मुख्य जानकारी:

  • गाजियाबाद में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक अक्टूबर 2026 से बीएस-4 कमर्शियल वाहनों पर प्रतिबंध की तैयारी है.
  • इस नए फैसले की मार शहर के लगभग 50 हजार से अधिक ट्रकों और निजी बसों पर सीधे तौर पर पड़ने वाली है.
  • केंद्र सरकार नए वाहनों की खरीद पर रजिस्ट्रेशन फीस माफी और 10 साल तक टैक्स में छूट की घोषणा कर चुकी है.
  • ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक नई गाड़ियों की कीमतें दोगुनी होने और पुराने लोन बकाया होने से व्यापार ठप हो जाएगा.
  • आरटीओ प्रशासन के अनुसार अभी बीएस-4 पर आदेश नहीं आया है और केवल बीएस-2 व बीएस-3 गाड़ियों पर कार्रवाई हो रही है.

Vehicles Restriction: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर गाजियाबाद में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक अक्टूबर 2026 से यूरो-4 यानी बीएस-4 ट्रकों और बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने ट्रांसपोर्टरों की नींद उड़ा दी है. इस नए और कड़े नियम को लेकर स्थानीय ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में चिंता बहुत तेजी से बढ़ गई है. उनका साफ तौर पर कहना है कि सरकार के इस फैसले का सबसे घातक और सीधा असर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा, जिनकी रोजी-रोटी और पूरी आजीविका सिर्फ कुछ ही गाड़ियों पर निर्भर है. इस प्रतिबंध के लागू होने से उनके सामने अपने परिवारों को पालने और व्यापार को जिंदा रखने का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा.

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50 हजार से ज्यादा गाड़ियां होंगी प्रभावित

संभागीय परिवहन विभाग से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस नए प्रतिबंधात्मक फैसले की वजह से शहर में करीब 50 हजार से भी अधिक ट्रक और बसें पूरी तरह प्रभावित होंगी. हालांकि केंद्र सरकार ने पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाकर नए वाहन खरीदने पर पंजीकरण शुल्क माफ करने और पूरे 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में विशेष छूट देने की घोषणा की है. इसके बावजूद ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि सरकार की ओर से दी जा रही यह राहत उनके बड़े नुकसान के मुकाबले बेहद मामूली और अपर्याप्त है, जिससे उनकी समस्या हल नहीं होने वाली.

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नई गाड़ियों की दोगुनी कीमतों से छोटे कारोबारी लाचार

टूरिस्ट बस टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष संदीप त्यागी ने अपनी बात रखते हुए बताया कि वर्ष 2022 तक खरीदे गए कई बीएस-4 वाहनों का बैंक लोन अभी भी लगातार चल रहा है. वहीं दूसरी तरफ पिछले कुछ वर्षों में नए ट्रकों और बसों की बाजार कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं. ऐसी मुश्किल स्थिति में पुराने वाहनों को बेचने पर उन्हें सही और उचित मूल्य नहीं मिलेगा और नए वाहनों को खरीदना छोटे कारोबारियों के लिए लगभग नामुमकिन होगा. उनका तर्क है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर हाइवे और उन्नत टायरों के कारण उनके मौजूदा बीएस-4 वाहन अभी कई सालों तक बिना किसी परेशानी के चलने के योग्य हैं.

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आरटीओ प्रशासन ने दी अहम जानकारी

इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए आरटीओ प्रशासन प्रमोद सिंह ने एक बड़ी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि विभाग को अभी तक बीएस-4 के वाहनों पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने को लेकर कोई नया सरकारी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. वर्तमान समय में केवल सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले पुराने बीएस-2 और बीएस-3 के वाहनों पर ही संभागीय परिवहन विभाग की ओर से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसके लिए विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए ऐसे पुराने और अनफिट वाहनों को सड़कों पर चिह्नित करने और उनका डेटा तैयार करने का कार्य बहुत तेजी से शुरू कर दिया है.

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निष्कर्ष: गाजियाबाद में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाना पर्यावरण के लिहाज से जरूरी कदम है. हालांकि, छोटे ट्रांसपोर्टरों के रोजगार और आर्थिक संकट को देखते हुए सरकार को कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए ताकि पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ इन कारोबारियों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रह सके.