16 साल बाद बिछ़ड़े मां-बेटे का मिलन; जानें फेसबुक ने कैसे पूरा कराया परिवार और क्या है मामला?

Bihar Champaran Family Reunion: बिहार के चंपारण जिले का एक परिवार 16 साल बाद अपने बिछड़े बेटे से मिला। फेसबुक के जरिए उसने अपने परिवार को तलाश किया। आइए जानते हैं कि आखिर मामला क्या है और कैसे फेसबुक ने बिछड़ों को मिलाने में मदद की?

Bihar Family

अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मनीष।

Champaran Son Reunion With Father Mother (दिलीप दूबे, बगहा): आज के समय में जहां फेसबुक के जरिए धोखाधड़ी की कई बड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं कुछ अच्छी कहानियां भी सुनने को मिल रही है। ऐसी ही एक कहानी बिहार के पश्चिम चंपारण के पिपरासी खंड की पिपरासी पंचायत के परसौनी गांव निवासी मनीष की है, जो 16 साल बाद अपने परिवार से मिला। वह 8 साल की उम्र में साल 2008 में नाराज होकर घर छोड़कर चला गया था।

विज्ञापन

मनीष को अपने पिता और ग्राम पंचायत का नाम याद था, लेकिन फेसबुक की मदद से उसे अपना परिवार मिल पाया। बुधवार को देर शाम 16 वर्ष बाद जब मनीष गांव पहुंचा तो उसे देखकर मां-बाप के आंसू छलक गए। मां मनीष को गले लगाकर फूट-फूट कर रोई। वहीं मनीष को देखने के लिए पंचायत के मुखिया राजकुमार सहनी, बीडीसी नीरज शर्मा समेत ग्रामीणों की भी़ड़ मौके पर जुटी। वहीं पुलिस ने परिजनों के साथ मिलकर मनीष की पूरी वेरिफिकेशन भी की।

विज्ञापन

फेसबुक पर ग्राम पंचायत मुखिया को पहचान

बताया जा रहा है कि लगभग एक महीना पहले मनीष ने फेसबुक पर अपनी पंचायत के मुखिया और BDC को देखा। उसने दोनों जाने-पहचाने लगे तो उसने इनके बारे में सर्च किया। उसने फेसबुक के जरिए उनका नंबर लेकर फोन करके बात की और अपने पिता के बारे में पूछा। जब उसे पता लगा कि उसके माता-पिता जिंदा हैं तो वह घर आने के लिए सोचने लगा। पंचायत मुखिया से घर का पता लेकर गांव पहुंचा। जब उसने अपने पिता को देखा तो उन्हें पहचान लिया।

विज्ञापन

बेटे से मिलकर मनीष की मां ने बताया कि उसे हमेशा लगता था कि उसका पुत्र कहीं न कहीं जिंदा है। उसे यकीन था कि बेटा एक दिन जरूर लौटकर आएगा। मां की झोली कभी खाली नहीं रहती। भगवान का शुक्र है कि मनीष उन्हें मिल गया। कोई दिन ऐसा नहीं रहा, जब उसकी तलाश न की हो। पिता तो अपना दर्द छिपा लेते थे, लेकिन उसका दर्द कहीं न कहीं आंसू बनकर बाहर छलक ही जाता था। अब जब मनीष सामने है तो यकीन ही नहीं हो रहा कि यह सपना नहीं सच है।

विज्ञापन

घर छोड़कर ट्रेन में बैठ बेंगलुरु चला गया था

ग्राम पंचायत मुखिया ने बताया कि मनीष गिरी 8 साल का था, जब साल 2008 में वह परिजनों से नाराज होकर भाग गया था। उसके भाग जाने के बाद मां नीतू देवी और पिता उमेश गिरी ने उसे काफी तलाश किया, लेकिन वह नहीं मिला। हार थक कर परिजनों को यह लगा कि शायद उसकी मृत्यु हो गई हो। वहीं मनीष ने बताया कि घरवालों से नाराज होकर वह ट्रेन से बैठकर बेंगलुरु चला गया।

वहां इधर उधर घूमते हुए किसी तरह पेट भरता था। फिर बिल्डिंग बनाने वालों के साथ लेबर का काम करते-करते मिस्त्री बन गया। उसे केवल अपने गांव और पिता का नाम याद था, लेकिन वह कैसे घर जाए? किस जिले में है उसक घर? यह सब मालूम नहीं था। फिर एक दिन पंचायत मुखिया को फेसबुक पर देखा और घर लौटने का रास्ता मिल गया।

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ