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आप भी खाते हैं वनस्पति घी? AIIMS की डाइटीशियन ने बताया दिल पर क्या असर डालता है डालडा

Transfat Side Effects: दिल की सेहत दुरुस्त रखने के लिए खानपान का अच्छा होना जरूरी है. ऐसे में डालडा घी का सेवन दिल पर क्या असर डालता है और इसमें कितना ट्रांस फैट होता है, जानिए यहां.

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क्या डालडा घी खाना चाहिए?

Dalda And Heart Disease: दिल की बीमारियां व्यक्ति को एकबार घेरती हैं तो उम्रभर साथ रहती हैं, ये दिल की बीमारियां ही हैं जो मरीज की जान पर बन आती हैं. इसीलिए कोशिश यही रहती है कि दिल को स्वस्थ्य रखा जाए और हार्ट डिजीज के खतरे से बचकर रहें. लेकिन, रोजमर्रा की एक बड़ी गलती दिल के लिए हानिकारक साबित होती है. यह गलती है ट्रांस फैट का सेवन. साधारण घी-तेल नहीं बल्कि वनस्पति घी (Vanaspati Ghee) या कहें डालडा ट्रांस फैट (Trans Fat) का भरपूर स्त्रोत है. AIIMS की डाइटीशियन ने बताया दिल पर डालडा का क्या असर पड़ता है.

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ट्रांसफैट का सेहत पर क्या असर होता है

AIIMS के डिपार्टमेंट ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की डाइटीशियन मोनिका गहलोत ने बताया, हम रोजमर्रा में जो वसा खाते हैं उसमें सबसे ज्यादा हानिकारक किस्म की वसा ट्रांस फैट है. इसका शरीर को कोई फायदा नहीं मिलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन, WHO की मान्यता के अनुसार, अगर व्यक्ति 2000 कैलोरी का खाना खा रहा है तो उसके खाने में 2.2 ग्राम से ज्यादा ट्रांस फैट नहीं होना चाहिए. अगर प्रतिदिन के खाने में इससे ज्यादा ट्रांस फैट होगा तो दिल की बीमारियों का खतरा 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा.

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याद रखना जरूरी है कि ट्रांसफैट की मात्रा रोजाना खाने की कुल कैलोरी के 1 प्रतिशत से भी कम होना चाहिए. एक वयस्क व्यक्ति अगर रोजाना 2000 कैलोरी लेता है तो उसके खाने में 2 ग्राम से भी कम ट्रांस फैट होना चाहिए. जितना कम ट्रांस फैट खाया जाएगा उतनी ही अच्छी सेहत रहेगी.

ट्रांस फैट के सेवन से कैसे बचें

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डाइटीशियन बताती हैं कि ट्रांस फैट मुख्य रूप से मीट और डेयरी यानी दूध और दूध से बनी चीजों में पाया जाता है. लेकिन, इसकी संरचना प्राकृतिक होती है और इसकी मात्रा इतनी कम होती है कि वो शरीर के लिए ज्यादा हानिकारक नहीं होता है. मुख्यतौर पर जो हानिकारक ट्रांस फैट (Harmful Trans Fat) होता है उसे कृत्रिम रूप से बनाया जाता है. खासकर वेजीटेबल ऑयल को सोलिड फैट में बदलने की प्रक्रिया यानी वनस्पति घी या डालडा बनाने के प्रोसेस में ट्रांस फैट काफी मात्रा में बन जाता है. इसी वनस्पति घी के इस्तेमाल से जितने भी प्रोडक्ट्स या खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं वो ट्रांस फैट का बड़ा स्त्रोत हो सकते हैं. इसके अलावा, तला हुआ भोजन और वो भी बार-बार तलकर बनाया गया भोजन ट्रांसफैट से भर जाता है.

ट्रांस फैट को पहचानना है जरूरी

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डाइटीशियन की सलाह है कि ट्रांस फैट से बचने के लिए सबसे पहले पैकेट वाले फूड आइटम्स में देखें कि ट्रांस फैट कितना है. पैकेट वाले फूड्स के लिए नियम बन गए हैं जिसके बाद वनपस्ति घी में ट्रांसफैट की मात्रा पहले 40 प्रतिशत थी और अब 2 प्रतिशत हो गई है, यानी 100 ग्राम डालडा में 2 ग्राम से ज्यादा ट्रांस फैट नहीं होता है. लेकिन, फिर भी कोशिश यही करनी है कि वनस्पति घी से बनी चीजों से ज्यादा से ज्यादा परहेज किया जाए.

पैकेट पर चेक करें कि ट्रांस फैट की मात्रा कितनी है. अगर ट्रांस फैट की मात्रा 0 प्रतिशत लिखी है तो उसके इंग्रीडिएंट्स चेक करें, अगर इंग्रीडिएंट्स में कहीं पर भी हाइड्रोजनरेटेड वेजीटेबल ऑयल या वनस्पति घी लिखा है तो उन फूड्स को हमें कम खाना है. तली हुई चीजों और बेकरी फूड्स से भी परहेज किया जाना जरूरी है.

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खाने के तेल पर भी रखें नजर

यह देखें कि बार-बार तलने वाले स्ट्रीट फूड को हमें कम खाने की कोशिश करनी है. इस बात का भी ध्यान रखें कि किस तेल में खाना पकाया जा रहा है. अगर तेल का रंग प्राकृतिक से अलग दिखे, बार-बार एक ही तेल में फूड तला जा रहा हो, तेल चिपचिपा और गाढ़ा हो गया है, अगर उस तेल में झाग बन रहे हैं या उस तेल से लगातार धुआं उठ रहा है तो यह सारे लक्षण बताते हैं कि यह तेल आपके लिए ठीक नहीं है. इस तरह के तेल में बने भोजन को बिल्कुल ना खाएं. साथ ही, किस खाने की चीज में क्या इंग्रीडिएंट डाला गया है यह आपको नहीं पता है तो आपको इस फूड से भी बचना है. आपको जानना है कि खाने में कितन डालडा का इस्तेमाल किया गया है.

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घर में ध्यान रखें ये बातें

ट्रांसफैट से बचने के लिए खाने को कम से कम तलने की कोशिश करनी है. अगर कुछ तलना भी है तो एक बार तले हुए तेल को दोबारा ना तलें. दैनिक आहार में ट्रांसफैट को पहचानें और वनपस्ति घी से दूर रहकर दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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