खबर की मुख्य बातें:
- कनाडाई लेखक और मेमोरी ट्रेनर डॉ. एंथनी मेटिवियर ने याददाश्त मजबूत करने के 4 प्राचीन तरीके बताए हैं.
- इन तकनीकों में सॉन्गलाइन्स और लैंडस्केप, मेमोरी पैलेस, निन्जा तकनीक और गांठ लगाकर याद रखना शामिल हैं.
- ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी रास्तों को याद रखने के लिए उन्हें कहानियों का रूप देते थे, जिसे सॉन्गलाइन्स और लैंडस्केप तकनीक कहते हैं.
- याददाश्त कमजोर होने पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह किसी पोषक तत्व की कमी के कारण भी हो सकता है.
क्या आप भी हर छोटी-मोटी बातों या रास्तों, चीजों को जल्दी भूल जाते हैं, जिस कारण आपको उन चीजों को याद करने में बहुत परेशानी होती है. यह समस्या छोटी लग सकती है, लेकिन जो लोग इस समस्या का शिकार हो जाते हैं, उन्हें ही मालूम होता है कि इस भूल जाने की समस्या के कारण कितना कुछ झेलना पड़ता है. कई बार साथ रहने वाले लोग भी इसी समस्या का मजाक बनाने लगते हैं, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है. अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो हम आपको ऐसे प्राचीन और पारंपरिक तकनीकों के बारे में बताएंगे, जो आपके काफी काम आ सकती है.
अच्छी मेमोरी के लिए क्या करें?
कनाडाई लेखक, मैग्नेटिक मेमोरी मेथड के संस्थापक व मेमोरी ट्रेनर डॉ. एंथनी मेटिवियर याददाश्त मजबूत करने और चीजों को याद रखने करने के लिए ये 4 प्राचीन तरीके बतातें हैं, उनका मानना है कि; यह प्राचीन तकनीकें आज भी काफी काम आ सकती हैं. पहले जब कोई उपकरण नहीं हुआ करता था, तो लोग इन्हीं तरीकों को अपनाकर पुरानी से पुरानी बातों को लंबे समय तक याद रख पाते थे, इतना ही नहीं, आज भी कई लोग रोजमर्रा के जीवन में इनका इस्तेमाल करते हैं.
सॉन्गलाइन्स और लैंडस्केप तकनीक
चीजों को लंबे समय तक याद रखने के लिए आप सॉन्गलाइन्स और लैंडस्केप तकनीक को अपना सकते हैं. डॉ. एंथनी मेटिवियर के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी लोग रास्तों व खास जगहों को याद रखने के लिए उन्हें कहानियों की शक्ल दे देते थे, इससे ये होता था कि जब भी वह उन रास्तों से गुजरते, तो उन्हें तुरंत याद आ जाता था कि ये क्या है और यहां क्या हुआ था. ऐसे में अगर आपको भी रास्ते जल्दी याद नहीं होते हैं या फिर आप रास्तों को जल्दी भूल जाते हैं, तो आप इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
यूनान की ये तकनीक भी आ सकती है काम
जो लोग बातों और कुछ जरूरी चीजों को जल्दी भूल जाते हैं, उनके लिए यूनान की मेमोरी पैलेस तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है. बताया जाता है कि प्राचीन यूनान के जरूरी चीजों को याद रखने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करते थे. इसके लिए परिचित जगह, जैसे घर या अपने कमरे को मन में याद रखना होता है और फिर जानकारियों को घर के अलग-अलग कमरों या कमरे के कोने से जोड़ दिया जाता है. इससे ये होगा कि जब भी व्यक्ति उन जगहों के बारे में सोचेगा, तो उसे तुरंत उससे जुड़ी बातें याद आने लगेंगी.
निन्जा तकनीक
बातों या जरूरी जानकारियों को याद रखने के लिए आप जापानी निन्जा वाली तकनीक का भी सहारा ले सकते हैं. प्राचीन जापानी निन्जा जानकारियों को याद रखने के लिए उन्हें अपने शरीर के अलग-अलग अंगों से जोड़कर याद रखते थे, इससे ये होता था कि जब उन्हें बाते बतानी होती थी, तो वह उन्हें सारी बातें बतानी में आसानी होती थी. आप भी ये तकनीक अपना सकते हैं. जैसे एक उंगली को किसी बात से जोड़ दी, कान को किसी बात से जोड़ दी, ऐसे में अब जब उन अंगों के बारे में सोचेंगे या फिर छूएंगे, तो तुरंत उससे जुड़ी बात आपको याद आ सकती है.
गांठ लगाकर याद रखें
गांठ लगाकर चीजों को याद रखने वाली तकनीक भी आपके काफी काम आ सकती है और इसे कई लोग आज भी अपनाते हैं. इस तरीके में धागे, दुपट्टे या फिर कपड़े में गांठ या घुमाव बनाकर हर गांठ को किसी बात या जानकारी से जोड़ दिया जाता है. यानी की अगर आपको 5 अहम जानकारियों को याद रखना है, तो पांच गांठ लगाना होगा. इसके बाद जब उन गांठ को छूते हैं, तो उस गांठ से जुड़ी बात तुरंत याद आ जाती हैं. पढ़ाई-फॉर्मूला याद रखने के लिए ये तकनीक काफी असरदार साबित होती है और आज भी कई लोग इसे अपनाते हैं.
डॉक्टर से सलाह लें
इन सबके अलावा, डॉक्टर से समस्या की जांच करना भी जरूरी है. कई बार शरीर में किसी खास पोषक तत्वों की कमी या फिर गंभीर बीमारी से व्यक्ति भूलने की बीमारी का शिकार हो जाता है और स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज करना का हाल ये होता है कि समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि व्यक्ति अपनों को ही भूल जाता है. इसलिए जरूरी है कि शरीर में दिख रहे बदलावों को हल्के में न लिया जाए, बल्कि तुरंत डॉक्टर से इसकी जांच कराएं और दवाओं या उनकी सलाह का पालन कर समस्या को ठीक किया जाए.
यह भी पढ़ें: बार-बार चीजें भूलना और याददाश्त कमजोर होने से रहते हैं परेशान? इस खास Vitamin की कमी हो सकती है वजह
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
संबंधित खबरें
30 घंटे से नहीं सोए हैं तो 20 मिनट का वर्कआउट आ सकता है काम: स्टडी
1 hr agoWorld Polio Day 2026: पोलियो होने पर कैसे लक्षण दिखते हैं? UNICEF ने बताया
4 hrs agoक्या है शमोंडा वायरस, जो पहली बार इंसानों में पाया गया?
19 hrs agoशुगर की बीमारी शरीर के किन अंगों पर असर डाल सकती है?
19 hrs agoप्रेग्नेंसी के पहले 3 महीने हैं सबसे ज्यादा जरूरी, AIIMS की डॉक्टर ने बताया
21 hrs agoन दर्द, न शुरुआती लक्षण! फिर भी आंखों की रोशनी छीन सकता है ग्लूकोमा
23 hrs agoशरीर में खुजली होना किडनी की बीमारी का भी हो सकता है संकेत
1 day agoकैंसर के 7 प्रमुख चेतावनी संकेत क्या हैं? स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया
1 day agoपतली कमर और चपटे पेट के लिए ये 5 योग हैं बेस्ट, फिट दिखने लगेगा शरीर
1 day agoसाइलेंट निमोनिया क्या है? बिना बुखार और खांसी के भी हो सकता है इंफेक्शन
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines