Gehun Ki Roti Kinhe Nhi Kaani Chaiye: भारतीय घरों में गेहूं की रोटी खाना बहुत आम बात है. सुबह की शुरुआत में पराठे की शक्ल से लेकर रात की थाली तक गंहू की रोटी जरूर से होती है. गेहूं की रोटी फाइबर, प्रोटीन और जरूरी विटामिन से भरपूर होती है. यह लंबे समय तक पेट भरा रखती है, ऊर्जा देती है और दिल व वजन नियंत्रण में मदद करती है. लेकिन इसके इतने सारे गुण होने के बावजूद कुछ लोगों के लिए इसका सेवन अच्छा नहीं माना जाता है, दूसरी शब्दों में कहें तो उनके लिए गेंहू की रोटी जहर से कम नहीं है. आइए जानते हैं आखिर किन्हें नहीं खाना चाहिए गेंहु की बनी रोटी और क्यों?
यह भी पढ़ें: थायरॉयड में क्यों अचानक बढ़ने लगता है मरीज का वजन? जानिए क्या है कारण
ग्लूटेन से जुड़ी समस्या वाले लोग
गेहूं में मौजूद ग्लूटेन कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. सीलिएक डिजीज (Celiac Disease) एक ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर ग्लूटेन (Gluten) को सहन नहीं कर पाता और छोटी आंत को नुकसान पहुंचता है. इससे शरीर जरूरी पोषक तत्व ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे एनीमिया (Anemia) और हड्डियों की कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा, नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी (Non-celiac gluten sensitivity) में भी पेट फूलना, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, इसलिए ऐसे लोगों को गेहूं से परहेज करना चाहिए.
पीसीओडी, पीसीओएस और हार्मोनल असंतुलन
आजकल कई महिलाओं में पीसीओडी और पीसीओएस (PCOD and PCOS) की समस्या बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक ग्लूटेन और रिफाइंड आटे का सेवन शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, जिससे हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस की परेशानी बढ़ सकती है. इससे वजन घटाना भी मुश्किल हो जाता है. इसलिए ऐसी स्थिति में संतुलित आहार और दूसरे अनाज, जैसे ज्वार, बाजरा आदि को अपनाना फायदेमंद हो सकता है.
डायबिटीज और वजन बढ़ने का खतरा
जिन लोगों को डायबिटीज (Diabetes) या इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) की समस्या है, उनके लिए गेहूं की रोटी सीमित मात्रा में ही लेना बेहतर माना जाता है. गेहूं का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम से ऊंचा हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. ज्यादा रिफाइंड आटा खाने से वजन बढ़ने और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की आशंका भी रहती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से ज्वार, बाजरा या मल्टीग्रेन आटा का सेवन करें, यह गेंहू से ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकते हैं.
आईबीएस और पाचन संबंधी दिक्कतें
इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम (IBS) या अन्य पाचन समस्याओं से जूझ रहे लोगों को गेहूं की रोटी खाने के बाद गैस, पेट फूलना या कब्ज की शिकायत हो सकती है. गेहूं में मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट्स आंत में फर्मेंट होकर असहजता पैदा कर सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह से दूसरे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी अपनाई जा सकती है.
यह भी पढ़ें: बच्चों की हाइट कैसे बढ़ाएं? आजमाएं ये आसान टिप्स, जल्दी दिखने लगेगा असर
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
संबंधित खबरें
क्या अंडा खाने से बढ़ता है कैंसर का खतरा? डॉक्टर से जानिए सच
11 hrs agoहाथ-पैर पर दिखने वाली गांठ कैंसर की है या नहीं कैसे पता चलेगा
1 day agoक्या कैंसर परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है? जानिए पूरी सच्चाई
1 day agoविटामिन B12 की कमी से शरीर में क्या होता है? बॉडी में दिख सकते हैं ये लक्षण
1 day agoहाई बीपी से लेकर डायबिटीज तक, ये बीमारियां बढ़ा सकती हैं स्ट्रोक का खतरा
1 day agoशुगर के मरीज क्या रख सकते हैं व्रत? मीठा खाया तो क्या होगा
2 days agoमौसम बदलते ही पड़ जाते हैं बीमार? जानिए इसके पीछे की असली वजह
2 days agoपीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स को न करें इग्नोर, शरीर के ये संकेत हैं गंभीर
2 days agoब्रेन ट्यूमर में कैसा होता है सिरदर्द, डॉक्टर ने बताए लक्षण और इलाज
2 days agoकरवा चौथ पर निर्जला व्रत रखते हैं? शरीर के इन संकेतों को न करें इग्नोर
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines