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बच्चों का पेट अच्छा रखने के लिए क्या खिलाना चाहिए? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया बच्चे को क्या खिलाएं क्या नहीं

Children’s Gut Health: बच्चों को पेट की समस्याएं ना हों और पाचन से जुड़ी दिक्कतें भी बच्चों से दूर रहें इसके लिए उनकी गट हेल्थ को अच्छा रखना जरूरी है. यहां जानिए बच्चों के पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बच्चे को क्या खिलाने की सलाह दे रहे हैं.

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बच्चों में पेट की समस्याएं कैसे दूर रखें, जानिए यहां.

Children’s Health: गट यानी पेट को शरीर का दूसरा दिमाग कहा जाता है. छोटी उम्र से ही अगर गट हेल्थ का ध्यान ना रखा जाए तो आगे चलकर पेट से जुड़ी अनेक समस्याएं व्यक्ति को घेरने लगती हैं. ऐसे में पेट की सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी होता है. बच्चों का पाचन (Children’s Gut Health) अच्छा रखने के लिए उन्हें क्या खिलाना चाहिए और क्या नहीं इस बारे में बता रहे हैं पेट के डॉक्टर यानी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्सया. डॉक्टर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट शेयर करके इस बारे में बताया है. आप भी जानिए बच्चे का पेट अच्छा रखने के लिए उसे क्या खिलाना चाहिए.

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बच्चों के पेट की सेहत कैसे रहेगी अच्छी

बच्चों की गट हेल्थ को बूस्ट करने के लिए डॉक्टर ने कहा इन 3 बातों का रखें पूरा ध्यान

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  • बच्चों का गट माइक्रोबायोम 3 साल तक डेवलप होता है. यह जिंदगीभर बच्चों के साथ रहता है. इसीलिए बचपन से ही हेल्दी गट हैबिट्स होना बहुत जरूरी है. बच्चों को रोजाना फाइबर से भरपूर चीजें खिलाएं, जैसे पूर्ण अनाज, केला और बेरीज. ये प्रीबायोटिक फाइबर गट बैक्टीरिया को नरिश करते हैं और कब्ज को दूर रखते हैं. साथ ही, इससे बच्चों में मोटापा नहीं होता है.
  • फर्मेंटेड फूड्स जैसे योगर्ट, कंबुचा या फिर केफिर के लाइव बैक्टीरिया आंतों में गुड बैक्टीरिया को फायदा देते हैं, पाचन अच्छा करते हैं और इम्यूनिटी मजबूत बनाने में मददगार हैं. ये बच्चों में लैक्टोस इंटोलरेंस को भी बेहतर बनाते हैं.
  • चिप्स, पैकेट वाले जूस और कुकीज गट बैक्टीरिया को डैमेज करते हैं, कब्ज बढ़ाते हैं और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा भी बच्चों में बढ़ा देते हैं. ऐसे में ये चीजें बच्चों को ना खिलाए़ं. इसके अलावा, अपने बच्चे को बिना वजह एंटीबायोटिक्स देने से परहेज करें. जबतक डॉक्टर ना कहें तबतक बच्चों को एंटीबायोटिक्स ना दें.

पेट की सेहत खराब होने के लक्षण

अगर बच्चे के पेट की सेहत अच्छी नहीं होगी तो बच्चे को बार-बार पेट संबंधी दिक्कतें होने लगेंगी. अक्सर ही पेट में दर्द महसूस होगा. कब्ज (Constipation) होना या हफ्ते में 3 बार से ज्यादा मलत्याग करने में दिक्कत होना खराब गट हेल्थ की निशानी है. इसके साथ ही बिना किसी संक्रमण या दिक्कत के दस्त हो जाना, आयदिन त्वचा की समस्याएं होना, जैसे खुजली या फोड़े-फुंसी निकलना और पेट खराब रहने से अक्सर ही चिड़चिड़ापन महसूस करना, सुस्त रहना या थकान महसूस होना खराब गट हेल्थ की तरफ इशारा करते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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