Brain Tumor Causes and Remedies: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सिरदर्द, चक्कर या थकान जैसी समस्याओं को आम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कभी-कभी यही छोटे लक्षण किसी बड़ी बीमारी का संकेत दे रहे हों ऐसा भी हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है, जो शुरुआत में साफ संकेत नहीं देती. लेकिन जब इसका मालूम चलता है, तो अक्सर लोग इस गंभीर बीमारी के शिकार हो चुके होते हैं, और उन्हें एक लंबी जंग लड़नी पड़ती है. इसलिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, अगर शरीर बार-बार कुछ अलग संकेत दे रहा है, तो उन्हें हल्के में लेना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं ब्रेन ट्यूमर के बारे में और इससे बचाव और लक्षणों के बारे में विस्तार से...
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ब्रेन ट्यूमर क्या होता है और कैसे बनता है खतरा
ब्रेन ट्यूमर दिमाग में बनने वाली असामान्य कोशिकाओं का समूह होता है. ये कोशिकाएं कभी कैंसर वाली हो सकती हैं और कभी बिना कैंसर की. मेडिकल भाषा में इन्हें बेनाइन (Benign) और मेलिग्नेंट (Malignant) ट्यूमर कहा जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, ब्रेन ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ सकता है और कई बार सालों तक कोई खास लक्षण नहीं दिखाता. लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, दिमाग के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है. इसी कारण सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, याददाश्त कमजोर होना और नजर से जुड़ी दिक्कतें सामने आने लगती हैं. समय रहते इसकी पहचान न होने पर इलाज काफी हद तक मुश्किल सकता है.
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ब्रेन ट्यूमर से बचाव के लिए क्या करें?
ब्रेन ट्यूमर से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें जोखिम कम कर सकती हैं:
- बिना जरूरत बार-बार एक्स-रे, सीटी स्कैन या रेडिएशन जांच से बचें.
- केमिकल युक्त पदार्थों जैसे पेंट, फ्यूल और तेज गंध वाले तरल पदार्थों से दूरी रखें.
- रोजाना योग, हल्की एक्सरसाइज या वॉक को अपनी डेली लाइफ रूटीन में शामिल करें.
- हरी सब्जियां, फल और पौष्टिक भोजन का सेवन करें.
- लंबे समय तक सिरदर्द, उल्टी या चक्कर को नजरअंदाज न करें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
ये छोटे कदम आगे चलकर बड़ी परेशानी से बचा सकते हैं.
किन लोगों को ब्रेन ट्यूमर का सबसे ज्यादा खतरा?
कुछ लोगों में ब्रेन ट्यूमर का जोखिम दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है. इनमें वह लोग शामिल हैं जिनकी फैमिली हिस्ट्री में पहले यह बीमारी रही हो, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. इसके अलावा जो लोग लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं, उनमें भी खतरा बढ़ सकता है. हालांकि, आमतौर पर 40 से 50 साल की उम्र के बाद इसका जोखिम थोड़ा बढ़ता है. कुछ केमिकल्स और प्रदूषित वातावरण में काम करने वालों को भी सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी तरह की दिक्कत हो, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.