जब हम सोते हैं तो सपने आना स्वाभाविक है। कभी-कभी हमें खराब सपने भी आते हैं। इन सपनों को देखकर कई बार हम सहम भी जाते हैं। हालांकि ऐसे सपने कभी-कभी आना तो नॉर्मल है, लेकिन अगर आपको हर हफ्ते बुरे सपने आते हैं तो यह एक गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं।
लंदन में हुई एक स्टडी के अनुसार बार-बार बुरे सपने आना समय से पहले मौत का संकेत हो सकते हैं। इस खतरे को स्मोकिंग, मोटापा और खराब डाइट से भी अधिक माना गया है। इम्पीरियल कॉलेज लंदन में करीब 1.80 लाख लोगों पर यह स्टडी की गई, जिसके नतीजे काफी चौंकाने वाले थे।
क्या कहती है स्टडी?
इम्पीरियल कॉलेज लंदन के डॉ. अबिदेमी ओटाइकू ने अमेरिका और ब्रिटेन में हुईं 6 बड़ी स्टडीज का विश्लेषण किया। इसमें करीब 1.80 लाख से अधिक व्यस्क और 2500 बच्चों को शामिल किया गया। इसमें हर हफ्ते बुरे सपने देखने वाले लोगों के अंदर 70 साल की उम्र से पहले मौत का खतरा तीन गुना अधिक पाया गया। स्टडी के अनुसार 174 लोगों की समय से पहले मौत हुई थी। इसमें से 31 लोगों को अक्सर बुरे सपने आते थे। विशेषज्ञों की मानें तो बुरे सपने देखने से बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है।
तेजी से बढ़ने लगती है उम्र
डॉ. ओटाइकू ने बताया कि जिन लोगों को बार-बार बुरे सपने आते हैं, उनके क्रोमोसोम में उम्र तेजी से बढ़ने से संकेत मिले हैं। इसकी वजह बुरे सपनों के कारण रिलीज होने वाले स्ट्रेस हॉर्मोन भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि समय से पहले मौत के खतरे में 40 प्रतिशत से अधिक का योगदान इन्हीं क्रोमोसोम में बदलाव का है।
कई मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से भी है संबंध
बुरे सपने आने का संबंध कई मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से भी है। इसमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, स्किजोफ्रेनिया और पीटीएसडी जैसी मानसिक बीमारियां भी हैं। क्रॉनिक पेन और ल्यूपस जैसी ऑटो इम्यून बीमारियों में भी बुरे सपने आना आम लक्षण है। रिसर्च में यह भी बात सामने आई है कि पार्किंसन और डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पहले भी बुरे सपने आने की आशंका रहती है। इससे हार्ट से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं।
बुरे सपने देखने वाले बढ़े हैं मरीज
विशेषज्ञों की मानें तो हर महीने बुरे सपने देखने वालों की संख्या 29 प्रतिशत तक होती है। वहीं, सप्ताह में एक या इससे अधिक बार बुरे सपने देखने वालों की संख्या 6 प्रतिशत तक है। साल 2021 में 11 प्रतिशत लोगों ने अक्सर बुरे सपने देखे थे। वहीं, 2019 में ऐसे लोग सिर्फ 6.9 प्रतिशत थे।
साइकोथेरेपी हो सकती है मददगार
विशेषज्ञों की मानें तो बुरे सपनों का इलाज तो आसान नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में साइकोथेरेपी काफी हद तक मदद कर सकती है। हालांकि इस दिशा में अभी तक ज्यादा रिसर्च तो नहीं हुई है, लेकिन बुरे सपनों लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये बुरे सपने गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी रिसर्च पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।