गुजरात में चांदीपुरा वायरस से गई 6 बच्चों की जान, क्या है यह Chandipura Virus और कैसे दिखते हैं इसके लक्षण, जानिए यहां

Chandipura Virus Symptoms: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के चलते अबतक 6 मासूमों की जान जा चुकी है. ऐसे में यह वायरस क्या है, कैसे फैलता है और इससे किस तरह बचकर रहा जा सकता है, यह पता होना जरूरी है.

Chandipura Virus

चांदीपुरा वायरस से संक्रमित होने पर कैसे लक्षण नजर आते हैं?

What Is Chandipura Virus: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के आउटब्रेक ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है. इस वायरस से अबतक 6 बच्चों की जान जा चुकी है. इनमें 4 मौतें हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान हुई हैं और 2 बच्चों की जान पंचमहल जिले के गोधरा में गई थी. चांदीपुरा वायरस (CHPV) सैंड फ्लाई नामक कीड़े के काटने से फैलता है. यह वायरस ज्यादातर 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाता है. इसे तेजी से बढ़ने वाला वायरस कहा जाता है जोकि 48 से 72 घंटों के बीच गंभीर हो जाता है. ऐसे में यहां जानिए चांदीपुरा वायरस कैसे फैलता है और इसके लक्षणों को किस तरह पहचाना जा सकता है.

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कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस

चांदीपुरा वायरस मुख्यरूप से मादा सैंडफ्लाईज के काटने से फैलता है. इस वायरस को फीमेल सैंड फ्लाइज के अलावा मच्छर या अन्य छोटे कीड़े भी कैरी कर सकते हैं. हालांकि, इसके बहुत मजबूत स्त्रोत मौजूद नहीं हैं. यह वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता है या खांसने, छूने या हाथ लगाने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता है.

चांदीपुरा वायरस के क्या लक्षण हैं

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चांदीपुरा वायरस से संक्रमित होने के बाद बुखार, सिर में दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. यह वायरस तेजी से फैलता है और दिमाग में सूजन होने तक की वजह बन सकता है. इस वायरस से संक्रमण के बाद दौरे पड़ने, होश खोने और न्यूरोलॉजिकल दिक्कतों की संभावना भी बढ़ जाती है.

यह वायरस तेजी से बढ़ता है और गंभीर रूप ले लेता है इसीलिए इसकी जल्द से जल्द पहचान करना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. अगर बच्चों में इस तरह के लक्षण (Chandipura Virus Symptoms) नजर आते हैं तो बच्चों को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं.

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चांदीपुरा वायरस का इलाज कैसे होता है

चांदीपुरा वायरस की अबतक कोई सटीक वैक्सीन या इलाज नहीं है. यही इससे जुड़ा सबसे बड़ा चैलेंज भी है. चांदीपुरा वायरस से संक्रमित मरीज का इलाज बुखार को कंट्रोल करते हुए, दौरे और दिमाग की सूजन को कम करने की कोशिश के साथ होता है. इस वायरस के लक्षणों को टार्गेट करते हुए इलाज किया जाता है.

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इस वायरस की चपेट में आए बच्चों का इलाज अगर समय पर शुरू कर दिया जाए तो लॉन्ग-टर्म न्यूरोलॉजिकल डैमेज से बचा जा सकता है. ऐसे में वैक्सीन ना होने के चलते इस वायरस से बचे रहना सबसे ज्यादा जरूरी है.

कैसे होगा इस वायरस से बचाव

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चांदीपुरा वायरस से बचे रहने के लिए बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं, कोशिश करें कि घर के आस-पास पानी जमा ना हो, कीड़े ना भटकें, कीड़े मारने वाली दवाओं और जालों का इस्तेमाल करें. बच्चों के साथ ही बड़ों को भी इस वायरस से बचने की कोशिश करनी चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.  

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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