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बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी

Bowel Cancer Symptoms: बड़ी आंत के कैंसर के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानना जरूरी होता है. नैशनल हेल्थ सर्विस, यूके से जानिए बड़ी आंत का कैंसर क्या है, इसके क्या लक्षण होते हैं और किन कारणों से हो सकता है यह कैंसर.

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बड़ी आंत की कौन सी दिक्कतें कैंसर का लक्षण हो सकती हैं? AI Generated Image

Badi Aant Ka Cancer: बाउल कैंसर बड़ी आंत से रेक्टम तक के हिस्से में होता है. बड़ी आंत पाचन तंत्र का वो हिस्सा है जो भोजन से वॉटर एब्जॉर्ब करता है और शरीर से वेस्ट पदार्थ को बाहर निकालता है. बाउल कैंसर कितना गंभीर है यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह कैंसर कितना बड़ा है, कहां तक फैल गया है और मरीज की सेहत कैसी है. ऐसे में इस कैंसर के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. नैशनल हेल्थ सर्विस (NHS) यूके ने बाउल कैंसर के ऐसे लक्षणों का जिक्र किया है जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.

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बाउल कैंसर के क्या लक्षण होते हैं | Signs And Symptoms Of Bowel Cancer

  • बाउल मूवमेंट्स में बदलाव होना, जैसे मल का अलग दिखना, लंबे समय तक डायरिया या कब्ज होना.
  • अचानक से सामान्य से कम या ज्यादा बार मलत्याग करना भी आंत की किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है
  • मल में खून नजर आना या मल का रंग लाल या काला दिखना
  • मलद्वार से खून निकलना
  • मलत्याग करने के तुरंत बाद ऐसा महसूस होना जैसे फिर से मलत्याग करने की जरूरत है
  • पेट में दर्द होना
  • पेट में गांठ बनना
  • हमेशा पेट फूला हुआ रहना
  • बिना कोशिश किए ही वजन का कम होना
  • थका हुआ महसूस करना और सांस फूलना. यह बाउल कैंसर के कारण होने वाले अनीमिया का लक्षण हो सकता है.

ये 2 लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत मिलें

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  • अगर मल का रंग काला या गहरा लाल दिखे या फिर खून वाले दस्त होने लगें.
  • अगर मलद्वार यानी रेक्टम से खून निकलने लगे या मल में बड़े खून के थक्के नजर आएं.

इस बात का रखें खास ख्याल

मल में खून या अन्य लक्षण किसी और समस्या के चलते भी हो सकते हैं. जब तक यह कंफर्म ना हो कि आपको बाउल कैंसर है पैनिक ना करें. डॉक्टर से मिलें और जांच कराकर समस्या की जड़ तक जाएं.

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बाउल कैंसर होने के क्या कारण होते हैं

बाउल कैंसर होने के सटीक कारणों (Bowel Cancer Causes) का पता नहीं है लेकिन यह जेनेटिक चेंजेस, लाइफस्टाइल और एन्वायरमेंटल फैक्टर्स के चलते हो सकता है. इसके अलावा कुछ ऐसी कंडीशंस हैं जो आपको बाउल कैंसर का मरीज बना सकती हैं.

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जिन लोगों की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है, जो धूम्रपान करते हैं, जो मोटापे के शिकार हैं, जिनके करीबी रिश्तेदार को बाउल कैंसर हुआ है, जिन्हें बाउल पॉलीप्स की दिक्कत हो, जो इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज से पीड़ित हों उनमें बाउल कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - NHS

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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