✕
  • होम
  • देश
  • प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • बिहार
    • झारखंड
    • दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हरियाणा
    • हिमाचल
    • गुजरात
    • मुंबई
  • दुनिया
  • क्रिकेट
  • मनोरंजन
    • ओटीटी
    • टेलीविजन
    • बॉलीवुड
    • भोजपुरी
    • मूवी रिव्यू
  • चुनाव
  • बिजनेस
  • ऑटो
  • गैजेट्स
  • ज्योतिष
  • Latest News
  • More
    • Opinion
    • लाइफस्टाइल
    • नॉलेज
    • खेल
    • नौकरी
    • साइंस
    • ट्रेंडिंग
    • शिक्षा
    • हेल्थ
  • लेटेस्ट न्यूज
  • T20 वर्ल्ड कप
  • खेल
  • एंटरटेनमेंट
  • ज्योतिष
  • देश
  • प्रदेश
  • हेल्थ
  • गैजेट्स
  • ऑटो
  • ट्रेंडिंग
  • दुनिया
  • Opinion
  • नॉलेज
  • नौकरी
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
  • शिक्षा
  • Explainer
  • वीडियो
  • Religion
  • क्राइम
TrendingIsraelIran Israel War

---विज्ञापन---

हिंदी न्यूज़ / हेल्थ / युवाओं में कैंसर के लक्षण बढ़ाते हैं ये 7 फैक्टर, बिगड़ते लाइफस्टाइल पर हुई रिसर्च में खुलासा

युवाओं में कैंसर के लक्षण बढ़ाते हैं ये 7 फैक्टर, बिगड़ते लाइफस्टाइल पर हुई रिसर्च में खुलासा

Cancer Risks In Young Adults: युवाओं में अब कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे है। एक स्टडी के अनुसार, इसके पीछे हमारी बिगड़ती जीवनशैली के साथ-साथ कई अन्य वजह भी शामिल हैं, आइए जान लेते हैं..

Image Credit: Freepik
Edited By: Deepti Sharma | Updated: Jul 15, 2024 10:13
Cancer Risks In Young Adults: कैंसर एक खतरनाक बीमारी है, लेकिन आज कल ज्यादातर नौजवान इससे ग्रस्त हो रहे हैं। ऐसा हम नहीं, बल्कि हाल ही में हुई एक स्टडी में इसका खुलासा हुआ है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी में प्रकाशित स्टडी की मानें तो युवाओं में अब कैंसर होने का चांस ज्यादा हो सकता है। कैंसर होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें मोटापा, स्मोकिंग, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, शराब का सेवन, अनसेफ तरीके से सेक्स करना, हार्मोन में गड़बड़ी, ज्यादा खराब खान-पान होना आदि शामिल है, लेकिन कैंसर के बढ़ते खतरे को लगभग रोका जा सकता है, अगर लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करते हैं।

ये 7 फैक्टर हैं कैंसर के लिए जिम्मेदार 

स्मोकिंग

स्मोकिंग करने वाले लोगों में कैंसर का जोखिम बढ़ गया है। स्मोकिंग करीब 10 से ज्यादा प्रकार के कैंसर से जुड़ा हुआ है, जिसमें फेफड़े और मुंह के कैंसर के साथ-साथ ब्लड, यूटेराइन सर्विक्स, यूरिनरी ब्लैडर, पेनक्रियाज, पेट, लिवर और किडनी के कैंसर शामिल हैं। धूम्रपान छोड़ने से व्यक्ति को मुंह, गले, फेफड़े या साउंड बॉक्स का  कैंसर होने की संभावना आधी हो जाती है। धूम्रपान छोड़ने के 20 साल के अंदर मुंह, गले या पेनक्रियाज के कैंसर होने का जोखिम धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति के जोखिम के करीब हो जाता है।

बॉडी वेट

ज्यादा वजन होने से व्यक्ति को 13 टाइप के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, जो यू.एस. में सालाना ठीक किए जाने वाले सभी कैंसर का 40% है। अपने डेली रूटीन में पैदल चलना शामिल करने से वजन कम करने की स्ट्रेटेजी हो सकती है। वजन घटाने वाली दवाओं से कैंसर के खतरे को कम करने वाली नई स्टडी के बारे में जानना चाहिए। आपका जितना ज्यादा वजन होगा, आप जितने लंबे समय तक ज्यादा वजन वाले रहेंगे, कैंसर होने का खतरा उतना ही अधिक होगा। लोग अपने बॉडी मास इंडेक्स या बी.एम.आई. को कैलकुलेट करके यह निर्धारित कर सकते हैं कि उनका हेल्दी वेट है या नहीं।

शराब का सेवन

महिलाओं के लिए, प्रति सप्ताह शराब का सेवन शराब की सात सर्विंग के रूप में बताया गया है। पुरुषों के लिए, यह प्रति सप्ताह शराब की 14 सर्विंग या उससे कम है। ज्यादा मात्रा में शराब पीने को आमतौर पर महिलाओं के लिए प्रति सप्ताह आठ या उससे अधिक ड्रिंक्स और पुरुषों के लिए 15 या उससे अधिक ड्रिंक के रूप में डिफाइन किया जाता है।

खराब आहार

अगर कोई रेड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करता है और फल और सब्जियां, डाइट फाइबर और कैल्शियम का सेवन नहीं करता है तो उसे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। डाइट में अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन फूड्स पर जोर देने की सलाह दी गई है, जिसमें मांस और मुर्गी, अंडे, सी फूड्स और बीन्स और मटर शामिल हैं। फलों, सब्जियां और साबुत अनाज के सेवन और अपने भोजन में ज्यादा शुगर, सोडियम, सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को सीमित करना चाहिए।

व्यायाम की कमी

इनएक्टिव रहने से व्यक्ति को कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है। एडल्ट के लिए फिजिकल एक्टिविटी दिशानिर्देश प्रति सप्ताह कम से कम 150 से 300 मिनट की एक्टिविटी या एरोबिक फिजिकल एक्टिविटी या दोनों को मिलाकर कर सकते हैं।

कैंसर की जांच न करना

रेगुलर डॉक्टर से मिलना और कैंसर की जांच करवाना कैंसर के जोखिम को कम करने के जरूरी फैक्टर हैं। यू.एस. प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स बेस्ट कैंसर होने के जोखिम वाली महिलाओं के लिए हर दूसरे साल मैमोग्राम के साथ ब्रेस्ट कैंसर की जांच की सिफारिश करती है, जो 40 साल की आयु से शुरू होती है। एडल्ट को 45 साल की आयु से 75 साल की आयु तक कोलोरेक्टल कैंसर की जांच शुरू करनी चाहिए। अगर आप 75 साल से ज्यादा उम्र के हैं तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सूरज के संपर्क में आना  

रिसर्च से पता चलता है कि सनस्क्रीन का रेगुलर इस्तेमाल करने से मेलेनोमा के खतरे को लगभग 70% तक कम करने में मदद कर सकता है। इसके कुछ अन्य लाभ भी हैं, जैसे यह यूवी रेडिएशन के कारण झुर्रियों और त्वचा के रंग में होने वाले बदलावों को रोकने में मदद कर सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी लोगों को एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा, वाटर रेसिस्टेंट के साथ सनस्क्रीन का उपयोग करने की सलाह देती है। बाहर जाने पर, तैराकी करने या पसीना आने के बाद सनस्क्रीन को लगभग हर दो घंटे में दोबारा लगाना चाहिए। ये भी पढ़ें-  कितना खतरनाक है दिमाग खाने वाला अमीबा? तैरने गए शख्स की ले ली जान; जानिए लक्षण और बचाव के तरीके
Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य ले लें। News24 की ओर से कोई जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।  


Topics:

Cancer Riskhealth newsLifestylespecial-news

---विज्ञापन---

© B.A.G Convergence Pvt. Ltd. 2024 : All Rights Reserved.