए कहा गया था.

---खबर नीचे जारी है---

दूसरा बदलाव - फैटी लिवर के मरीज को हफ्ते में 4 से 5 दिन स्ट्रेंथ ट्रैनिंग करने के लिए कहा गया. इसके 6 महीने बाद जब मरीज का अल्ट्रासाउंड किया गया था फैटी लिवर में बदलाव देखन को मिले. इससे व्यक्ति का वजन कम होने लगा.

---खबर नीचे जारी है---

डॉक्टर ने बताया कि यह सिर्फ वजन घटने की कहानी नहीं है बल्कि यह मेटाबॉलिक रिवर्स है. क्लीनिकल ट्रायल्स के सिस्टेमिट रिव्यू में दिखा कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से लिवर में जो फैट होता है वो कम होता है और इंसुलिन की सेंसिटिविटी भी एसजीपीटी, एसजीओटी और जो इंफ्लेमेटरी मार्कर्स हैं वो भी घटे. जब फास्टिंग को एक्सरसाइज के साथ किया गया तो इंट्रेफेटिक ट्राइग्लाइसेराइड में लगभग 5.5% की कमी देखी गई. डॉक्टर के अनुसार, कुछ स्टडीज में सिर्फ 8 से 12 हफ्तों में फैटी लिवर का स्कोर और बीएमआई दोनों में सुधार देखने को मिला.

---खबर नीचे जारी है---

उपवास करना क्यों है फायदेमंद

---खबर नीचे जारी है---

फैटी लिवर में फास्ट करने पर यह होता है कि लिवर में जो ग्लाइकोजन होता है वो खत्म हो जाता है यानी लिवर में जो जमा हुआ ट्राइग्लाइसेराइड होता है वो टूटना चालू हो जाता है. ऐसे में अगर उपवास के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी की जाए तो मसल के अंदर का जो भी ग्लाइकोजन होता है वो यूज होने लगता है. मसल में इंसुलिन सेंसिटिविटी ज्यादा होती है और ग्लूकोज यूज होने के कारण बॉडी में जो एक्सेस ग्लूकोज है वो लिवर में नए फैट में कंवर्ट नहीं होता है.

डॉक्टर का कहना है कि फैटी लिवर ठीक करने की कोई गोली नहीं है, या तो लाइफस्टाइल बदलना जरूरी है या फिर फैटी लिवर लंबे समय तक रखकर बीमारी को पनपते देखना पड़ता है. फैटी लिवर को समय रहते ठीक ना किया जाए तो यह फाइब्रोसिस का कारण बन सकता है या सिरोसिस हो सकता है. इसीलिए समय रहते फैटी लिवर को ठीक करना जरूरी होता है.

फास्टिंग की शुरुआत कैसे करें

डॉक्टर की सलाह है कि अगर आपको फैटी लिवर की दिक्कत है तो शुरू में 8 से 12 घंटे का उपवास किया जा सकता है और आगे चलकर 16 घंटे का उपवास कर सकते हैं. अगर आप हेल्दी हैं तो मेडिकल सुपरविजन में 24 घंटे तक फास्ट कर सकते हैं. हफ्ते में एक बार या 15 दिन में एक बार उपवास जरूर करें. हफ्ते में 4 से 5 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें और शुगर के साथ ही रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स बंद कर दें और बैलेंस्ड डाइट लेना शुरू कर दें. डॉक्टर का कहना है कि फैटी लिवर साइलेंट जरूर होता है लेकिन इसकी आखिरी स्टेज साइलेंट नहीं होती है. ऐसे में पहले ही लाफइस्टाइल के बदला कर लिए जाएं तो बीमारी ज्यादा नहीं बढ़ती है.

यह भी पढ़ें - गुर्दे की बीमारी का सबसे बड़ा संकेत क्या है? यहां जानिए किडनी खराब होने की शुरुआत कैसे होती है

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.