कैमरे और नियमों से जुड़ी जानकारी:
- गाजियाबाद जिले में संचालित हो रहे सभी 123 पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है.
- इन ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों को पेट्रोल पंपों पर लगाने की अंतिम समय सीमा 30 सितंबर तय की गई है.
- यह नया नियम मुख्य रूप से एनसीआर में प्रतिबंधित किए गए बीएस-4 मानकों से नीचे के कमर्शियल वाहनों को पकड़ने के लिए बना है.
- कैमरे के जरिए नंबर प्लेट स्कैन होते ही प्रतिबंधित गाड़ियों का पूरा डाटा तुरंत परिवहन विभाग के पास ट्रांसफर हो जाएगा.
- पेट्रोल पंप एसोसिएशन समय से पहले यानी जुलाई में ही इन कैमरों को लगवाने के लिए सस्ते और अच्छे वेंडर ढूंढ रही है.
Ghaziabad: दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. इसके तहत जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी एएनपीआर कैमरे लगाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की तरफ से एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इस नई तकनीक की मदद से सड़कों पर नियमों का उल्लंघन कर दौड़ने वाले वाहनों की निगरानी करना प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
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इन कमर्शियल वाहनों पर लगेगा पूरी तरह ब्रेक
इस पूरी योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एनसीआर क्षेत्र में प्रतिबंधित किए गए बीएस-4 मानकों से नीचे के पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी. जैसे ही कोई प्रतिबंधित गाड़ी पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए किसी पेट्रोल पंप पर पहुंचेगी, वहां लगा एएनपीआर कैमरा उस गाड़ी की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेगा. नंबर प्लेट स्कैन होते ही उस गाड़ी की पूरी कुंडली और उसका डाटा सीधे संबंधित सरकारी विभागों के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच जाएगा. इससे प्रतिबंधित श्रेणियों के वाहनों को सड़कों पर चलने से रोकने में बड़ी मदद मिलेगी.
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नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
एएनपीआर कैमरों के जरिए प्रतिबंधित वाहनों की पहचान होने के बाद केवल उनका डाटा ही इकट्ठा नहीं किया जाएगा बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी और प्रवर्तन कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी. सिस्टम में डाटा पहुंचते ही ऐसे वाहनों के खिलाफ ऑटोमैटिक तरीके से ई-चालान की बड़ी कार्रवाई शुरू हो जाएगी, जो सीधे वाहन मालिक के पते या मोबाइल पर पहुंच जाएगा. इसके साथ ही परिवहन विभाग और पुलिस की प्रवर्तन एजेंसियां नियमों के तहत इन प्रतिबंधित कमर्शियल गाड़ियों को जब्त करने या उनके संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए आवश्यक जमीनी कदम भी उठा सकेंगी.
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30 सितंबर तक की डेडलाइन तय
गाजियाबाद प्रशासन की तरफ से जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हर हाल में आगामी 30 सितंबर तक उनके यहां एएनपीआर कैमरे लग जाने चाहिए. जिले में कुल मिलाकर 123 पेट्रोल पंप काम कर रहे हैं और इन सभी पर यह व्यवस्था लागू होना अनिवार्य है. हालांकि पेट्रोल पंप एसोसिएशन और संचालक इस प्रयास में जुटे हैं कि जुलाई के महीने में ही इस काम को पूरा कर लिया जाए ताकि बाद में उन्हें किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े. फिलहाल कम बजट और बेहतर सुविधा देने वाले वेंडर्स की तलाश बहुत तेजी से की जा रही है.
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नियमों के बड़े प्रभाव और फायदे:
- प्रदूषण पर कड़ा प्रहार: पुराने और अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले कमर्शियल वाहनों पर पूरी तरह रोक लगने से गाजियाबाद की हवा साफ होगी.
- ऑटोमैटिक ई-चालान: अब प्रतिबंधित गाड़ियों के मालिकों को मौके पर पकड़ने की जरूरत नहीं होगी, कैमरों की रिपोर्ट पर सीधे घर चालान पहुंचेगा.
- पारदर्शी निगरानी व्यवस्था: एएनपीआर तकनीक के इस्तेमाल से चेकिंग के नाम पर होने वाली मानवीय चूक या भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो जाएगी.
- संचालकों को बड़ी राहत: जुलाई में ही काम पूरा करने की कोशिशों से पेट्रोल पंप मालिकों को आखिरी समय में होने वाली भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी.
- एनसीआर के नियमों का पालन: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के कड़े आदेशों का जमीनी स्तर पर पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराया जा सकेगा.